महाराष्ट्र: 'मैं खुद इस मामले की...' बेटे पार्थ के जमीन से जुड़े विवाद पर बोले डिप्टी CM अजित पवार
Ajit Pawar Son News: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार के बेटे पार्थ इन दिनों मुश्किल में हैं. जमीन की डील में अनियमितताओं को लेकर उनके खिलाफ जांच बैठ गई है.

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार के जमीन सौदे में कथित अनियमितताओं के खुलासे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है. पार्थ पवार ने पुणे के पास महार वतन की जमीन आईटी पार्क के लिए खरीदते समय करोड़ों रुपये की स्टांप ड्यूटी माफी लेकर अवैध लाभ उठाए.
इस खुलासे के बाद विपक्ष ने अजित पवार के राजीनामे की मांग की. वही एनसीपी प्रमुख अजीत पवार ने इस मामले में अब सामने आकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि मैंने पहले भी बताया है कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि वह इस मामले में वह किसी भी तरह की गलत हरकत को बर्दाश्त नहीं करेंगे.
मामले पर क्या बोले अजीत पवार?
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अजीत परवार ने कहा, "मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि जो भी खबरें चलाई जा रही हैं, उनके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है. मेरा इस मामले से कोई संबंध नहीं है. मैं पहले ही साफ कर चुका हूं कि मैं किसी भी तरह की इन गलत हरकतों को बर्दाश्त नहीं कर सकता."
उन्होंने आगे कहा, "मैं खुद इस मामले की सभी जानकारियां देखकर उसका विश्लेषण करूंगा. मैंने कभी किसी अधिकारी को यह नहीं कहा कि वह मेरे किसी रिश्तेदार या पार्टी कार्यकर्ता को फायदा पहुँचाए. अगर कोई व्यक्ति गलत कर रहा है या नियमों के विरुद्ध जा रहा है, तो मैं कभी उसका समर्थन नहीं करूंगा. मैं हमेशा कानून और नियमों का पालन करता हूं.
सीएम फडणवीस द्वारा जांच के आदेश दिए जाने पर अजीत पवार ने कहा, "मुख्यमंत्री को इस मामले की जांच अवश्य करनी चाहिए और सच्चाई सामने लानी चाहिए. यह उनका अधिकार और दायित्व है कि वे मामले के हर पहलू की जांच करें. सभी को नियमों का पालन करना चाहिए, और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह मेरा करीबी ही क्यों न हो, नियमों को तोड़ने की इजाजत नहीं है. मैंने कभी किसी मुद्दे से पीछे नहीं हटने की नीति अपनाई है."
सीएम फडणवीस ने जारी किए जांच के आदेश
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जमीन घोटाले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खारगे की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई गई है. जांच में यह देखा जाएगा कि जमीन का सौदा कैसे हुआ, महार वतन की जमीन के नियमों का पालन हुआ या नहीं और स्टाम्प ड्यूटी देते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं.
पुणे के कोरेगांव पार्क क्षेत्र में लगभग 40 एकड़ की प्रीमियम जमीन की खरीद में पार्थ पवार और उनकी कंपनी पर मूल मालिक और सरकार को धोखा देने का आरोप है. स्टाम्प ड्यूटी विभाग की प्रारंभिक जांच में यह लेन-देन पूरी तरह अवैध पाया गया है. इस वजह से पुणे के उपनिबंधक रविंद्र तारू को निलंबित कर दिया गया है.
पूरा मामला क्या है?
यह सौदा कोरेगांव पार्क (पुणे) की महंगी जमीन का है, जिसे पार्थ अजित पवार की कंपनी ने खरीदा. पार्थ पवार उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे हैं और बारामती क्षेत्र में अजित पवार का राजनीतिक कार्यभार संभालते हैं. पार्थ पवार की इस कंपनी में उनके मामेभाई दिग्विजय पाटिल भी साझेदार हैं, जो पूर्व मंत्री राणा जगजीत सिंह के रिश्तेदार हैं.
राज्य सरकार की नीति के अनुसार,यदि कोई सूचना प्रौद्योगिकी (IT) या IT-सहायक परियोजना अपनी पूंजी में कम से कम 25% अतिरिक्त निवेश करती है,तो उसे विस्तार या विविधीकरण परियोजना माना जाता है और स्टाम्प ड्यूटी माफी का लाभ दिया जा सकता है, लेकिन यह छूट केवल तभी मिलती है जब संबंधित प्राधिकरण से वैध प्रारंभ प्रमाणपत्र या अनुमोदन प्राप्त हो.
