लोकसभा में जम्मू-कश्मीर की अब सिर्फ 5 सीट नहीं! बढ़ी हुई सीटें किसके लिए होंगी आरक्षित?
Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर में लोकसभा सीटें 5 से बढ़कर 8 हो सकती हैं, जिनमें 3 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. यह बदलाव परिसीमन प्रक्रिया के तहत 2029 चुनाव से पहले लागू किया जा सकता है.

- सरकार 2029 से पहले लोकसभा सीटों का विस्तार कर सकती है.
- जम्मू-कश्मीर की 5 सीटें बढ़कर 8 होंगी, 3 महिलाओं के लिए आरक्षित.
- नारी वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक संसद में पेश होगा, सहमति जारी.
- 2027 तक जनगणना, फिर परिसीमन आयोग गठित हो सकता है.
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन के जरिए सीटों का विस्तार करने की तैयारी में है. इस प्रक्रिया में जम्मू-कश्मीर की मौजूदा 5 सीटें बढ़ाकर 8 की जा सकती हैं, जिनमें 3 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. यह बदलाव परिसीमन आयोग के जरिए लागू किया जाएगा.
सीट विस्तार और महिला आरक्षण का प्लान
मिली जानकारी के अनुसार, सरकार लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने की दिशा में काम कर रही है. प्रस्ताव के अनुसार कुल सीटों का एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होगा. इससे जुड़े नारी वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने की तैयारी है और इसके लिए सभी दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश जारी है.
जम्मू-कश्मीर में सीटों का इतिहास और बदलाव
जम्मू-कश्मीर में 1952 के पहले चुनाव में 6 लोकसभा सीटें थीं. 1976 के परिसीमन के बाद 1977 के चुनाव में भी सीटों की संख्या 6 ही रही. तब से अब तक कई बड़े बदलाव हो चुके हैं जिनमें से एक है साल 2019 में अनुच्छेद 370 का हटाया जाना. इसके बाद जम्मू कश्मीर में आम चुनाव के लिए विधानसभा भी स्थापित कर दिया गया.
वर्तमान में लोकसभा में जम्मू-कश्मीर की सीटों की संख्या 5 हो गई है. इन सीटों के नाम हैं, बारामूला (Baramulla), श्रीनगर (Srinagar), अनंतनाग-राजौरी (Anantnag-Rajouri), जम्मू (Jammu) और उद्धमपुर (Udhampur). आपको यह भी बताते चलें कि नए प्रस्ताव के तहत इसे बढ़ाकर 8 करने की संभावना जताई जा रही है. खास बात यह है कि बढ़ी हुई सभी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने का प्रावधान है.
परिसीमन प्रक्रिया और टाइमलाइन
अनुमान है कि जनगणना प्रक्रिया 1 मार्च 2027 तक पूरी होगी, जिसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा. परिसीमन लागू होने में करीब 3 साल लग सकते हैं. हालांकि देरी से बचने के लिए सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाने पर भी विचार कर रही है, ताकि 2029 चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो सके.
डेस्क इनपुट के साथ
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