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सड़क दुर्घटना में 'दूत' बनी पंजाब पुलिस की SSF, 940 जानें बचाईं

Punjab Police: पंजाब पुलिस की 'सड़क सुरख्या फोर्स' (SSF) ने 43 हजार हादसों में मदद कर 940 जानें बचाईं. अब AI और ड्रोन की मदद से पंजाब में 3D पुलिसिंग शुरू होने जा रही है.

पंजाब पुलिस न केवल अपराधियों से प्रदेशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि अपनी प्रमुख परियोजना ‘सड़क सुरख्या फोर्स’ (एसएसएफ) के माध्यम से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित कर रही है, जो कि यात्रियों की जान बचाने के लिए समर्पित हाईवे पेट्रोल बल है और यह ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एआई-संचालित पूर्वानुमान प्रणालियों को एकीकृत कर पंजाब पुलिस को भारत का पहला 3डी पुलिस बल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

समर्पित हाईवे पेट्रोल बल का प्रभाव उन सड़कों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जहाँ इसकी तैनाती है. फरवरी 2024 से जनवरी 2026 तक, एसएसएफ ने 43,983 सड़क दुर्घटनाओं में पहुंचकर कुल 47,386 लोगों की मदद की. इन कार्रवाइयों के दौरान, 19,973 लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाया गया; जिससे तत्काल आपातकालीन प्रतिक्रिया और चिकित्सीय सहायता के माध्यम से लोगों की जान बचाने में महत्त्वपूर्ण योगदान मिला.

हाईवे पेट्रोलिंग पर फोकस

हाईवे सुरक्षा के लिए समर्पित बल के रूप में स्थापित पंजाब एसएसएफ का ध्यान विशेष रूप से निर्धारित हाईवे और प्रमुख सड़कों पर पेट्रोलिंग पर केंद्रित है. पारंपरिक पुलिस व्यवस्था के विपरीत, एसएसएफ के जवानों को नियमित कानून-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी के लिए नहीं लगाया जाता. उनका प्राथमिक दायित्व सड़क सुरक्षा, तत्काल प्रतिक्रिया और दुर्घटना पीड़ितों को सहायता प्रदान करना है.

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हाई-टेक संसाधन और तैनाती

इस बल के पास 144 हाई-टेक वाहन और 1,600 से अधिक विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मी हैं, जिनमें लगभग 28 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मी हैं. टीमों को महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों और प्रमुख ज़िला सड़कों के 4,100 किलोमीटर क्षेत्र में प्रत्येक 30 किलोमीटर पर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है. एसएसएफ की टीमें दुर्घटनाओं पर औसतन 6 से 10 मिनट में प्रतिक्रिया देती हैं, जो वैश्विक मानकों की तुलना में काफ़ी तेज़ है.

‘प्लैटिनम 10 मिनट’ का लक्ष्य

‘प्लैटिनम 10 मिनट’ के सिद्धांत पर आधारित, एसएसएफ     कर्मी का लक्ष्य दुर्घटना पीड़ितों तक छह से आठ मिनट के भीतर पहुँचना है, ताकि एंबुलेंस या अस्पताल की चिकित्सा सहायता पहुँचने से पहले उन्हें तत्काल चिकित्सीय सहायता दी जा सके. एसएसएफ के वाहनों में स्पीड गन, एल्कोमीटर (ब्रेथलाइज़र), ई-चालान मशीनें, डैश कैम और प्राथमिक उपचार किट जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं.

मौतों के आंकड़ों में कमी

इस संबंध में, पंजाब के डीजीपी (डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस) गौरव यादव ने कहा, “कर्मियों को क्रैश इन्वेस्टिगेशन और आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया सहित विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. पिछले दो वर्षों की रिपोर्ट लगातार दर्शाती है कि एसएसएफ की निगरानी वाले विशिष्ट हाईवे मार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 45-48 फीसदी की भारी कमी आई है. ऐसे एसएसएफ-तैनात मार्गों पर मौतों की संख्या 2023 में 1,955 से घटकर 2024 में 1,016 रह गई. इसका अर्थ है कि लगभग एक वर्ष में इन विशिष्ट मार्गों पर करीब 940 लोगों की जान बचाई गई.”

