महानगर पालिका चुनाव: कौन दल किसके साथ, किसके खिलाफ, दिमाग हिला देगी पूरी तस्वीर!
Maharashtra Civic Polls: महाराष्ट्र में 2017 के बाद अब महानगर पालिका के चुनाव हो रहे हैं. तब 15 नगर निगम पर शिवसेना , 5 बीजेपी, 3 कांग्रेस-एनसीपी, 3 कांग्रेस अकेले और एक शिवसेना-कांग्रेस ने जीती थी.

बीजेपी और कांग्रेस को छोड़कर इस चुनाव में सब सबके साथ हैं और सब सबके खिलाफ हैं. जो साथ हैं, वही खिलाफ हैं. जो खिलाफ हैं, वही साथ में भी हैं. कहीं पर साथ हैं तो कहीं पर खिलाफ हैं. महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के लिए हो रहे चुनाव में जो नया सियासी समीकरण बना है, उसने न सिर्फ राजनीतिक पंडितों को चकरा दिया है बल्कि इस समीकरण को समझना बड़े-बड़े सियासी दलों के लिए भी टेढ़ी खीर बन गया है. महाराष्ट्र का नया सियासी समीकरण क्या है, कौन सी पार्टी किसके साथ चुनाव लड़ रही, कौन किसके खिलाफ है, कौन कहां साथ है और कहां कौन खिलाफ में है, सब विस्तार से जानें.
2017 के नतीजे
15 जनवरी को महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के लिए वोटिंग होनी है. इनमें से 27 नगर निगम पुराने हैं और दो नए जुड़े हैं. जो पुराने 27 हैं, वहां पर आखिरी बार वोटिंग साल 2017 में हुई थी. तब 27 में से 15 नगर निगम शिवसेना के खाते में थे और पांच बीजेपी के खाते में गई थी. तीन नगर निगमों पर कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर कब्जा किया था. मालेगांव में कांग्रेस और शिवसेना ने मिलकर जीत दर्ज की थी. वहीं तीन नगर निगमों में कांग्रेस ने अकेले जीत दर्ज की थी.
8 साल में बहुत कुछ बदला
लेकिन पिछले 8 साल में बहुत कुछ बदल चुका है. अब एक शिवसेना में दो शिवसेना है. अब एक एनसीपी में दो एनसीपी हैं. अब एक शिवसेना बीजेपी के साथ है और दूसरी बीजेपी के खिलाफ. अब एक एनसीपी भी बीजेपी के साथ है और दूसरी खिलाफ. लेकिन ये सारे समीकरण विधानसभा के हैं. राज्य स्तर की राजनीति के जिसको एक बार दोहरा देते हैं. पहला गठबंधन महायुति है. इसमें बीजेपी, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी एक साथ हैं. दूसरा गठबंधन महाविकास अघाड़ी है. इसमें कांग्रेस, उद्धव की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी एक साथ हैं.
बाकी मनसे अलग, बहुजन विकास अघाड़ी अलग और बाकी के छोटे दल हैं. लेकिन नगर निगम के चुनाव में ये समीकरण भी ध्वस्त हो चुके हैं और अब कुछ और भी नए समीकरण बन गए हैं, जिसके बारे में शायद ही किसी ने कभी सोचा होगा.
मुंबई महानगर पालिका यानी BMC
बीएमसी में बीजेपी शिंदे वाली शिवसेना के साथ लड़ रही है. 227 सीटों में से 137 सीटों पर बीजेपी और 90 पर शिंदे की शिवसेना. वहीं कांग्रेस ने पुराना सारा गठबंधन तोड़ दिया है और नया गठबंधन प्रकाश अंबेडकर की पार्टी बहुजन वंचित अघाड़ी के साथ किया है. अब 227 सीटों में से 165 सीटें कांग्रेस लड़ रही है, जबकि बहुजन वंचित अघाड़ी 62 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
एक और गठबंधन ठाकरे भाइयों का है. महाविकास अघाड़ी से बाहर निकलकर उद्धव ठाकरे ने अपने भाई राज ठाकरे के साथ गठबंधन किया है. अब उद्धव की शिवसेना 175 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि भाई राज ठाकरे की पार्टी मनसे 52 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. शरद पवार की एनसीपी बीएमसी में सिर्फ 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. हालांकि तय ये भी हुआ है कि जहां शरद पवार के उम्मीदवार हैं, वहां उद्धव अपने उम्मीदवार नहीं उतारेंगे. लेकिन बात यहां खत्म नहीं होती. अभी तो एक और पार्टी है जो चुनाव लड़ रही है. अजित पवार अकेले लड़ रहे हैं. बीएमसी में उन्होंने 64 सीटों पर दांव लगाया है.
