दिल्ली के करोलबाग में भरोसेमंद मैनेजर करोड़ों का सोना लेकर फरार, पुलिस ने ऊटी से किया गिरफ्तार
Delhi News: करोल बाग थाने और स्पेशल स्टाफ पुलिस की संयुक्त टीम ने 17 दिनों के अथक प्रयास और चार राज्यों की खाक छानने के बाद, आखिरकार आरोपी को तमिलनाडु के ऊटी में एक होटल से गिरफ्तार कर लिया.

दिल्ली के करोल बाग के एक प्रतिष्ठित ज्वेलरी शोरूम में 12 वर्षों से काम कर रहा एक भरोसेमंद मैनेजर अचानक रहस्यमय तरीके से लापता हो गया. जब शोरूम का स्टॉक मिलान हुआ, तो सामने आया कि करीब 4 किलो सोना ग़ायब है और साथ ही ग़ायब है वो कर्मचारी, जिसका नाम था मनोज दोसांद.
करोल बाग थाने और स्पेशल स्टाफ पुलिस की संयुक्त टीम ने 17 दिनों के अथक प्रयास और चार राज्यों की खाक छानने के बाद, आखिरकार आरोपी को तमिलनाडु के ऊटी में एक होटल से गिरफ्तार कर लिया.
ऑडिट में खुली चोरी की पोल
डीसीपी सेंट्रल निधिन वालसान के मुताबिक, 1 जुलाई को करोल बाग थाने में एक प्रतिष्ठित ज्वेलरी शोरूम मालिक द्वारा सोना चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई. शिकायत में बताया गया कि स्टॉक ऑडिट में 3980 ग्राम सोना ग़ायब था और संदेह की सुई सीधे मनोज पर गई.
क्योंकि मनोज ने 26 जून से अचानक काम पर आना बंद कर दिया था और 29 जून को उसकी पत्नी ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. शुरुआती छानबीन के बाद 3 जुलाई को इस मामले एफआईआर दर्ज की गई.
कई राज्यों में चला हाई-टेक पीछा
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी की निगरानी में इंस्पेक्टर रोहित कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया था, जिसमें एसआई दीपक, विजय, हेड कॉन्स्टेबल अमित, मनीष, मुनेश शर्मा, कॉन्स्टेबल सूरजपाल, मनीष शामिल थे.
जांच में जुटी टीम ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में 3200 किलोमीटर लंबे पीछा अभियान को अंजाम दिया. सैकड़ों CCTV कैमरे खंगाले, स्थानीय संपर्क साधे और तकनीकी निगरानी के जरिए हर कड़ी को जोड़ते हुए मनोज तक पहुंच बनाई.
आगरा के सीसीटीवी से मिला आरोपी का सुराग
पुलिस को पहला सुराग आगरा से मिला, जहां से मनोज ने एक पुराना मोबाइल खरीदा और बाइक छोड़कर ट्रेन से बेंगलुरु रवाना हो गया. जहां उतरने के बाद उसने फिर एक पुराना मोबाइल खरीद और चेन्नई होते हुए ऊटी पहुंचा. जहां वह होटल में ठहरा हुआ था. पुलिस ने 20 जुलाई को घेराबंदी कर छापेमारी कर उसे होटल से दबोच लिया. उसके पास से 100 ग्राम सोना, 2.3 लाख रुपये नकद औऱ दो मोबाइल फोन बरामद किए गए.
सट्टेबाजी की लत ने बना दिया चोर
पूछताछ में मनोज ने कबूला कि वो ऑनलाइन सट्टेबाज़ी और जुए का आदी हो चुका था. 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान सट्टेबाज़ी शुरू हुई, जो 2020 के लॉकडाउन में Dream-11 और Fairplay जैसे प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए गहराती गई. पैसे की भूख ने उसे ऐसा अंधा बना दिया कि उसने शोरूम के कम ऑडिट वाले एंटीक डिज़ाइन के गहने चुपचाप निकालने शुरू कर दिए और लोकल सुनारों को बेच कर उसके बदले पैसे हासिल किये.
भागने से पहले बनाया सुनियोजित प्लान
मनोज ने खुलासा किया कि 26 जून को जुए में 20 लाख रुपये जीते, लेकिन उसे डर था कि उसकी चोरी का राज खुलने वाला है. इसलिए उसने 5 लाख रुपये और लॉकर से 35 ग्राम सोना निकाला. उसने सट्टेबाज से 25 लाख रुपये कर्ज लेकर 27 लाख रुपये का 280 ग्राम सोना खरीदा.
जिसमें से उसने 215 ग्राम सोना छुपा दिया और 100 ग्राम सोना एवं 3 लाख नकद के साथ फ़रार हो गया था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार शहर और होटल बदल रहा था.
पुलिस अब बाकी सोने की बरामदगी के साथ इस मामले में लिप्त रहे अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है. पुलिस को इस मामले में करोल बाग के स्थानीय ‘गोल्ड मेल्टिंग नेटवर्क’ पर भी संदेह है जिसकी जांच पुलिस कर रही है.
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Source: IOCL






















