ECI मुख्यालय के बाहर NSUI का कठपुतली प्रदर्शन, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल, कई हिरासत में
Delhi NSUI Protest: विनोद जाखड़ ने कहा कि कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने जैसी घटनाओं ने विपक्षी दलों और लोकतांत्रिक संगठनों के बीच चिंता बढ़ाई है.

निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में जुटे संगठन के कार्यकर्ताओं ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) मुख्यालय की ओर मार्च निकाला और प्रतीकात्मक कठपुतली प्रदर्शन के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की. प्रदर्शन के दौरान आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए गए.
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का आरोप था कि हाल के कुछ निर्णयों और घटनाक्रमों ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है. प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की. संगठन का कहना था कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है और उस पर किसी भी तरह का संदेह चिंताजनक है.
मार्च रोकने पहुंची पुलिस, कइयों को लिया हिरासत में
ECI मुख्यालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रास्ते में ही पुलिस ने रोक दिया. इस दौरान कई कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में लिया गया. पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे और अपने विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखा. मौके पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली.
संवैधानिक संस्थाएं दबाव से मुक्त होकर करें काम: जाखड़
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसे संस्थानों की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा बना रहना बेहद जरूरी है. उनके अनुसार किसी भी संवैधानिक संस्था को राजनीतिक प्रभाव या दबाव से दूर रहकर स्वतंत्र रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से दिया जाना चाहिए.
जाखड़ ने कहा कि कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने जैसी घटनाओं ने विपक्षी दलों और लोकतांत्रिक संगठनों के बीच चिंता बढ़ाई है. उन्होंने दावा किया कि इसी पृष्ठभूमि में कठपुतली प्रदर्शन आयोजित कर यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता.
लोकतांत्रिक आवाज दबाने का आरोप
NSUI ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए. संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है और इसे रोकने के प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं. संगठन ने कहा कि हिरासत में लेने जैसी कार्रवाइयों से उठ रहे सवाल खत्म नहीं होंगे.
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