Jammu Kashmir News: गांदरबल मुठभेड़ पर मीरवाइज उमर फारूक ने उठाए सवाल, LG के आदेश के बाद इंसाफ की जताई उम्मीद
Jammu Kashmir News: मीरवाइज उउमर फारूक ने गांदरबल मुठभेड़ में रशीद मुग़ल की मौत पर गहरी चिंता जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने शव न सौंपने को अमानवीय बताया.

जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में हुई एक कथित मुठभेड़ को लेकर मीरवाइज उमर फारूक ने गहरी चिंता व्यक्त की है. शुक्रवार को श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में नमाज़ के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की. साथ ही, उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा द्वारा मामले में जांच के आदेश दिए जाने का संज्ञान लेते हुए पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद भी जताई.
उमर फारूक ने अरहामा (गांदरबल) में मारे गए युवक राशिद अहमद मुग़ल की मौत को बेहद दुखद बताया. उन्होंने कहा, "परिवार का दावा है कि राशिद एक पार्ट-टाइम कंप्यूटर ऑपरेटर था और उसका आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं था. उसे कथित तौर पर उठाया गया और मार दिया गया." मीरवाइज़ ने कहा कि इस घटना ने पुरानी दर्दनाक मुठभेड़ों की यादें ताजा कर दी हैं.
'शव न देना अमानवीय कृत्य'
प्रशासन के रुख पर सवाल उठाते हुए मीरवाइज़ ने कहा, "परिवार एक निष्पक्ष जांच के जरिए न्याय चाहता है. हालांकि पिछले अनुभवों से ज्यादा भरोसा नहीं जगता, लेकिन उम्मीद है कि एलजी साहब के आदेश के बाद इस बार न्याय होगा और दोषियों को सजा मिलेगी." इसके साथ ही उन्होंने मृतक का शव दफनाने के लिए परिवार को न सौंपे जाने की कड़ी निंदा करते हुए इसे अमानवीय कृत्य करार दिया.
एजेंसियों की कार्रवाई से 'दहशत का माहौल'
उमर फारूक ने कश्मीर में विभिन्न जांच एजेंसियों की लगातार हो रही कार्रवाई पर भी चिंता जाहिर की. उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग हर दिन SIA, CIK, साइबर सेल, ACB और NIA जैसी एजेंसियों द्वारा कश्मीरियों के खिलाफ मुकदमे और गिरफ्तारियों की खबरें आती हैं. उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों से डर और दहशत का माहौल बनता है, जो शांति स्थापना के प्रयासों के लिए सही नहीं है.
धार्मिक पाबंदियों और 'सामान्य हालात' के दावों पर तंज
लंबे समय बाद जामा मस्जिद पहुंचे मीरवाइज़ ने खुद को बार-बार घर में नजरबंद किए जाने और धार्मिक आयोजनों पर रोक का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि जुमात-उल-विदा, शब-ए-क़द्र और ईद-उल-अज़हा जैसे पवित्र मौकों पर भी अधिकारियों ने मस्जिद में नमाज की अनुमति नहीं दी. प्रशासन के 'सामान्य हालात' के दावों पर तंज कसते हुए मीरवाइज़ ने कहा कि प्रतिबंधों, रोक और सेंसरशिप के जरिए लोगों के मौलिक अधिकारों को कुचलकर शांति का ढोल पीटा जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की नीतियों से कश्मीर में कोई टिकाऊ शांति या प्रगति नहीं आ सकती.






















