लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उद्धव गुट के नेताओं से क्या कहा? संजय राउत ने किया बड़ा खुलासा
Shiv Sena UBT Crisis: उद्धव गुट के लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की.

शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने लोकसभा स्पीकर से बुधवार (17 जून) को मुलाकात की. छह से सात सांसदों के महाराष्ट्र में शिवसेना में शामिल होने के लिए अलग समूह बनाने की चर्चा के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर आग्रह किया कि इस मामले में कोई भी फैसला नियमों, कानून, संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए. पार्टी के लोकसभा सदस्य अरविंद सावंत और अनिल देसाई और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की.
'इस संबंध में हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली'
स्पीकर से मुलाकात के बाद राउत ने कहा, ‘‘कल से मैं देख रहा हूं कि हमारी पार्टी के कुछ लोगों को लेकर ऐसी खबरें चलाई जा रही हैं कि कुछ सांसद अलग समूह बनाने की कोशिश कर रहे हैं और लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करने वाले हैं. हमने लोकसभा अध्यक्ष से कहा है कि हमें नहीं पता कि ये खबरें सही हैं या गलत, क्योंकि इस संबंध में हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. लेकिन इस तरह की खबरें लगातार सामने आ रही हैं.’’
'पहले हमारे पक्ष को भी सुना जाए'
संजय राउत ने बताया, ‘‘हमने उन्हें एक पत्र भी सौंपा है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को शिवसेना (यूबीटी) का प्रतिनिधि बताकर अलग समूह बनाने का दावा करते हुए उनके पास आता है, तो पहले हमारे पक्ष को भी सुना जाए.’’
राउत ने कहा, ‘‘जो भी फैसला किया जाए, वह पूरी तरह नियमों, कानून, संविधान और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए. हमारी केवल यही अपेक्षा है.’’
स्पीकर ने उद्धव गुट को दिया ये आश्वासन
राउत महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए ‘‘50 करोड़ रुपये’’ की पेशकश किए जाने का आरोप लगा चुके हैं. राउत ने कहा कि स्पीकर ने उन्हें आश्वासन दिया है कि कोई भी फैसला लेने से पहले वह कानून के हर पहलू पर विचार करेंगे. उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा अध्यक्ष एक सम्मानित व्यक्ति हैं और उन्होंने हमसे कहा कि अगर कोई उनसे मिलने आता है तो वह सभी पहलुओं को ध्यान में रखेंगे.’’
देसाई ने बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक प्रतिवेदन सौंपकर उनसे शिवसेना (यूबीटी) से किसी भी गैरकानूनी दलबदल को रोकने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा, ‘‘कानून के तहत दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होने पर भी कोई समूह सीधे किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकता. किसी समूह के पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत होने पर केवल मूल राजनीतिक दल का विलय हो सकता है.’’
'छह सांसद होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता'
देसाई ने कहा, ‘‘यह फैसला लोकसभा अध्यक्ष का होता है इसलिए अगर दो-तिहाई सांसदों के समर्थन का दावा करने वाला कोई समूह किसी अन्य दल में विलय के लिए उनके पास पहुंचता है तो नियमों के तहत उस समूह को मान्यता नहीं दी जा सकती क्योंकि प्रावधानों के अनुसार केवल मूल राजनीतिक दल का विलय हो सकता है. छह सांसद होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता.’’
शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा में नौ सांसद हैं और दल बदल रोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा.
राजाभाऊ वाजे ने कहा- मैं उद्धव ठाकरे के प्रति वफादार
सावंत और देसाई के अलावा शिवसेना (यूबीटी) नेता एवं सांसद राजाभाऊ वाजे ने घोषणा की है कि वह पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के प्रति वफादार हैं. बाकी छह सांसदों के बारे में माना जा रहा है कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं.
स्पीकर बिरला से मुलाकात से पहले राउत ने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को धन का प्रलोभन दिया जा रहा है. राउत ने कहा, ‘‘मुझे बताया गया कि कीमत 50 करोड़ रुपये है और रात तक प्रत्येक सांसद को 15 करोड़ रुपये पहुंचाए जाने थे. वे धन मिले बिना विमान में सवार होने को कथित तौर पर तैयार नहीं थे.’’