लेकिन अभी बात खत्म नहीं हुई है. अभी दो और पार्टियां हैं, जो अकेले-अकेले चुनाव लड़ रही हैं. केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने 39 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं. केंद्र में बीजेपी के सहयोगी हैं. बाकी राहुल गांधी के करीबी और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बड़े साथी अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी भी अकेले दम पर बीएमसी का चुनाव लड़ रही है. सपा ने 150 से अधिक सीटों पर दांव लगाया है.
मुंबई का समीकरण पुणे में आकर बदला
ये सिर्फ मुंबई का समीकरण है, जो पुणे जाकर पूरी तरह से बदल जाता है. मुंबई में जो जिसके साथ है, पुणे में वो उसके खिलाफ है. आखिर पुणे भी मुंबई के बाद महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा नगर निगम जो है.
पुणे में बीजेपी अलग है और शिंदे की शिवसेना अलग. वहां कोई गठबंधन नहीं है. गठबंधन टूटा क्योंकि पुणे की 165 सीटों में से बीजेपी शिंदे को सिर्फ 16 सीटें ही देने को तैयार थी. इसलिए गठबंधन टूट गया. लेकिन यहां चाचा-भतीजा एक हैं. एक गठबंधन में यानी कि शरद पवार और अजित पवार. शरद पवार ने अपने तुतारी चुनाव चिह्न पर 40 उम्मीदवार उतारे हैं तो भतीजे अजित पवार ने घड़ी निशान पर 125 पर दांव लगाया है. रही बात कांग्रेस की, तो मुंबई में ठाकरे भाइयों से नाता तोड़ने वाली कांग्रेस ने पुणे में हाथ मिला लिया है. पुणे में कांग्रेस, उद्धव की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. मुंबई में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने वाली वंचित बहुजन अघाड़ी पुणे में कांग्रेस के खिलाफ अकेले ही लड़ रही है.
कुछ ऐसा ही हाल नागपुर का भी है. नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का घर है. यहां बीजेपी और शिंदे की शिवसेना एक साथ है. बीजेपी 143 सीटों पर लड़ रही है तो शिंदे 8 सीटों पर मान गए हैं. कांग्रेस भी यहां उद्धव और शरद पवार के साथ है. यहां चाचा-भतीजे अलग-अलग हैं. अजित पवार यहां अकेले हैं. वहीं वंचित बहुजन अघाड़ी ने नागपुर के लिए बसपा के साथ समझौता किया है.
बाकी कौन कहां किसके साथ है और किसके खिलाफ?
पिंपरी-चिंचवड़ : पिंपरी-चिंचवड़ में फिर से चाचा-भतीजा एक साथ हैं यानी कि शरद पवार और अजित पवार. बीजेपी भी शिंदे के साथ है. वहीं कांग्रेस उद्धव के साथ, जिसमें राज ठाकरे की मनसे भी है.
कोल्हापुर : कोल्हापुर में सत्ताधारी महायुति एकजुट है. वहां बीजेपी, शिंदे और अजित पवार एक साथ हैं. जबकि यहां महा विकास अघाड़ी बिखर गई है. कोल्हापुर में शरद पवार ने आम आदमी पार्टी और बहुजन वंचित अघाड़ी के साथ गठबंधन किया है. कांग्रेस ठाकरे भाइयों के साथ गठबंधन में है.
ठाणे : ठाणे में शिंदे की शिवसेना और बीजेपी एक साथ हैं. वहीं दूसरा गठबंधन ठाकरे भाइयों का है यानी कि उद्धव की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे एक साथ हैं. तीसरा गुट कांग्रेस का है, जिसमें शरद पवार की एनसीपी और बहुजन वंचित अघाड़ी शामिल हैं. यहां अकेले लड़ने वाली एआईएमआईएम ने भी चुनाव को दिलचस्प बना दिया है.
नासिक: नासिक में बीजेपी अलग है, जबकि शिंदे और अजित पवार एक साथ हैं. दूसरा गठबंधन ठाकरे भाइयों का है, जहां उद्धव की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे एक साथ हैं. कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी अलग गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं.
कल्याण-डोंबिवली : कल्याण डोंबिवली में बीजेपी शिंदे वाली शिवसेना के साथ है. ठाकरे भाई एक साथ हैं यानी कि उद्धव की शिवसेना और राज की मनसे. तीसरा गठबंधन कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी और वंचित बहुजन अघाड़ी का भी है.
