'हमारे किसानों से कपास खरीदने वाला कोई नहीं होगा', 11 परसेंट आयात शुल्क हटाए जाने पर बोले अरविंद केजरीवाल
Arvind Kejriwal News: अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार द्वारा कपास को लेकर लिए गए फैसले को गलत बताया है. उनका कहना है कि इंपोर्ट ड्यूटी कम करने से भारत के किसानों को बड़ा नुकसान होगा.

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस कर मोदी सरकार को घेरा है. उन्होंने कपास पर आयात शुल्क कम करने के फैसले को किसान पर बड़ा बोझ बताया है और कहा है कि इससे किसानों के पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.
अरविंद केजरीवाल का कहना है, "हमारे देश के किसानों की कपास बिक जाती थी, लेकिन अमेरिका की कपास नहीं बिकती थी. मोदी सरकार ने 19 अगस्त से 11 परसेंट ड्यूटी हटा दी है. अमेरिका की कपास भारत के किसानों से 15-20 रुपये प्रति किलो सस्ती हो जाएगी. जब हमारे किसान अक्टूबर नवंबर में कपास लेकर जाएंगे तो उन्हें पता चलेगा कि उनके कपास खरीदने वाला कोई नहीं है."
टेक्सटाइल कंपनियों ने पहले ही अमेरिका से सस्ती कपास मंगवा ली है, क्योंकि सरकार ने आयात पर 11% ड्यूटी हटाकर इसे 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है।
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) September 7, 2025
अब हमारे देश का किसान कहाँ जाए?
मंडी में उसकी कपास नहीं बिकेगी… और कर्ज़ तले दबा किसान आत्महत्या की कगार पर है। pic.twitter.com/JF9ysn2Uv7
'आत्महत्या के अलावा और कोई चारा नहीं'
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा, "अमेरिका की कपास हमारे देश के किसानों की कपास से सस्ती हो जाएगी. टेक्सटाइल कंपनियों ने अमेरिका का कपास ऑर्डर कर दिया है. किसानों के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा." अरविंद केजरीवाल ने कहा, "लोग सवाल पूछ रहे हैं कि मोदी जी ने किसानों को बर्बाद करने वाला ये फैसला क्यों लिया? सच जो भी हो, लेकिन नुकसान सिर्फ हिंदुस्तान के किसानों का हो रहा है."
आप के राष्ट्रीय संयोजक ने आगे कहा, "जितनी टेक्सटाइल कंपनियां हैं, उन्होंने बहुत बड़े स्तर पर अमेरिका से कपास मंगानी शुरू कर दी है. केंद्र सरकार ने यह ड्यूटी पहले 40 दिन के लिए हटाई थी, लेकिन अब इसे एक्सटेंड कर दिया गया है. अब हमारे किसानों की कपास बिकने का कोई चारा नहीं बचा है."
'यूएस मालामाल, पंजाब के किसान कंगाल'
उन्होंने आगे कहा, "हमारे देश का किसान कर्जा लेकर बीज और खाद खरीद चुका है. मजदूरी के पैसे दे चुका है. अब वह कहां जाएगा? कर्जा कैसे चुकाएगा? 2013 में गुजरात में लगभग 1500-1700 रुपये प्रति 20 किलो के हिसाब से किसानों को दाम मिलते थे. उस वक्त 2014 चुनाव के पहले मोदी ने कहा था कि यह बहुत कम है, इसे 2500 होना चाहिए. अब 1500 से भी नहीं मिलते. उससे भी 300 रुपये कम... 1200 रुपये मिलने लगे हैं जबकि सब चीजों के दाम बढ़ चुके हैं."
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि एक बार अमेरिका की कपास आ गई तो भारत के किसानों को 900 रुपये से भी कम मिलने लगेंगे. एक तरह से अमेरिका के किसानों को मालामाल किया जा रहा है और पंजाब के किसानों को कंगाल किया जा रहा है.
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Source: IOCL