अमेडिया कंपनी (Amedia Company), जिसमें पार्थ पवार और दिग्विजय पाटिल साझेदार हैं, उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को आईटी पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया. इस प्रस्ताव पर पार्थ और दिग्विजय दोनों के हस्ताक्षर स्पष्ट रूप से दिखते हैं. केवल दो दिनों बाद, यानी 24 अप्रैल 2025 को राज्य के उद्योग संचालनालय ने स्टाम्प ड्यूटी माफी को मंजूरी की मोहर दे दी. इसके बाद 27 दिनों के भीतर जमीन का सौदा पूरा कर लिया गया.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी ने 22 अप्रैल को प्रस्ताव पारित किया और सिर्फ 48 घंटों में सरकार ने अनुमति भी दे दी.यानी न तो विस्तृत जांच हुई, न औपचारिक समीक्षा सिर्फ दो दिनों में इतनी बड़ी मंजूरी मिलना संदेहास्पद माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि इस पूरे मामले में कंपनी ने सरकारी नीति का लाभ उठाकर स्टाम्प ड्यूटी में बड़ी राहत हासिल की.
मामले में तहसीलदार का निलंबन
पुणे तहसीलदार सूर्यकांत येवले को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. राज्य सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए राज्य के जॉइंट IGR (Inspector General of Registration) और मुद्रांक नियंत्रक राजेंद्र मुठे की अध्यक्षता में पांच अधिकारियों की समिति गठित की है. जांच के पहले दो घंटों में ही मुठे ने उपनिबंधक रविंद्र तारू को निलंबित कर दिया है.
समिति ने कई दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है.राजेंद्र मुठे को न केवल पुणे विभाग बल्कि पूरे राज्य के राजस्व विभाग की बारीक जानकारी है. फाइलों के छोटे से छोटे पहलू से भ्रष्टाचार खोजकर कार्रवाई करने में वे माहिर माने जाते हैं.
उन्होंने पुणे के निवासी जिलाधिकारी, विभागीय आयुक्त कार्यालय, नगर निगम और अब राजस्व सचिव विकास खारगे के ओएसडी (OSD) के रूप में कार्य किया है. कुछ महीने पहले ही मुठे को मुद्रांक शुल्क विभाग की बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी. अब वही मुठे 1840 करोड़ रुपये के जमीन सौदे की जड़ तक पहुंचने का काम करेंगे.
उद्योग मंत्री उदय सामंत ने क्या कहा?
इस मामले पर उदय सामंत ने कहा, "इस जमीन का उद्योग विभाग से कोई संबंध नहीं है. स्टाम्प ड्यूटी में किसी तरह की छूट नहीं दी गई है. यह जमीन MIDC क्षेत्र के बाहर की है, इसलिए हमारे विभाग का इससे कोई लेना-देना नहीं है."
उन्होंने बताया कि पार्थ पवार के पास मौजूद दस्तावेज पूरी तरह नियमों के अनुरूप हैं. सूट देने का अधिकार केवल कैबिनेट के पास है. यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सभी अटकलों को समाप्त करने के लिए है.
अपने भतीजे पर सुप्रिया सुले ने क्या कहा?
इस मामले को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा, "मुझे अपने भाई के बेटे पार्थ पर पूरा भरोसा है वह कोई गलत काम नहीं करेगा. जो जानकारी सामने आई है, वह मीडिया के माध्यम से आई है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह जांच करवाएंगे. इस मामले में तहसीलदार का निलंबन भी हो गया है." उन्होंने कहा कि यह सब देखकर लगता है जैसे यह कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ हो. सरकार कहती है ‘यह जमीन बेची नहीं जा सकती. तहसीलदार कहते हैं ‘मैंने हस्ताक्षर नहीं किए. तो सवाल उठता है रजिस्ट्री हुई या नहीं?
सुप्रिया सुले ने आगे कहा, "आखिर सरकार चला कौन रहा है? हम लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं. आज सुबह ही मेरी पार्थ से बात हुई. उसने कहा ‘मैंने कुछ भी गलत नहीं किया. उसकी लीगल टीम सभी पहलुओं की जांच कर रही है. अब मुख्यमंत्री को इस विषय पर स्पष्टिकरण देना चाहिए. सभी को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए.
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Source: IOCL




