वसई-विरार : वसई-विरार में सबसे बड़ी पार्टी है हितेंद्र ठाकुर वाली बहुजन विकास अघाड़ी, जो अकेले चुनाव लड़ रही है. यहां पर उद्धव ठाकरे बिल्कुल अलग हैं. वो भाई राज के साथ चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि महायुति के तीनों दल यानी कि बीजेपी, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी एक साथ है. हालांकि एक और गठबंधन है यहां कांग्रेस का, जो वंचित बहुजन अघाड़ी और एआईएमआईएम के साथ का है.
छत्रपति संभाजी नगर : छत्रपति संभाजी नगर पहले औरंगाबाद हुआ करता था. यहां बीजेपी और शिंदे की शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं. आखिरी वक्त पर उन्होंने गठबंधन तोड़ दिया है. अजित पवार भी अकेले ही चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. बाकी इम्तियाज ज़लील के नेतृत्व में एआईएमआईएम भी बड़ी दावेदार है, जो अकेले चुनाव लड़ रही है.
नवी मुंबई : नवी मुंबई में बीजेपी और शिंदे की शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं. वहां आखिरी वक्त तक बात नहीं बन पाई. बाकी दोनों भाई यानी कि उद्धव और राज एक साथ हैं. वहीं शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस का अलग गठबंधन है. आम आदमी पार्टी भी यहां अकेले चुनाव लड़ रही है.
सोलापुर : सोलापुर में बीजेपी अकेले चुनाव लड़ रही है. जबकि यहां पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना अजित पवार की एनसीपी के साथ है. वहीं तीसरा गठबंधन कांग्रेस, उद्धव की शिवसेना, राज ठाकरे की मनसे और शरद पवार की एनसीपी का है. वहीं वंचित बहुजन अघाड़ी ने ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया है.
मीरा-भयंदर : यहां पर भी महायुति में टूट हो गई है. बीजेपी और शिंदे यहां अलग-अलग चुनाव लड़ रही है. जबकि उद्धव अपने भाई राज के साथ हैं. कांग्रेस शरद पवार के साथ है तो हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास अघाड़ी भी अकेले ताल ठोक रही है.
भिवंडी-निजामपुर : भिवंडी में बीजेपी शिंदे के साथ है. अजित पवार अलग हैं, शरद पवार अलग हैं और कांग्रेस अलग है. उद्धव ठाकरे भाई राज ठाकरे के साथ उतर रहे हैं. बाकी तो इस नगर निगम में आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम भी अपने-अपने उम्मीदवार उतार चुकी है.
अमरावती : अमरावती में अजित पवार अकेले हैं. बीजेपी और शिंदे साथ में हैं. तीसरा गठबंधन कांग्रेस और उद्धव का है. लेकिन सबसे ज्यादा दिलचस्पी एक नई पार्टी युवा स्वाभिमान पार्टी की है, जो रवि राणा की पार्टी है. रवि राणा बीजेपी की पूर्व सांसद नवनीत राणा के पति हैं और बीजेपी से गठबंधन न होने के बाद अकेले ही निकाय चुनाव में उम्मीदवार उतार रहे हैं. बाकी एआईएमआईएम ने भी यहां वंचित बहुजन अघाड़ी के साथ हाथ मिलाया है.
नांदेड़ : नांदेड़ में महाविकास अघाड़ी की तीनों पार्टियां यानी कि कांग्रेस, उद्धव की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी एक साथ है तो दूसरा गठबंधन महायुति का है, जिसमें बीजेपी, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी एक साथ है. यहां वंचित बहुजन अघाड़ी और एआईएमआईएम अकेले चुनाव लड़ रही है.
अकोला : अकोला में शरद पवार की एनसीपी कांग्रेस के साथ है. कुछ जगहों पर उद्धव के साथ भी बात है, लेकिन कुछ जगहों पर उद्धव अलग होकर फ्रेंडली फाइट कर सकते हैं. वहीं महायुति की दो पार्टियां यानी कि बीजेपी और अजित पवार की एनसीपी एक साथ चुनाव लड़ रही है. शिंदे यहां अकेले चुनाव लड़ रहे हैं. प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी भी अकेले चुनाव लड़ रही है.
पनवेल : पनवेल में बीजेपी और शिंदे एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं. यहां पर उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, कांग्रेस और शरद पवार के साथ शेतकरी कामगार पक्ष भी गठबंधन में है. हालांकि गठबंधन सिर्फ ग्रामीण इलाकों में है, जहां शेतकरी मजबूत हैं, वहां अकेले लड़ रहे हैं.