एसएसएफ का शुभारंभ 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 27 जनवरी 2024 को जालंधर में एसएसएफ का औपचारिक शुभारंभ किया था. पंजाब में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की उच्च दर को देखते हुए इस बल का गठन किया गया था, जहाँ प्रतिदिन औसतन 17-18 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो रही थी.

बहुआयामी मदद

सड़क सुरक्षा के अलावा, एसएसएफ की टीमों ने पुलिस कार्रवाई और लोगों की मदद में भी योगदान दिया है. टीमों ने 6 किलोग्राम अफीम और चोरी के वाहन बरामद किए हैं तथा नकदी और सोना उनके असली मालिकों को लौटाने में भी मदद की है. टीमों ने 12 से अधिक आत्महत्याओं को रोकने, स्कूली बच्चों की सहायता करने तथा देर रात यात्रा करने वाली महिलाओं और पर्यटकों की मदद करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

फेज़-II में एसएसएफ का विस्तार

इस बीच, फेज़-II विस्तार के तहत एसएसएफ का कवरेज मौजूदा 5,500 किलोमीटर से बढ़ाकर 6,000 किलोमीटर राज्य सड़कों तक किया जाएगा. लंबी अवधि की योजना विजन एसएसएफ-2047’ का उद्देश्य सैटेलाइट डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और जियोस्पेशियल तकनीकों को एकीकृत करते हुए एक समग्र सड़क सुरक्षा तंत्र विकसित करना है.

3D पुलिसिंग मॉडल

प्रस्तावित 3डी पुलिसिंग मॉडल में ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एआई-संचालित पूर्वानुमान प्रणालियों को एकीकृत किया जाएगा, जिससे वास्तविक समय में स्थिति की जानकारी प्राप्त करने, संभावित ज़ोखिमों का पूर्वानुमान लगाने और पुलिस की तत्काल प्रतिक्रिया में सहायता मिलेगी, जिससे यातायात एवं सड़क सुरक्षा पुलिसिंग को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.

दुर्घटनाओं को न्यूनतम करना

डीजीपी ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा को डिजिटल एनफोर्समेंट के साथ एकीकृत करने के उद्देश्य से ‘विजन एसएसएफ-2047’ में सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाना, पूरी तरह हरित मोबिलिटी कॉरिडोर विकसित करना और पंजाब रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक रिसर्च सेंटर (पीआरएसटीआरसी) के तहत क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र स्थापित करना शामिल है.”

भारत का रोड सेफ्टी हब

डीजीपी ने कहा, “इस परियोजना का एकमात्र लक्ष्य विज्ञान, प्रणालियों और आपसी समन्वय के माध्यम से पंजाब को भारत का रोड सेफ्टी हब बनाना है. पंजाब पुलिस घटना मानचित्रण, यातायात जाम का पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन के लिए सैटेलाइट संचार और जियोस्पेशियल डेटा का उपयोग करेगी. एसएसएफ पहले ही भारत का हाईवे सुरक्षा के लिए समर्पित पहला बल बन चुका है.”

नैनो सैटेलाइट की योजना

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार के नेतृत्व में, राज्य ने हाईवे सुरक्षा के लिए भारत का पहला विशेष बल स्थापित किया और सड़क सुरक्षा प्रदान करने के तरीके को बदल दिया. हम तत्काल प्रतिक्रिया, पेशेवर प्रशिक्षण और सेवा-प्रथम दृष्टिकोण पर भरोसा करते हैं. हम इसे अपने स्वयं के जियोसिंक्रोनस नैनो या माइक्रो सैटेलाइट के साथ एकीकृत करने की संभावनाओं का भी पता लगा रहे हैं.”

आईटीएमएस (ITMS) का आधार

एसएसएफ परियोजना विभिन्न इकाइयों के माध्यम से संचालित हो रही है, जिसमें इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) तकनीकी आधार के रूप में कार्य करता है. यह एआई, आईओटी सेंसर और रियल-टाइम एनालिटिक्स को एकीकृत करते हुए ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट, स्मार्ट सर्विलांस और डेटा-आधारित ट्रैफिक प्लानिंग को सक्षम बनाता है.

