Waqf Bill: वक्फ बिल पास होने पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान, 'बोर्ड के लोग अब अपना...'
Jharkhand News: झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के मुताबिक कांग्रेस और झामुमो को तकलीफ इस बात की है कि अब वे वक्फ बोर्ड की आड़ में यहां के आदिवासियों की जमीन नहीं लूट पाएंगे.

Jharkhand Latest News: झारखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने संसद के दोनों सदनों से वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद शुक्रवार (4 अप्रैल) को बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन अधिनियम (Waqf amendment Bill) पास होने से साफ हो गया है कि झारखंड समेत पूरे देश में आदिवासी भाइयों-बहनों की जमीन पर बोर्ड के लोग अब अपना दावा पेश नहीं कर सकते.
उन्होंने आगे कहा, "यही वजह है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और प्रदेश कांग्रेस का पूरा कुनबा वक्फ संशोधन बिल पारित होने के बाद से विलाप कर रहा है."
वक्फ़ संशोधन अधिनियम के बाद पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि झारखंड समेत पूरे देश में आदिवासी भाइयों बहनों की जमीन पर वक्फ़ बोर्ड अपना दावा प्रस्तुत नहीं कर सकता। इसी सदमे में झामुमो और झारखंड कांग्रेस का पूरा कुनबा वक्फ़ संशोधन बिल पारित होने के बाद से विलाप कर रहा है।
— Babulal Marandi (@yourBabulal) April 4, 2025
देश को,…
2013 में कांग्रेस ने लिया था गलत फैसला
झारखंड के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने कहा, "देश को विशेषकर हमारे आदिवासी भाइयों को जानना चाहिए कि कांग्रेस ने 2013 में रातों-रात वक्फ अधिनियम में संशोधन किया. साल 2014 लोकसभा चुनाव से ऐन पहले दिल्ली में रेलवे की संपत्ति वक्फ बोर्ड के नाम कर दी. हिमाचल में अवैध मस्जिद बनाई गई. तमिलनाडु में 1500 साल पुरानी मंदिर और बैंगलोर में पांच सितारा होटल को भी वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया."
आदिवासियों की जमीन नहीं लूट पाएंगे नेता- बाबूलाल मरांडी
झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के मुताबिक, "कांग्रेस ने लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के वक्फ की संपत्ति निजी संस्थानों को ट्रांसफर कर दिया. कांग्रेस और झामुमो को तकलीफ इस बात की नहीं कि नए बदलावों के तहत वक्फ बोर्ड की शक्तियां कम कर दी गई है बल्कि तकलीफ इस बात की है कि अब वे वक्फ की आड़ में आदिवासियों की जमीन नहीं लूट पाएंगे."
बता दें कि वक्फ संशोधन बिल को संसद के दोनों सदन यानी लोकसभा और राज्यसभा ने क्रमश: 2 और तीन अप्रैल को अपनी मंजूर दे दी. अब यह बिल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलते ही प्रभाव में आ जाएगा. हालांकि, इस बिल के खिलाफ पहली याचिका 4 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में दायरहो गई है.
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