पंजाब कांग्रेस में नहीं थम रहा घमासान, राजा वडिंग की कुर्सी पर संकट? चन्नी गुट ने बढ़ाया दबाव
Punjab Congress Crisis: सोमवार (13 जुलाई) को भी चरणजीत चन्नी अपने गुट के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं. हालांकि ये बड़े स्तर की बैठक नहीं होगी.

पंजाब कांग्रेस में चल रहे घमासान के बीच चरणजीत चन्नी गुट पार्टी केंद्रीय नेतृत्व पर अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बनाए हुए है और यह गुट अपना दवाब बनाकर रखेगा. बेशक पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल शनिवार (11 जुलाई) को चन्नी और उनके गुट के नेताओं से चंडीगढ़ में मिल चुके हैं और अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को देंगे. मगर चन्नी गुट अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाने की मांग को लेकर दबाव बनाकर रखेगा.
सोमवार (13 जुलाई) को भी चरणजीत चन्नी अपने गुट के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं. हालांकि ये बड़े स्तर की बैठक नहीं होगी. लेकिन केंद्रीय नेतृत्व को भूपेश बघेल की रिपोर्ट सौंपे जाने से पहले और नेतृत्व द्वारा निर्णय से पहले चन्नी गुट दबाव बनाकर रखना चाहता है और इसलिए चन्नी अपने समर्थक नेताओं से मुलाकातों का सिलसिला जारी रखेंगे.
बैठक में चन्नी गुट ने रखी मांग
शनिवार (11 जुलाई) को हुई बैठक में चन्नी गुट के 15 नेताओं ने बघेल के सामने बात रखी थी. इसमें सबने मांग की थी कि राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया जाए. चन्नी ने इस मांग पर नेताओं से हाथ खड़े करवाकर भी सहमति ली थी. फिलहाल पंजाब कांग्रेस में चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.
शनिवार को कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को बदलने की मांग की, जबकि राज्य के प्रभारी पार्टी महासचिव भूपेश बघेल ने दावा किया कि मौजूदा अध्यक्ष को एक और कार्यकाल देने के पार्टी आलाकमान के फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है.
कांग्रेस ने राजा वडिंग को दोबारा बनाया अध्यक्ष
कांग्रेस ने 1 जुलाई को घोषणा की थी कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष बने रहेंगे और जालंधर से सांसद चन्नी को चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे चन्नी ने अब तक बघेल से मुलाकात नहीं की थी. बघेल सोमवार को पंजाब पहुंचे थे और इसके बाद उन्होंने राज्य के कई नेताओं एवं पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं.
चन्नी के करीबी कई नेता भी इन बैठकों से दूर रहे थे. सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को करीब 80 मिनट तक चली बैठक में बागी गुट ने अपनी ताकत दिखाई, जिसमें कम से कम 12 विधायकों समेत 80 से ज्यादा नेता शामिल हुए- और बघेल के सामने यह बात रखी कि वे राज्य इकाई के प्रमुख के तौर पर वडिंग को बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं.
























