JPSC Exam: झारखंड में जेपीएससी की परीक्षा स्थगित, BJP सांसद निशिकांत दुबे बोले- सरकार झुकी
JPSC Exam Postponed: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा रद्द होने के बाद बीजेपी हेमंत सोरने की सरकार पर हमलावर हो गई है. 25 जुलाई से मुख्य परीक्षा होनी थी.

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 25 जुलाई से शुरू होने वाली 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य परीक्षा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है. आयोग ने इस फैसले के पीछे विशेष कारण बताए हैं. हालांकि, यह फैसला ऐसे समय आया है जब 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) के परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच CID कर रही है. परीक्षा स्थगित होने के बाद बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार पर बड़ा हमला बोला है और पूरे मामले की CBI जांच की मांग तेज कर दी है.
बीजेपी के आंदोलन से सरकार झुकी- निशिकांत दुबे
परीक्षा स्थगित होने के बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इसे विपक्ष के आंदोलन की जीत बताया. उन्होंने कहा, "आखिर बीजेपी के आंदोलन से सरकार झुकी. परीक्षा रद्द की गई लेकिन दोषियों को सजा दिलाने के लिए CBI जांच जरूरी है. सफेदपोश को सजा दिलाने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा."
बीजेपी का कहना है कि सिर्फ परीक्षा स्थगित करने से मामला खत्म नहीं होगा. परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के पीछे जो लोग जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच CBI से कराई जानी चाहिए.
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री पर लगाए गंभीर आरोप
झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा, "JPSC परीक्षा में हुए भ्रष्टाचार का असली मास्टरमाइंड और किंगपिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैं."
उन्होंने आगे कहा, "हेमंत सोरेन ने विशाल कुमार जैसे अधिकारी को JPSC का मुख्य परीक्षा नियंत्रक बनाया, जिन पर धनबाद भूमि घोटाले में गंभीर आरोप हैं. उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी के संबंध में भी भ्रष्टाचार की कई गंभीर सूचनाएँ सामने आ रही हैं."
मरांडी ने यह भी कहा, "इतना ही नहीं, कांग्रेस प्रवक्ता रहे जमाल अहमद को JPSC का सदस्य बनाया गया, जबकि 2008 के प्रोफेसर नियुक्ति प्रकरण में उनके खिलाफ CBI जांच चल रही है."
'CID कार्रवाई सिर्फ आंखों में धूल झोंकने की कोशिश'
बाबूलाल मरांडी ने CID की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "अब जब घोटाले की परतें खुलने लगी हैं, तो JPSC अध्यक्ष का इस्तीफा और कार्यालय में CID की कार्रवाई केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास प्रतीत होता है. जिस प्रकार शराब घोटाले में सबूतों को दबाने और बड़ी मछलियों को बचाने के आरोप लगे, उसी तरह यहाँ भी असली दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है."
उन्होंने आगे कहा, "झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए. यह केवल परीक्षा में गड़बड़ी नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों, मेहनत और विश्वास की संगठित लूट है."
CBI जांच की मांग हुई तेज
मरांडी ने पूरे मामले की CBI जांच की मांग दोहराते हुए कहा, "इस पूरे प्रकरण की CBI से निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए, ताकि सत्ता के संरक्षण में चल रहे पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश हो, असली मास्टरमाइंड बेनकाब हों और दोषियों को कठोरतम सजा मिले. झारखंड के युवा जवाब मांग रहे हैं. आखिर उनके भविष्य के साथ यह विश्वासघात किसके इशारे पर हुआ?"
इधर, JPSC पीटी परीक्षा के परिणाम को लेकर कथित अनियमितताओं की जांच CID कर रही है. हाल ही में CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPPL समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी.
जांच एजेंसियों ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं और मामले में कई लोगों से पूछताछ जारी है. ऐसे में मुख्य परीक्षा स्थगित होने के बाद JPSC विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है.























