BRICS समिट: सुप्रिया सुले बोलीं, 'जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे...'
BRICS समिट से जुड़े सवाल पर बारामती से लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि आज विदेश मंत्रालय की जो पॉलिसी है, वो चिंताजनक है. हम दोस्त चुन सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं चुन सकते.

BRICS समिट पर कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सवाल उठाए थे. इस पर एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि आज जो विदेश मंत्रालय (MEA) की पॉलिसी है वो चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि वो सरकार से इस बार में कई बार बात कर चुकी हैं. उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर एक ऑल पार्टी मीटिंग होनी चाहिए.
दोस्त चुन सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं- सुप्रिया सुले
बारामती से लोकसभा सांसद ने कहा, "यहां जी-20 की बैठक हुई थी. विदेश मंत्रालय का रोल क्या है और आगे हमारे रणनीतिक रिश्ते कैसे होंगे, इस पर गंभीर होकर सोचना चाहिए. आप दोस्त चुन सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं चुन सकते."
इसके आगे सुप्रिया सुले ने कहा, "आपको याद होगा मनमोहन सिंह साहब देश के प्रधानमंत्री थे और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत (नवंबर 2010) आए थे. इसके बाद उन्होंने एक किताब लिखी थी. प्रेसिडेंट ओबामा ने मनमोहन सिंह को अपना गुरु बताया. अमेरिका का राष्ट्रपति हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को गुरु मानता है, ये कितनी बड़ी बात है. यही तो रिश्ते हैं. ऐसे ही रिश्ते आगे बढ़ते हैं."
पी चिदंबरम ने क्या कहा था?
पी चिदंबरम ने हाल ही में एक इंटरव्यू में सवाल उठाया था कि ब्रिक्स समूह से भारत को क्या फायदा मिलता है. उन्होंने कहा था कि उन्हें इस समूह की हाल की बैठकों से कोई बड़ा नतीजा निकलता नहीं दिखा.
BRICS में कौन-कौन से देश शामिल?
ब्रिक्स में फिलहाल 11 प्रमुख उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, भारत, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. पूर्ण सदस्यों के अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम ब्रिक्स पार्टनर देशों के रूप में समूह में भाग लेते हैं.
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