Hindoria News: MP के इंजीनियर ने खेती को बनाया व्यवसाय, जानें Mushroom से कैसे ले रहे हैं बड़ा लाभ
Mushroom Farmer: मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के जिले के ग्राम हिंडोरिया (Hindoria) के किसान अतुल धनकर एक इंजीनियर (Engineer) है. इन्होंने मशरूम (Mushroom) की खेती को अपना व्यवसाय बनाया.

MP News: मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के जिले के ग्राम हिंडोरिया (Hindoria) के किसान अतुल धनकर एक इंजीनियर (Engineer) है. इन्होंने मशरूम (Mushroom) की खेती को अपना व्यवसाय बनाया. वे बताते हैं मशरूम की खेती कम लागत में अधिक प्रॉफिट देने वाली खेती है. जिस किसान के पास खेती के लिए जमीन नहीं है फिर भी वह खेती करना चाहता है तो वह घर से ही कच्चे या पक्के मकान में इस खेती को शुरू कर सकते है.
क्या मिला प्रॉफिट
अतुल धनकर बताते हैं कि शुरुआत के समय इसमें चार से पांच हजार की लगात लगाई थी. इसके बाद लोकल मार्केट में जो प्रोडक्ट है, जिनमें मशरूम का अचार, मशरूम पाउडर एवं प्रेस मशरूम से लगभग आठ से नौ हजार का प्रॉफिट लिया है. अभी भी कुछ रॉ मटेरियल रखा है. जिससे आगे भी कुछ प्रॉफिट मिलेगा.
कैसे होती है खेती
अतुल ने बताया कि इसके लिए उन्होंने जबलपुर (Jabalpur) में एक दिन की ट्रेनिंग ली थी. उसके बाद कृषि विज्ञान केंद्र दमोह (Krishi Vigyan Kendra, Damoh) के अधिकारियों से मार्गदर्शन लिया. जिसका काफी सपोर्ट मिला है. अब इसको और बड़े लेवल पर करना है. उन्होंने बताया इसके एक सर्कल में लगभग 40 से 50 रूपये की लागत आती है. एक पैकेट में लगभग दो किलो भूसा आता है. 200 ग्राम बीज लगता है. यह 25 दिन में पहली फसल दे देता है. एक सर्कल में दो से ढाई किलो मशरूम निकलता है. जो कि लोकल मार्केट में 150 से लेकर 160 रूपए प्रति किलो तक बिक जाता है.
किन केमिकल का होता है उपयोग
अतुल धनकर ने बताते है कि मशरूम में काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. उन्होंने बताया भूसे में कीटाणु रहते हैं. उनको उपचारित करना पड़ता है. इसके लिए दो केमिकल होते हैं एक फॉर्मएल्डिहाइड और दूसरा वामिस्टकि पाउडर आता है. इसमें भूसे को कम से कम 12 से 14 घंटे तक भूसे को गलाना पड़ता है. उसके बाद उसको निकालकर इसकी स्पोनिंग की जाती है.
कितनी रहता है तापमान
मशरूम की खेती कर रहे अतुल ने बताया कि खेती एक बंद कमरे में की जाती है. इसके लिए तापमान और नमी को जांचने के लिए इसमें एक मीटर का यूज़ किया है. इस मीटर में ऊपर टेंप्रेचर बताता है. इस खेती के लिए 20 से 30 डिग्री का टेंप्रेचर सही होता है. मीटर में नीचे ह्यूमीडिटी बताता है. इतनी नमी में पैकेट को ज्यादा पानी भी नहीं देना पड़ता है, नमी बनी रहती है. जिससे ये पानी को खींचते रहते हैं. इसके अलावा कमरे के चारों तरफ बोरे का उपयोग किया जाता है. बोरे का उपयोग सबसे ज्यादा गर्मी में होता है. ज्यादा गर्मी होने के कारण कमरे में गर्मी बढ़ जाती है. नमी कम हो जाती है इस कारण से हम बोरे का उपयोग करते हैं. बोरे में पानी डालकर यहां पर नमी बढ़ा सकते हैं और टेंप्रेचर को भी कम कर सकते हैं.
क्या रहती है कीमत
अतुल धनकर बताते हैं कि मशरूम को तोड़कर धूप में सुखाया जाता है. सूखे हुए मशरुम से डायरेक्ट हम मशरूम पाउडर बनाते हैं. मार्केट में जो मशरूम पाउडर मिलते हैं, उनमें लगभग 30 प्रतिशत मशरूम होता है और बाकी अलग तरीके के केमिकल या अन्य चीजें होती हैं. लेकिन या शत-प्रतिशत शुद्ध मशरूम पाउडर है. इससे किसी भी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है. इसके अलावा मशरूम का अचार भी बनाया जाता है. यह घर पर बनाया हुआ शुद्ध अचार है. 100 ग्राम मशरूम पाउडर की लागत लगभग 100 रूपये आती है. लेकिन मार्केट में इसकी कीमत लगभग 200 से 220 रूपये किलो मिल जाती है. इसी प्रकार से आचार मार्केट में 100 रूपये का 250 ग्राम मिलता है इसकी लागत लगभग 70 से 72 रुपये आती है.