उल्हासनगर : उल्हासनगर में बीजेपी अकेले लड़ रही है. शिंदे की शिवसेना ने यहां नया ही गठबंधन बना लिया है, जिसमें टीम ओमी कलानी और साई पार्टी शामिल हैं. कलानी की पार्टी के 32 लोग शिंदे की पार्टी के चुनाव निशान तीर-धनुष पर चुनाव लड़ रहे हैं. तीसरा गठबंधन ठाकरे भाइयों का है, जिसमें शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस भी शामिल है.
सांगली-मिराज-कुपवाड़ : सांगली में भी शिंदे की शिवसेना ने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ दिया है. अब शिंदे और बीजेपी अलग-अलग 78 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. अजित पवार भी अलग लड़ रहे हैं. वहीं शरद पवार का गठबंधन कांग्रेस के साथ है. दोनो भाई उद्धव और राज मिलकर सबके खिलाफ लड़ रहे हैं.
मालेगांव : मालेगांव को दिलचस्प बनाया है एआईएमआईएम ने, जिसने शरद पवार की एनसीपी और उद्धव की शिवसेना के साथ गठबंधन किया है. कांग्रेस सभी 84 सीटें अकेले लड़ रही है. बीजेपी और शिंदे एक साथ आ गए हैं.
जलगांव : जलगांव में राज ठाकरे की मनसे बिल्कुल अलग चुनाव लड़ रही है. यहां उद्धव की शिवसेना, शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस एक साथ हैं. दूसरा गठबंधन बीजेपी, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी का है. हालांकि महायुति में कम से कम 20 सीटों पर फ्रेंडली फाइट भी होनी है. वंचित बहुजन अघाड़ी ने भी यहां उम्मीदवार उतारे हैं.
लातूर : लातूर में कांग्रेस के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी एक है. महायुति भी यहां पर एक है. यानी कि बीजेपी, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी मिलकर लड़ रहे हैं.
धुले : धुले में बीजेपी और शिंदे मिलकर लड़ रहे हैं. दूसरा गठबंधन उद्धव की शिवसेना, मनसे और शरद पवार की एनसीपी का है. तीसरा गठबंधन कांग्रेस का है, जिसमें लोकसंग्राम पार्टी भी शामिल है. यहां एआईएमआईएम भी चुनावी मैदान में है.
अहिल्यानगर : अहिल्यानगर का पुराना नाम होता था अहमदनगर. यहां पर महायुति के तीनों दल यानी कि बीजेपी, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी एक साथ हैं. महाविकास अघाड़ी के तीनों दल यानी कि कांग्रेस, उद्धव की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. वंचित बहुजन अघाड़ी यहां अकेले चुनाव लड़ रही है.
चंद्रपुर : चंद्रपुर में बीजेपी और शिंदे साथ हैं. अजित पवार अकेले चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं उद्धव की शिवसेना प्रकाश आंबेडकर की बहुजन वंचित अघाड़ी के साथ है. राज ठाकरे की मनसे और कांग्रेस यहां अकेले-अकेले चुनाव लड़ रहे हैं.
परभणी : परभणी में बीजेपी और शिंदे की शिवसेना एक साथ है. यहां सबसे दिलचस्प अजित पवार हैं, जो अपने चाचा शरद पवार के साथ चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस और उद्धव ठाकरे-राज ठाकरे का अपना अलग गठबंधन है. बाकी बहुजन वंचित अघाड़ी और एआईएमआईएम भी अकेले-अकेले चुनाव लड़ रहे हैं.
इचलकरंजी : यहां बीजेपी, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी एक साथ है. दूसरे गठबंधन में कांग्रेस और उद्धव साथ-साथ हैं. तीसरे मोर्चे में शाहू फ्रंट है, जो मिल मालिकों और लेबर यूनियन ने मिलकर बनाया है. बाकी वंचित बहुजन अघाड़ी भी चुनाव लड़ ही रही है.
जालना : जालना नया बना नगर निगम है, जहां पहली बार चुनाव होने हैं. यहां बीजेपी और शिंदे की शिवसेना दोनों ही अकेले-अकेले चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि महाविकास अघाड़ी की तीनों पार्टियां यानी कि कांग्रेस, उद्धव की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी एक साथ हैं वहीं प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी अकेले ही चुनाव लड़ रही है.
और ये सारे समीकरण तब के हैं, जब 30 दिसंबर 2025 को नामांकन खत्म हो चुका है. 3 जनवरी 2026 नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है, तो हो सकता है कि उस दिन तक कुछ और नए समीकरण बन जाएं और कुछ बने समीकरण बिगड़ जाएं तो नाम भी वापस हो सकते हैं.
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