Exclusive: 'आखिरी समय में...', अजित पवार का प्लेन उड़ाने वाले पायलट के ट्रेनर ने क्या बताया?
Maharashtra News: बारामती विमान हादसे में कम विजिबिलिटी, ऑपरेशनल दबाव और आखिरी सेकंड में हुई चूक की आशंका जताई जा रही है, जबकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों पायलट अनुभवी और प्रशिक्षित बताए गए हैं.

बारामती विमान हादसे को लेकर सामने आ रही शुरुआती जानकारी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस हादसे में जान गंवाने वाले दोनों पायलटों को ट्रेनिंग देने वाले रिटायर्ड एयर कमोडोर और अन्य एविएशन एक्सपर्ट्स ने इस घटना को तकनीकी और मानवीय दबावों से जुड़ा बताया है.
नियमों के अनुसार किसी भी विमान की सुरक्षित लैंडिंग के लिए कम से कम 5000 मीटर की विजिबिलिटी जरूरी मानी जाती है. लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि हादसे के समय विजिबिलिटी लगभग 3000 मीटर के आसपास थी. इसके बावजूद लैंडिंग का प्रयास किया गया, जो जांच का एक अहम बिंदु बन सकता है.
CCTV फुटेज के विश्लेषण से मिले हादसे के संकेत
CCTV फुटेज के विश्लेषण में यह संकेत मिले हैं कि आखिरी कुछ सेकंड में विमान के साथ कुछ गड़बड़ हुई. एक्सपर्ट्स का मानना है कि पायलट को अंतिम क्षणों में यह एहसास हुआ होगा कि विमान सही जगह पर नहीं उतर रहा है. उस समय कैप्टन रनवे को विजुअली पहचानने की कोशिश कर रहे थे और संभव है कि इसी दौरान कुछ सेकंड के लिए विमान की स्पीड और ऊंचाई पर ध्यान कम हो गया हो.
बेहद की अनुभवी ते दोनों पायलट- एक्सपर्ट्स
एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि दोनों पायलट बेहद अनुभवी और काबिल थे. उन्हें ट्रेनिंग देने वाले उनके इंस्ट्रक्टर ने साफ कहा है कि किसी तरह की बुनियादी गलती या लापरवाही की संभावना बहुत कम है. ऐसे में यह हादसा मानवीय कमजोरी से ज्यादा परिस्थितियों और दबाव का नतीजा हो सकता है.
एक्सपर्ट्स ने 'VIP प्रेशर' की आशंका भी जताई है. कई बार ऑपरेशनल या मानसिक दबाव में पायलट लैंडिंग का फैसला ले लेते हैं. वरिष्ठ पायलट होने के कारण यह सोच भी मन में आ सकती है कि दोबारा लैंडिंग टालना उनकी क्षमता पर सवाल खड़ा कर देगा. यही दबाव इस दुखद हादसे की एक वजह हो सकता है. जिसकी गहन जांच जारी है.
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