'मुंबई में हिंदुओं के समर्थन की सरकार', नितेश राणे के बयान पर सना मलिक बोलीं, 'कोई कुछ भी...'
BMC Election Mumbai: एनसीपी की विधायक सना मलिक ने अजित पवार और शरद पवार के बीच महानगर पालिका चुनाव में गठबंधन पर भी प्रतिक्रिया दी.

महाराष्ट्र में होने वाले महानगर पालिका के चुनावों से पहले बड़ी सियासी तस्वीर उभर कर सामने आई. अजित पवार और शरद पवार दोनों साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. दोनों के दलों के बीच पुणे के पिंपरी-चिंचवड के लिए गठबंधन हुआ है. इस पर अजित पवार गुट की नेता और एनसीपी की विधायक सना मलिक की प्रतिक्रिया सामने आई है.
कुछ नाराजगी की वजह से बंट गए थे- सना मलिक
सना मलिक ने कहा, "दोनों परिवार एक साथ मिलकर अपने अपने सिंबल पर चुनाव लड़ रहे हैं. हम परिवार का ही एक हिस्सा था. कुछ नाराजगी और भेदभाव होने की वजह से दो अलग-अलग पार्ट में बंट गए थे. आज वो चुनाव लड़ने के लिए गठबंधन कर रहे हैं. जब अलायंस होता है तो इसका एक मिनिमम प्रोग्राम होता है, वो फॉलो करते हैं. दोनों की विचारधारा एक ही है."
इसके आगे उन्होंने कहा, "पिंपरी-चिंचवड में एनसीपी की मजबूत पकड़ है. दोनों पार्टी अगर एक साथ आने हैं तो दोनों को नुकसान नहीं होगा. पिछली बार जो हमें समर्थन मिला था, इस बार भी मिलेगा. हम उसी समीकरण को लेकर आगे बढ़ रहे हैं."
नितेश राणे के बयान पर क्या बोलीं?
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के बयान पर उन्होंने कहा कि सना मलिक ने कहा कि संविधान ने हर नागरिक को वोट करने का अधिकार दिया है. कुछ नियमों के साथ चुनाव लड़ने का भी अधिकार दिया है. उस अधिकार के साथ आगे बढ़ते हुए जनता तय करेगी कि किसको मेयर बनाएगी. एक राजनीतिक दल होने के नाते हमारी एक ही जिम्मेदारी है कि हम एक सक्षम उम्मीदवार को आगे बढ़ाएं. कोई कुछ भी बोले लेकिन संविधान ने हर नागरिक को अधिकार दिया है.
दरअसल, AIMIM के नेता वारिस पठान ने कहा था कि हिजाब वाली महिला भी मुंबई की मेयर बन सकती है. इस पर मंत्री नितेश राणे ने कहा था कि वारिस पठान शायद यह भूल गए हैं कि वे किस देश और किस राज्य में रहते हैं. भारत एक हिंदू बहुल देश है और महाराष्ट्र में ऐसी सरकार है जो हिंदुत्व की विचारधारा को मानती है और जिसे हिंदू समाज के समर्थन से चुना गया है. अगर कोई नेता इस तरह के सपने देख रहा है, तो उसे पहले जमीनी हकीकत समझनी चाहिए. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, खासकर मुंबई, ऐसा शहर नहीं है, जहां समाज को बांटने वाली या उकसावे वाली राजनीति को आसानी से स्वीकार कर लिया जाए.
Source: IOCL






















