Maharashtra: न डेकोरेशन और न DJ का शोर, शादी के पैसे खर्च हुए कहीं और! जान कर हैरान रह जाएंगे ये मामला
Maharashtra: चंद्रपुर के सुसा गांव में अपनी शादी के पैसों से दूल्हे ने किसानों के लिए 600 मीटर लंबी सड़क बनाई. समाज सुधारक ज्योतिराव फुले से प्रेरित होकर, उन्होंने पर्यावरण के लिए 90 पौधे भी लगाए.

Maharashtra News: जहां लोग शादी को दिखावे का जरिया बनाते हैं, वहीं एक ऐसा मामला सामने आया है जहां युवक ने शादी के लिए जुटाए पैसों का ऐसा इस्तेमाल किया कि हर कोई बस देखता रह गया. महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के वरोरा तहसील के सुसा गांव में रहने वाले श्रीकांत एकुडे ने अपनी शादी को समाज के लिए प्रेरणा बना दिया. जहां आमतौर पर शादियों में लाखों रुपये खर्च कर भव्य समारोह किए जाते हैं, वहीं श्रीकांत ने यह पैसा ग्रामीणों की सुविधा के लिए एक सड़क निर्माण में लगा दिया.
श्रीकांत ने 28 अप्रैल को अंजलि से सादे समारोह में विवाह किया. इस आयोजन में उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों और फिजूलखर्ची से दूरी बनाए रखी और अपने परिवार व मेहमानों को भी इस सोच के साथ जोड़ा. उन्होंने सभी से आग्रह किया कि शादी में उपहार देने की बजाय समाजोपयोगी कार्यों में सहयोग करें.
गांव वालों की सुविधा के लिए बना 600 मीटर लंबा रास्ता
कृषि में स्नातकोत्तर श्रीकांत ने बताया कि उन्होंने 50,000 रुपये एकत्र किए, और इस राशि से लगभग 600 मीटर लंबी सड़क का निर्माण करवाया. यह सड़क गांव से खेतों तक पहुंचने का मार्ग है, जो खासकर मानसून के दौरान कीचड़ और पानी से दुर्गम हो जाता था. उन्होंने कहा, "बरसात के समय लोगों के लिए खेतों तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता था. इसलिए मैंने ठान लिया कि इस बार शादी में सिर्फ खुद की खुशी नहीं, पूरे गांव की सुविधा को प्राथमिकता दूंगा."
‘सत्यशोधक’ आंदोलन से मिली प्रेरणा
इस नेक कार्य में श्रीकांत को ग्राम पंचायत और स्थानीय लोगों का भी सहयोग मिला. यह कदम उन्होंने समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले द्वारा समर्थित 'सत्यशोधक' आंदोलन से प्रेरणा लेकर उठाया.
शादी में उपहार नहीं, पर्यावरण की सेवा
इतना ही नहीं, श्रीकांत ने शादी के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की ओर भी कदम बढ़ाया. उन्होंने रिश्तेदारों से पारंपरिक उपहार लेने की बजाय 90 पौधे लगाए और बताया कि गांव में 36 तरह के फलों के पेड़ लगाए गए हैं. श्रीकांत का यह निर्णय केवल ग्रामीण विकास की दिशा में एक छोटा सा प्रयास नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश है कि व्यक्तिगत खुशी के साथ समाज कल्याण को कैसे जोड़ा जा सकता है.
Source: IOCL





