7E फ्रेमवर्क

ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) आधारित एनफोर्समेंट, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और मोबाइल इंटरसेप्टर के माध्यम से पुलिस ने दुर्घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने का औसत समय सात मिनट से कम कर लिया है. ‘रोड सेफ्टी पंजाब’ विजन के तहत 7E फ्रेमवर्क—इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इमरजेंसी केयर, एंगेजमेंट और इवैल्यूएशन—के माध्यम से यातायात प्रबंधन में बदलाव किया जा रहा है. यह रणनीति अनुमान और व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित प्रबंधन से हटकर साक्ष्य-आधारित और तकनीक-संचालित दृष्टिकोण की ओर बदलाव को दर्शाती है.

पीआरएसटीआरसी और अनुसंधान

दूसरी ओर, पीआरएसटीआरसी अनुसंधान, परामर्श और प्रशिक्षण का नेतृत्व करता है. इसे शिक्षा जगत, उद्योग और नागरिक समाज से जुड़े रिसर्च एडवाइजरी ग्रुप्स (आरएजी) का सहयोग प्राप्त है. आईआईटी, एनआईटी, प्लाक्षा यूनिवर्सिटी, जीएनडीईसी लुधियाना और जीएनडीयू अमृतसर जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के साथ सक्रिय सहयोग के माध्यम से पीआरएसटीआरसी क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के लिए एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में कार्य कर रहा है. यह साझा डेटा, संयुक्त परियोजनाओं और इंटर्नशिप के माध्यम से इनोवेशन को बढ़ावा दे रहा है.

अन्य राज्यों से तुलना

अन्य राज्यों की तुलना में, उपलब्ध आंकड़े यह दर्शाते हैं कि हाईवे सुरक्षा, तकनीक के इस्तेमाल और जन-जवाबदेही तंत्र को लेकर राज्यों के दृष्टिकोण में महत्त्वपूर्ण अंतर है. एसएसएफ की संरचना अन्य राज्यों के मॉडलों से अलग है, जैसे कि, महाराष्ट्र हाईवे पुलिस मौजूदा राज्य पुलिस की एक अत्याधुनिक और प्रभावी शाखा है, न कि एक अलग बल.

सोच में बदलाव

डीजीपी ने कहा, “सफलता केवल नए वाहनों की वजह से नहीं है, बल्कि यह कार्रवाई से सेवा की ओर सोच में आए बदलाव का परिणाम है.”

जीवन रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

इस बीच, एसडीजीपी (ट्रैफिक एवं रोड सेफ्टी, पंजाब) अमरदीप सिंह राय ने कहा, “नियमित पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिसके लिए अलग और व्यापक कौशल की आवश्यकता होती है.दूसरी ओर, एसएसएफ को स्पष्ट और सर्वोच्च प्राथमिकता—लोगों की जान बचाना—के साथ विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. एसएसएफ कर्मियों को आपातकालीन प्रतिक्रिया और प्राथमिक उपचार के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल से प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें रेड क्रॉस द्वारा दिया गया प्रशिक्षण भी शामिल है और उन्हें ‘क्रैश इन्वेस्टिगेशन’ का प्रशिक्षण भी दिया गया है. पूरा बल एक ही अवधारणा—‘प्लैटिनम 10 मिनट’—के इर्द-गिर्द बनाया गया है, जिसके तहत दुर्घटना पीड़ित तक छह से आठ मिनट के भीतर पहुँचकर एंबुलेंस या अस्पताल की सहायता पहुँचने से पहले उसे तत्काल चिकित्सीय सहायता प्रदान करना अनिवार्य है.”

वीआईपी ड्यूटी से मुक्त

उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, एसएसएफ कर्मियों को वीआईपी ड्यूटी के लिए नहीं लगाया जाता और न ही स्थानीय कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्यों के लिए उनकी ड्यूटी बदली जाती है. उनका एकमात्र प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (की परफ़ॉर्मेंस इंडिकेटर) सड़क सुरक्षा और पीड़ितों को सहायता प्रदान करना है.”

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