US-ईरान सीजफायर में पाक ने कैसे हासिल की भूमिका? उमर अब्दुल्ला बोले, 'भारत के बहुत करीबी...'
US Iran War Ceasefire: सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ये युद्ध ईरान पर थोपा गया. ईरान ने इस युद्ध की शुरुआत नहीं की थी. उन्होंने कहा कि अमेरिका को इजरायल पर लगाम कसनी होगी.

जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिका से अपील की कि वह इजरायल पर लगाम कसे ताकि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष-विराम के प्रयासों को बचाया जा सके और उनकी सफलता सुनिश्चित की जा सके. सीएम ने ज़ोर देकर कहा कि यह संघर्ष ईरान ने शुरू नहीं किया था, बल्कि उस पर थोपा गया था. उन्होंने कहा कि अगर यह संघर्ष-विराम टूटता है तो उसके लिए ईरान नहीं बल्कि इजराइल के कदम ज़िम्मेदार होंगे.
श्रीनगर में SKICC में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह युद्ध ईरान पर थोपा गया था. उन्होंने बढ़ते तनाव, विशेष रूप से लेबनान में इजरायल के कदमों पर चिंता जताते हुए, डॉनल्ड ट्रंप की लगातार बदलती और अनुचित बयानबाज़ी की आलोचना की. उन्होंने कहा, "अगर संघर्ष-विराम नाकाम होता है, तो यह ईरान की गलती नहीं होगी बल्कि इसकी पूरी ज़िम्मेदारी इजरायल की होगी. अमेरिका को इजरायल पर लगाम कसनी ही होगी."
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री उमर ने कहा कि वॉशिंगटन से आने वाले बयानों में कोई एकरूपता नहीं है मुख्यमंत्री ने कहा, "वह सुबह कुछ कहते हैं, दोपहर में कुछ और, और शाम को कुछ और. जिस तरह की भाषा वह इस्तेमाल करते हैं, वह किसी को भी शोभा नहीं देती, राष्ट्रपति जैसे पद पर बैठे व्यक्ति की तो बात ही छोड़ दें." उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई आम इंसान सोशल मीडिया पर ऐसा बर्ताव करे, तो उसका अकाउंट ही ब्लॉक कर दिया जाएगा.
सीएम ने यह भी कहा, "लोग अमेरिकी राष्ट्रपति से डरते हैं और शायद यही वजह है कि बार-बार धमकियां मिलने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती." उन्होंने इस युद्ध के मकसद पर भी सवाल उठाए. जब उनसे पूछा गया कि संघर्ष-विराम की बातचीत में पाकिस्तान ने एक अहम कूटनीतिक भूमिका कैसे हासिल कर ली, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इजरायल के साथ भारत के बहुत करीबी रिश्तों की वजह से भारत की कूटनीतिक भूमिका सीमित हो गई है.
उन्होंने कहा, "सबसे पहले तो, इस युद्ध का मकसद ही साफ किया जाना चाहिए था." उन्होंने आगे कहा कि इजरायल के साथ नई दिल्ली के करीबी रिश्तों की वजह से शायद भारत की मध्यस्थता करने की क्षमता सीमित हो गई है. उन्होंने कहा, "इस युद्ध की ज़रूरत सिर्फ़ इजरायल को थी. शायद अगर इजरायल के साथ हमारे रिश्ते इतने करीबी न होते, तो भारत भी पाकिस्तान की तरह कोई भूमिका निभा सकता था."
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Source: IOCL

























