कुलगाम में 8वें दिन भी जारी ऑपरेशन, दहशत में गांव छोड़ना चाहते हैं लोग, सरकार से कर रहे यह अपील
Kulgam News: कुलगाम के आतंकवाद-रोधी अभियान जारी है. लगातार गोलीबारी और धमाकों के बीच स्थानीय लोग अपने गांव छोड़ना चाहते हैं. दहशत के बीच नींद और राशन की भारी कमी से भी लोगों को परेशानी हो रही है.

कुलगाम में चल रहा आतंकवाद-रोधी अभियान शुक्रवार (8 अगस्त) को आठवें दिन में पहुंच गया. घेराबंदी और लगातार सुरक्षा अभियान में फंसे स्थानीय लोगों ने भारी कठिनाइयों का हवाला देते हुए अखल गांव से अपने विस्थापन की मांग शुरू कर दी है. निवासियों का दावा है कि अभियान के दौरान लगातार हो रही गोलीबारी और विस्फोटों के कारण वे सो नहीं पा रहे हैं. अब उनके पास खाने का भी सामान खत्म हो रहा है.
कुलगाम के स्थानीय लोगों मनोवैज्ञानिक समस्याओं से परेशान
मुठभेड़ स्थल के पास रहने वाले एक ग्रामीण मुबारक खांडे ने बताया, "पिछले सात दिनों से हम भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. रात में गोलीबारी और बम विस्फोट होते रहते हैं. हमारे घरों में अब राशन की कमी हो गई है." खांडे ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इलाके की महिलाएं और बच्चे डरे हुए हैं. यह भी दावा किया कि लगातार गोलीबारी और विस्फोटों के कारण मानसिक तौर पर वे बहुत परेशान हो गए हैं.
सरकार से स्थानीयों को यहां से निकालने की अपील करते हुए खांडे ने कहा, "हम सात दिनों से सोए नहीं हैं. बच्चे जाग रहे हैं और रो रहे हैं. दवाइयों और राशन की कमी है." उन्होंने आगे बताया कि इलाके में रहने वाली खानाबदोश आबादी के पास भी अनाज खत्म हो गया है. खांडे ने कहा, "गुज्जर लोगों ने हमें बुलाया था... उनके पास राशन नहीं है."
स्थानीय लोग गांव की देखभाल के लिए नंबरदार और चौकीदार जैसे गांव के अधिकारियों के आभारी हैं. खांडे ने बताया, "नंबरदार अपने घर से लोगों को राशन दे रहा था, लेकिन अब उसे भी राशन की कमी का सामना करना पड़ रहा है." गांव के एक अधिकारी शेख महबूब ने सरकार से राशन की कमी को दूर करने और गाँव में पीने के पानी की व्यवस्था करने का आग्रह किया.
घर छोड़ कर जा चुके हैं कई स्थानीय लोग
महबूब ने कहा, "हम पानी और दवाओं की कमी का सामना कर रहे हैं. हम अनुरोध करते हैं कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग हमारे लिए पानी की व्यवस्था करे. सुरक्षा बल अपना काम कर रहे हैं, लेकिन जारी गोलीबारी बुजुर्गों और बच्चों के लिए समस्याएं पैदा कर रही है." उन्होंने स्थानीय लोगों के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था करने के लिए उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का धन्यवाद किया.
एक अन्य स्थानीय निवासी शीराज़ा अख्तर ने कुलगाम के उपायुक्त से ग्रामीणों की मदद करने की अपील की. अख्तर ने कहा, "हम उपायुक्त से अपील करते हैं. हम गरीब हैं और अभावों का सामना कर रहे हैं. कृपया हमारी मदद करें क्योंकि हम कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं. बहुत से लोग जा चुके हैं और कुछ घर खाली हैं. कृपया हमें यहां से स्थानांतरित कर दें."
स्थानांतरण की मांग पर सरकार का क्या है रुख?
सरकार ने पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के नंबरों की एक सूची जारी की है और स्थानीय लोगों से अनुरोध किया है कि अगर उन्हें रात के समय किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो, तो वे उनसे संपर्क करें. लेकिन, सरकार ने स्थानीय लोगों के स्थानांतरण की मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद 1 अगस्त को अकाल क्षेत्र के जंगलों में आतंकवाद-रोधी अभियान शुरू किया गया था.
अब तक दो आतंकवादी मारे जा चुके हैं, जबकि कई सुरक्षा बल के जवान घायल हुए हैं. सुरक्षा बल जंगल में छिपे आतंकवादियों का पता लगाने के लिए ड्रोन और हेलीकॉप्टर सहित तकनीकी निगरानी उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं. यह इस वर्ष कश्मीर घाटी में अब तक का सबसे लंबा आतंकवाद विरोधी अभियान है.























