नशा-विरोधी अभियान में बुलडोजर कार्रवाई का विरोध, मंत्री सकीना इट्टू का LG प्रशासन पर निशाना
Jammu Kashmir Politics: जम्मू-कश्मीर मंत्री सकीना इट्टू ने नशा-विरोधी अभियान में बुलडोजर कार्रवाई का विरोध किया. उन्होंने LG से घर तोड़ने के बजाय पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर देने को कहा.

जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने केंद्र शासित प्रदेश में चल रहे नशा-विरोधी (Anti-Drug Drive) अभियान की आड़ में चुनिंदा संपत्तियों को गिराए जाने की कड़ी आलोचना की है. हालांकि उन्होंने नशा-मुक्ति अभियान का समर्थन किया, लेकिन कश्मीर घाटी में हो रही बुलडोजर कार्रवाई और संपत्तियों को जब्त करने की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए.
मीडिया को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री को रोकना उपराज्यपाल (LG) प्रशासन और गृह विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है. वहीं, चुनी हुई सरकार की जिम्मेदारी पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास तक सीमित है. सकीना इट्टू ने कहा, "LG की कोशिश अच्छी है, लेकिन इस बहाने लोगों को निशाना न बनाएं. हमारा काम अस्पतालों के जरिए नशे की समस्या से जूझ रहे पीड़ितों का इलाज और काउंसलिंग करना है."
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आंकड़ों का हवाला
स्वास्थ्य मंत्रालय के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए सकीना इट्टू ने एक बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा, "एक स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर मैं आपको बताती हूं. जम्मू में नशा करने वालों और नशा बेचने वालों की संख्या ज्यादा है. लेकिन जिस तरह से कश्मीर में घरों को तोड़ा जा रहा है और संपत्तियों को जब्त किया जा रहा है, वह पूरी तरह से गलत है." उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की चयनात्मक कार्रवाई से पूरे अभियान पर उल्टा असर पड़ सकता है.
'बच्चों की गलती की सजा माता-पिता को न दें'
सकीना इट्टू ने कथित नशा बेचने वालों के घरों को गिराए जाने की निंदा की, खासकर तब जब संपत्ति आरोपी के माता-पिता के नाम पर हो. उन्होंने कहा, "अगर कोई बच्चा नशे का आदी है, तो उसका पुनर्वास करें. घरों को बुलडोज न करें, परिवारों को तबाह न करें. इससे लोगों में और ज्यादा नकारात्मकता पैदा होती है. नशे के असली स्रोत तक पहुंचें."
विधानसभा में आएगा पुनर्वास विधेयक
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि उनकी पार्टी (नेशनल कॉन्फ्रेंस) ने विपक्ष में रहते हुए भी इस मुद्दे को उठाया था. मौजूदा सरकार ने नशे की समस्या से निपटने के लिए एक समिति का गठन किया है और स्वास्थ्य विभाग के पास इसकी सिफारिशें मौजूद हैं. जल्द ही नशे के पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए विधानसभा में एक विधेयक भी पेश किया जाएगा.
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