गुजरात के ऐतिहासिक पालिताना पैलेस में सिर्फ शाकाहारी स्वाद, जानें IHCL ने क्यों किया ये ऐलान
Gujarat Palitana Palace: IHCL ने गुजरात के पालिताना पैलेस के विकास की पूरी जिम्मेदारी और जैन परंपराओं के सम्मान के साथ करने का निर्णय लिया है. यहां बस शाकाहारी खाना और गैर-मादक पेय ही परोसे जाएंगे.

Gujarat News: गुजरात की पावन धरती पर बसे पालिताना में अब विरासत, आस्था और आतिथ्य का संगम देखने को मिलेगा—जहां इतिहास बोलेगा, परंपराएं जीवित रहेंगी और ताज समूह देगा आस्था को नया आकार. ऐसा इसलिए क्योंकि इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) ने ऐलान किया है कि अब पालिताना पैलेस में सिर्फ शाकाहारी भोजन ही मिलेगा.
IHCL ने शनिवार (12 अप्रैल) को कहा कि किया कि गुजरात स्थित ऐतिहासिक पालिताना पैलेस (Palitana Palace) का जीर्णोद्धार पूरी जिम्मेदारी और स्थानीय आस्थाओं का सम्मान करते हुए किया जाएगा. कंपनी ने यह भी कहा कि इस संपत्ति में केवल शाकाहारी भोजन और गैर-मादक पेय ही परोसे जाएंगे.
जैन समुदाय के लिए उठाया ये कदम- IHCL
यह कदम जैन समुदाय की उस चिंता के मद्देनजर उठाया गया है, जिसमें आशंका जताई गई थी कि इस पवित्र स्थल पर अन्य आतिथ्य कंपनियों की उपस्थिति जैन परंपराओं की पवित्रता को प्रभावित कर सकती है. IHCL ने आश्वासन दिया है कि ताज समूह की ओर से इस परियोजना में पूर्ण रूप से जैन मान्यताओं का पालन किया जाएगा.
IHCL के प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, "एक सदी से अधिक समय से हम जिम्मेदार विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं. पालिताना पैलेस को होटल में तब्दील करने का कार्य स्थानीय समुदाय की आस्थाओं और भावनाओं का सम्मान करते हुए किया जाएगा. यहां शुरू से ही केवल शाकाहारी जैन व्यंजन और गैर-मादक पेय ही उपलब्ध कराए जाएंगे."
गुजरात के भावनगर जिले से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित पालिताना जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है. इसे श्वेतांबर जैन परंपरा में सर्वोच्च धार्मिक स्थानों में गिना जाता है.
पालिताना पैलेस का महत्व
पालिताना पैलेस आज भी इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों की गवाही देती है. इसका निर्माण 1820 के दशक में भावनगर के शासकों द्वारा किया गया था. यह महल कला का बेजोड़ उदाहरण है, जिसमें राजसी गरिमा और स्थानीय शैली का अनूठा मेल देखने को मिलता है. अरब सागर के किनारे बसा ये ऐतिहासिक स्थल लंबे समय तक शाही परिवार का निवास रहा है और आज भी इसकी दीवारों में बीते युगों की कहानियां गूंजती हैं.
IHCL की यह पहल न केवल धार्मिक आस्थाओं के संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यटन और विरासत के संतुलित विकास का भी उदाहरण बन सकती है.
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Source: IOCL






















