'एकनाथ शिंदे भी कांग्रेस में...', चव्हाण के दावे के बाद हुसैन दलवई का बड़ा दावा
Maharashtra News: पृथ्वीराज चव्हाण ने दावा किया कि बीजेपी के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे ने कभी कांग्रेस में शामिल होने की संभावना तलाशी थी. इस बीच कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने भी बड़ा बयान दे दिया.

महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने दावा किया है कि बीजेपी के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे ने कभी कांग्रेस में शामिल होने की संभावना तलाशी थी. उनके इस बयान को लेकर अब सियासी घमासान जारी है. पृथ्वीराज चव्हाण के बयान की गोपीनाथ मुंडे की बेटी ने भी आलोचना की है.
इस बीच कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, "बिल्कुल सही बात है. ऐसा है कि उनके आने का सब कुछ तय हो गया था. इसके लिए वे सोनिया गांधी से मिलने जा रहे थे, लेकिन इस बीच अहमद पटेल का उनके पास फोन आया और कहा कि पहले इस्तीफा दो फिर शामिल हो जाइए. इसलिए वो नहीं आ पाए. मेरे ख्याल से कांग्रेस ने उस समय गलती की. पृथ्वीराज चव्हाण का कहना बिल्कुल ठीक है. यही बात एकनाथ शिंदे के लिए भी थी. एकनाथ शिंदे भी कांग्रेस में आना चाहते थे लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उन्हें नहीं आने दिया.
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गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकडा मुंडे ने दावे पर क्या कहा?
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे ने अपने पिता गोपीनाथ मुंडे को लेकर कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के दावे को सिरे से खारिज किया है. पंकजा ने कहा कि उनके पिता का जन्म कमल (बीजेपी) में हुआ था और वे कमल में ही विलीन हो गए.
पंकजा मुंडे ने तीखी प्रतिक्रिया दी और चव्हाण के दावे को खारिज करते हुए कहा कि इस बयान का इस समय कोई महत्व नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता ऐसे नेता नहीं थे, जो किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी से बीजेपी में आए हों. पंकजा मुंडे ने पत्रकारों से कहा, पृथ्वीराज चव्हाण के बयान का अब कोई महत्व नहीं है. जहां तक मैं अपने पिता को समझती हूं, वे इसी 'कमल' यानी बीजेपी में जन्मे थे और इसी में रहे.
पंकजा ने इसे अनुचित बताया
पंकजा ने कहा कि गोपीनाथ मुंडे बीजेपी से गहराई से जुड़े हुए थे और उन्हें ऐसा व्यक्ति बताना, जिन्हें पार्टी में बाहर से लाया जा सकता था या जो एक राजनीतिक खेमे से दूसरे में जा सकते थे, अनुचित है. इससे पहले, चव्हाण ने दावा किया कि गोपीनाथ मुंडे ने कांग्रेस में शामिल होने की शर्त के तौर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में पद की मांग की थी.
उन्होंने आगे दावा किया कि इस मामले पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से चर्चा की गई थी, जिन्होंने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी. चव्हाण ने कहा कि यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका, क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विपक्षी दल के सांसद को सत्ताधारी पार्टी में लाकर सरकार में शामिल करने के पक्ष में नहीं थे.
पूर्व सीएम ने दावा किया कि मनमोहन सिंह विपक्षी नेता को तोड़ने और उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाने के विचार के खिलाफ थे और उनकी आपत्ति के कारण ही आखिरकार यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई.
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