CM की कुर्सी से बगावत तक... बिहार, झारखंड और अब पंजाब, जानें- उन 3 नेताओं के बारे में जो अपनों के लिए बने मुसीबत
बिहार, पंजाब और झारखंड में क्रमशः चरणजीत सिंह चन्नी, चंपाई सोरेन और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था, जिन्होंने इस्तीफे के बाद बगावती तेवर दिखाए.

भारतीय राजनीति में ऐसे कई मोड़ आए जहां पर राजनीतिक दलों को मजबूरी में नेताओं को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा. इन राज्यों में बात बिहार, पंजाब और झारखंड की है. तीनों राज्यों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और जनता दल युनाइटेड ने चरणजीत सिंह चन्नी, चंपाई सोरेन और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया. हालांकि बाद में जीतन राम मांझी और चंपाई सोरेन को जब सीएम पद छोड़ने के लिए कहा गया तो उन्होंने बड़ी बगावत की.
अब बताते हैं इन तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बारे में बताते हैं कि वह कैसे बागी रुख अख्तियार कर अपनों के लिए ही मुसीबत बने.
जीतन राम मांझी
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद पार्टी ने मुसहर जाति के सशक्त बनाने और दलित चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति के चलते जीतन राम मांझी को सीएम बनाया था. जीतन राम मांझी 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे. मांझी दलित समुदाय से आते हैं. ऐसे में पार्टी ने रणनीति के तहत उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था.
वहीं जब जीतन राम मांझी को नीतीश कुमार की जेडीयू ने जब मुख्यमंत्री पद से हटाया तो उन्होंने पार्टी को बगावती तेवर दिखा दिए. इसके बाद उन्होंने जेडीयू से अलग होकर अपनी खुद की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की स्थापना की. इसके बाद उन्होंने जेडीयू से अलग होकर चुनाव लड़े. नीतीश कुमार को भी मजबूरी में जीतन राम मांझी को सीएम बनाना भारी पड़ा. इसका कुछ हद तक उन्हें दलित वोटों का नुकसान उठाना पड़ा.
चंपाई सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साल 2024 में मनी लॉन्ड्रिंग केस के चलते जेल जाने के बाद पार्टी ने विकल्प के तौर या यूं कहें कि मजबूरी में चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया था. चंपाई सोरेन ने 2 फरवरी 2024 को झारखंड के 7वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी. हालांकि हेमंत सोरेन के जेल से आने के बाद 3 जुलाई 2024 को उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. इससे नाराज होकर चंपाई सोरेन ने हेमंत सोरेन के खिलाफ बगावत कर दी थी. चंपाई सोरेन ने हेमंत सरकार के मंत्रिपद और झामुमो के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया.
उन्होंने झारखंड की सरायकेला विधानसभा सीट से इस्तीफा देकर अगस्त 2024 में भारतीय जनता पार्टी का दामन लिया. ऐसे में हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा को मजबूरी का सीएम बनाना भारी पड़ा था. बीजेपी में जाने के बाद चंपाई सोरेन लगातार हेमंत सोरेन सरकार पर हमलावर नजर आए थे.
चरणजीत सिंह चन्नी
पंजाब में साल 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस पार्टी ने भारी गुटबाजी के बाद चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर मुहर लगाई थी. चन्नी को पंजाब का पहला दलित मुख्यमंत्री बनाया गया था. दरअसल कांग्रेस में गुटबाजी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 से 4 महीने पहले चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था. पार्टी ने दलित वोटों को साधने और एंटी इनकंबेंसी के चलते उन्हें राज्य की कमान सौंपी थी.
अब साल 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले चरणजीत सिंह चन्नी बगावती तेवर दिखा रहे हैं. दरअसल चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस पार्टी पर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले खुद को सीएम फेस घोषित करने का दवाब बना रहे हैं. ऐसे में अगर पार्टी उन्हें सीएम फेस नहीं बनाती है तो वे बगावती रुख अपना सकते है. इससे कांग्रेस को मजबूरी में बनाए गए मुख्यमंत्री का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
फिलहाल मामला पंजाब का चर्चा में है और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनाव से पहले चरणजीत सिंह चन्नी पार्टी आलाकमान पर कितना दबाव बना पाते हैं.
साथ ही अगर वह दबाव में बनाने में सफल होते हैं तो क्या चुनाव परिणामों में इसका सकारात्मक असर पार्टी पर पड़ेगा? अगर नहीं तो इस बात की संभावना पूरी है कि परिणामों के बाद भी पंजाब में कांग्रेस की गुटबाजी और फल फूल सकती है.























