महाराष्ट्र के इस चुनाव में रविंद्र चव्हाण-एकनाथ शिंदे का मास्टरस्ट्रोक, 21 में से 13 सीटों पर कब्जा
Thane News In Hindi: ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में महायुति ने अलग-अलग पैनलों से उम्मीदवार उतारकर विपक्ष को चित कर दिया. भाजपा के 8 और शिंदे गुट के 5 उम्मीदवार विजयी हुए हैं.

ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के पैनल सिस्मट वाले चुनाव में महायुति ने बेहद सूझबूझ वाली रणनीति अपनाई. केंद्र और राज्य स्तर पर सहयोगी होने के बावजूद भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने अलग-अलग पैनलों से चुनाव लड़ा. जिसका परिणाम ये हुआ कि ‘सहकार पैनल’ ने ‘परिवर्तन पैनल’ को शिकस्त देते हुए 13 सीटें हासिल कर बहुमत हासिल कर लिया.
पिछले कई वर्षों से ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक पर बहुजन विकास आघाड़ी और हितेंद्र ठाकूर का मजबूत प्रभाव रहा है. इस बार सत्ता परिवर्तन के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और रवींद्र चव्हाण ने महायुति के स्तर पर मास्टरस्ट्रोक खेला. दोनों दलों ने दो अलग पैनलों में अपने उम्मीदवार उतारे, जिससे विरोधी पक्ष को भारी नुकसान हुआ.
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दोनों पैनलों में महायुति के उम्मीदवार
सहकार पैनल में शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ विधायक किसन कथोरे के नेतृत्व में भाजपा के कई मजबूत उम्मीदवार मैदान में थे. वहीं परिवर्तन पैनल में भी भाजपा और शिंदे गुट के कुछ उम्मीदवार शामिल थे. दोनों पक्षों ने इसे “बड़ी संख्या में इच्छुक कार्यकर्ताओं” की वजह से अपनाई गई रणनीति बताया. इस चाल ने विरोधी पैनल की तैयारियों को बेअसर कर दिया.
चुनाव परिणाम और बहुमत
घोषित परिणामों के अनुसार भाजपा के 8 और शिवसेना (शिंदे गुट) के 5 उम्मीदवार विजयी रहे. कुल 21 सीटों वाले चुनाव में बहुमत के लिए 11 सीटें जरूरी थीं, लेकिन महायुति समर्थित 13 उम्मीदवार जीतकर बैंक बोर्ड में मजबूत स्थिति बना चुके हैं. इससे बैंक पर महायुति का नियंत्रण स्थापित हो गया है.
अब अध्यक्ष पद की रेस तेज
चुनाव नतीजों के बाद अब बैंक के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारियों के चयन को लेकर जोरदार चर्चाएं शुरू हो गई हैं. राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अंतिम फैसला महायुति के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा. आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि बैंक की कमान किसे सौंपी जाती है.
राजनीतिक महत्व
यह जीत महायुति के लिए ठाणे जिले में सहकारी क्षेत्र में बढ़ती पकड़ का संकेत है. सहकारी बैंक चुनाव अक्सर स्थानीय राजनीति और भविष्य के विधानसभा-लोकसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं. महायुति की इस सफलता से विपक्षी दलों में निराशा है, जबकि सत्ताधारी खेमे में उत्साह है.
























