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Delhi AIIMS News: दिल्ली एम्स जाने वाले मरीजों को अब नहीं होगी परेशानी, शटल सेवा के लिए जल्द आएंगे 200 इलेक्ट्रिक वाहन

Delhi: परिसर को इको फ्रेंडली बनाने और प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य के साथ परिसर में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, इसलिए शटल सेवा के लिए एम्स 200 इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदेगी.

Delhi News: राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) देश का बड़ा और प्रतिष्ठित अस्पताल है, जहां इलाज के लिए देश के कोने-कोने से मरीज पहुंचते हैं. अस्पताल के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग मेडिकल ब्लॉक स्थित हैं, जिस कारण मरीजों को एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक के जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. हालांकि, एम्स प्रशासन ने मरीजों की सुविधा के लिए परिसर के अंदर शटल सेवा मुहैय्या करवा रखी है, जिससे मरीज और उनके परिजन एम्स के विभिन्न ब्लॉक में निःशुल्क आवागमन कर सकते हैं. लेकिन मरीजों और अस्पताल कर्मियों की संख्या में यह कम है. जिसे देखते हुए एम्स प्रशासन शटल सेवा के वाहनों की संख्या बढ़ाने जा रहा है.

200 इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की तैयारी

एम्स प्रशासन मरीजों की सुविधा के साथ परिसर को इको फ्रेंडली बनाने और प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य के साथ परिसर में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, इसलिए शटल सेवा के लिए एम्स 200 इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने की तैयारी में है. वर्तमान में डीजल-पेट्रोल वाले वाहनों के साथ 50 इलेक्ट्रिक वाहन एम्स शटल सेवा में कार्यरत हैं. अगले 6 महीने में उन इलेक्ट्रिक वाहनों में एम्स में आ जाने की संभावना है. कुछ महीने पहले एम्स ने 100 इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद की बात कही थी, जिसकी संख्या को बढ़ा कर अब 200 कर दिया गया है.

NGT के निर्देश के बाद फैसला

बता दें कि, एम्स के आसपास प्रदूषण के मामले पर एनजीटी द्वारा आदेश जारी किए जाने के बाद विभिन्न सिविक एजेंसियों और विभागों के साथ हुई बैठक के बाद एम्स प्रशासन ने यह निर्णय लिया है. उन इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल एम्स के मुख्य परिसर से मस्जिद मोठ स्थित विभिन्न ब्लाक के बीच मरीजों और कर्मचारियों के आवागमन के लिए किया जाएगा.

ऑटो का भी हो रहा है इस्तेमाल

गौरतलब है कि, एम्स के मुख्य परिसर और मस्जिद मोठ के बीच करीब एक किलोमीटर की दूरी है. मस्जिद मोठ के पास एम्स के चार सेंटर हैं, जिनमें ओपीडी ब्लॉक, सर्जिकल ब्लॉक, मातृ एवं शिशु ब्लॉक और जेरियाट्रिक ब्लॉक शामिल हैं. जबकि एम्स से ट्रॉमा सेंटर की दूरी भी तकरीब दो किलोमीटर है. विभिन्न ब्लॉक के बीच की दूरियों को देखते हुए एम्स परिसर से मस्जिद मोठ के बीच इलेक्ट्रिक शटल सेवा का संचालन होता है. हालांकि, मरीजों का दबाव अधिक होने के कारण मौजूदा शटल सेवा कम पड़ रही है, इसलिए इसके लिए आटो का भी इस्तेमाल किया जाता है.

बढ़ते प्रदूषण के कारण फैसला

लेकिन हाल ही में एनजीटी ने एम्स के आसपास वाहनों के दबाव और प्रदूषण की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए प्रदूषण कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद एम्स प्रशासन ने PWD, NDMC, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और दिल्ली पुलिस समेत विभिन्न विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की. जिसमें एम्स के पास यातायात सुचारू करने के लिए अवैध रूप से खड़े होने वाले आटो, एंबुलेंस और अतिक्रमण को हटा कर हरित क्षेत्र बढ़ाने, साफ सफाई को बेहतर करने, कूड़ा प्रबंधन, आदि मुद्दों पर चर्चा कर उनके लिये एक्शन प्लान बनाया और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय की गयी. इसी कड़ी में एम्स प्रशासन ने आने वाले समय मे एम्स परिसर में शटल सेवा के रूप में इस्तेमाल होने वाले डीजल-पेट्रोल वाहनों को हटा कर सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाने की तैयारी में है. इसके लिए फिलहाल 200 इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है. जिसके अगले 6 महीने में एम्स में आ जाने की बात कही जा रही है.

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