गुजरात: आपकी सेहत से खिलवाड़! मेहसाणा में पकड़ी गई 'डेथ फैक्ट्री', डिटर्जेंट-यूरिया से बना रहे थे दूध
Gujarat News: गुजरात के मेहसाणा जिले के साबरकांठा के हिम्मतनगर में डिटर्जेंट पाउडर, यूरिया खाद और औद्योगिक रसायनों को मिलाकर नकली दूध, मक्खन और छाछ तैयार की जा रही थी.

Gujarat News: गुजरात के मेहसाणा जिले के साबरकांठा अंतर्गत हिम्मतनगर से नकली दूध के बड़े कारोबार का सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां डिटर्जेंट पाउडर, यूरिया खाद और औद्योगिक रसायनों को मिलाकर नकली दूध, मक्खन और छाछ तैयार की जा रही थी. दावा किया जा रहा है कि यह अवैध कारोबार पिछले पांच सालों से फल-फूल रहा था और स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी यह उत्पाद सप्लाई किए जा रहे थे.
पिछले शुक्रवार को साबरकांठा की स्थानीय अपराध शाखा (LCB) ने ‘श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स’ नामक कारखाने पर छापा मारा. इस कार्रवाई में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे. जैसे ही टीम ने फैक्ट्री के अंदर प्रवेश किया, वहां का नजारा देखकर सभी दंग रह गए. बड़े एल्यूमीनियम के बर्तनों में सफेद तरल पदार्थ भरा हुआ था और चारों ओर डिटर्जेंट के पैकेट, खाद के बोरे और विभिन्न रसायन बिखरे पड़े थे.
🚨 Gujarat | Major Action 🥛❌
— Medlarge (@medlarge) February 9, 2026
A major joint raid in Himatnagar, Gujarat, has exposed a dairy unit producing fake milk using urea and palm oil, officials said. The operation was carried out by the Gujarat Food Safety Department.
🔒 The dairy unit has been shut down immediately
🔍… pic.twitter.com/DQHK6Tu3Wr
300 लीटर असली दूध से बनता था 1800 लीटर नकली दूध
जांचकर्ताओं के मुताबिक, नकली दूध बनाने के लिए बहुत कम मात्रा में असली दूध का उपयोग किया जाता था. लगभग 300 लीटर असली दूध में रसायन और अन्य पदार्थ मिलाकर प्रतिदिन 1700 से 1800 लीटर नकली दूध तैयार किया जाता था. दूध को गाढ़ा करने और झागदार बनाने के लिए कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट पाउडर और यूरिया का इस्तेमाल किया जाता था.
जांच में सामने आया कि फैक्ट्री में 450 किलो प्रोटीन पाउडर, 650 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर, 300 किलो प्रीमियम SMP पाउडर, यूरिया खाद, कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट पाउडर, सोयाबीन तेल और पाम ऑयल मिलाकर नकली दूध तैयार किया जा रहा था. मौके से 1962 लीटर नकली दूध और 1180 लीटर नकली छाछ जब्त की गई, जिसे पैक कर बाजार में भेजने की तैयारी थी.
1370 लीटर जहरीला दूध मौके पर किया गया नष्ट
FSSAI ने फैक्ट्री को तुरंत बंद करा दिया है. घटनास्थल से बरामद 1370 लीटर खतरनाक दूध को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया. इस मामले में फैक्ट्री के ऑपरेटर जितेंद्र पटेल, सचिन मकवाना, कर्ण परमार और अजयसिंह परमार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक नाबालिग कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है.
फैक्ट्री का मालिक राकेश उर्फ धामो पटेल, जो मूल रूप से सालाला का निवासी है और वर्तमान में हिम्मतनगर में रह रहा था, फिलहाल फरार है. पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और खाद्य सुरक्षा कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
सोशल मीडिया पर मचा हंगामा
यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर भारी हंगामा मच गया. लोगों में डर और गुस्सा दोनों देखने को मिल रहा है. खास बात यह है कि हाल ही में देश की बड़ी डेयरी कंपनियों के दूध को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं. शिकायतकर्ता का दावा है कि अमूल, मदर डेयरी और कंट्री डिलाइट जैसे ब्रांड्स के दूध में भी हानिकारक तत्व पाए गए हैं.
प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के मुताबिक, अमूल ताजा और अमूल गोल्ड में कोलीफॉर्म का स्तर निर्धारित सीमा से काफी ज्यादा पाया गया. मदर डेयरी काउ मिल्क में टोटल प्लेट काउंट (TPC) सुरक्षित सीमा से ऊपर था, जबकि कंट्री डिलाइट काउ मिल्क में यह स्तर लगभग दोगुना दर्ज किया गया. केवल अमूल टेट्रा पैक ही जांच में सुरक्षित पाया गया.
उबालने पर भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता दूध
शिकायतकर्ता का कहना है कि दूध को कितनी भी देर उबाल लिया जाए, हानिकारक तत्व पूरी तरह समाप्त नहीं होते. ऐसे दूषित दूध का सेवन बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. फिलहाल प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग इस पूरे मामले की गहन जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नकली दूध के नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं.
Source: IOCL


