किसका जताया आभार
किसान अतुल धनकर ने बताया यह जो खेती एवं व्यवसाय है यह युवाओं के लिए बहुत ही अच्छा व्यवसाय है. इससे इनको काफी ज्यादा प्रॉफिट हो रहा है. इसमें युवाओं के लिए काफी रोजगार के अवसर है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कृषि विज्ञान केंद्र से अधिकारियों द्वारा हमें विशेष सहयोग मिला है. कभी भी किसी भी प्रकार की तकनीकि प्रॉब्लम आती है तो उनका सहयोग हमेशा हमें मिलता है.
क्या बोले अधिकारी
अधिकारियों ने बताया आने वाले सत्र में ओ.एफ.टी. के माध्यम से अनुदान प्रदान करने की बात कही है. इसके लिए उन्होंने इनका बहुत-बहुत धन्यवाद किया. कृषि विज्ञान केंद्र दमोह से कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ मनोज अहिरवार ने बताया कि हिंडोरिया से किसान अतुल धनकर मशरूम की सफल खेती कर रहे हैं. उन्होंने मशरूम की खेती के बारे में बताया कि यह जो मशरूम है वो लाभदायक फफूंद है. यह कई प्रकार का होता है लेकिन कुछ हानिकारक भी होता हैं. कुछ लाभदायक फफूंद होती हैं. मशरूम में एक लाभदायक प्रोटीन कैल्शियम वाला पदार्थ है. इसमें अधिक मात्रा में पोषक तत्वों रहते हैं.
कोरोना के समय सबसे ज्यादा मांग
डॉ अहिरवार बताते हैं अभी कोरोना के समय में सबसे ज्यादा डिमांड मशरूम की थी. मशरूम को धोकर जैसे पनीर की सब्जी बनाते हैं उसी प्रकार मशरूम की सब्जी बना सकते हैं. यह बहुत ही न्यूट्रेटिव सब्जी है और बहुत ही पौष्टिक है. कोरोना के समय में शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मशरूम बहुत ही अच्छा है. इसको शाकाहारियों का मीट भी कहा जाता है. इसके अलावा अचार एवं प्रोटीन पाउडर बनता है, प्रोटीन पाउडर जिम में बॉडीबिल्डर द्वारा उपयोग किया जाता है. ये कच्चा मशरूम भी बेच रहे हैं. मशरूम को धूप में या ओवन में सुखाकर स्टोर भी कर सकते हैं.
क्या बोले कृषि वैज्ञानिक
कृषि विज्ञान केंद्र दमोह से डॉ राजेश द्विवेदी ने बताया किसान अतुल धनकर कृषि विज्ञान केंद्र के संपर्क में आए. इसके बाद इन्होंने जबलपुर विश्वविद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त किया. उसके बाद की जो तकनीकी जानकारी एवं मार्गदर्शन. कृषि विज्ञान केंद्र दमोह से डॉक्टर साहब ने और इनके पहले वैज्ञानिक डॉक्टर बी.एल. साहू थे. उन्होंने इनको मार्गदर्शन दिया. इसके बाद उन को प्रोत्साहित किया. वर्तमान में यह सफल व्यवसाय कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि जिसके पास जमीन ना हो वह इस व्यवसाय को अपनाकर अपनी आजीविका अच्छी तरीके से चला सकते है. साथ ही साथ यह हिंडोरिया में युवाओं के लिए मार्गदर्शक बने हुये है. बिना जमीन के किस तरीके से खेती की जाती है. इसको उन्होंने मशरूम की खेती नाम दिया है. अतुल धनकर मशरूम का उत्पादन अच्छे से ले रहे हैं. ये आत्मनिर्भर के लिए प्रयासरत है यह बहुत अच्छी बात है. आगे जाकर यह दमोह के बाहर भी मशरूम की मार्केटिंग करेंगे जिससे इनका लाभ और बढ़ेगा.
क्या होता है उपयोग
डॉ राजेश द्विवेदी ने बताया किसान अतुल धनकर मशरूम पाउडर उत्पादित करते हैं. दो चम्मच पाउडर एक गिलास गुनगुने पानी मैं घोलकर रोज सेवन करने से शरीर के भीतरी अंगो की जो टूट-फूट होती है. इसमें हाइट प्रोटीन होता है जो श्रम करने एवं भाग दौड़ करने से जो टूट-फूट होती यह उसको बैकअप करता है. दूसरा इसमें एंटी ऑक्सीडेंट होता है. जिससे दिन भर कार्य करने से थकावट नहीं होती. यह इम्यूनिटी बूस्टर भी है जो हमारी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. इसलिए आधुनिक समय में भागदौड़ वाली जिंदगी में यदि इसको कोई अपनाना चाहे तो इन सब बीमारियों से परे रहेगा, स्वस्थ रहेगा और उसकी रोग से लड़ने की क्षमता भी अच्छी बढ़ जाएगी.
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