Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों को लू से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी, जानिए तीन स्तर पर कैसे होगा बचाव
Chhattisgarh News: टीचर बच्चों को पूछते हुए नजर आएंगे कि पिछले 8 से 10 घंटे में उल्टी-दस्त, बुखार, शरीर में दर्द जैसी परेशानी तो नहीं हुई. अगर हां बोलते हैं तो डॉक्टरों के पास भेजा जाएगा.

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में पिछले 10 वर्ष में दूसरी बार मार्च महीने में ही भीषण गर्मी पड़ रही है. इसके चलते राज्य के 55 लाख से अधिक स्कूली बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है. इस एडवाइजरी में तीन स्तर पर बच्चों को भीषण गर्मी से बचाया जाएगा. जिसमे प्रशासन स्तर पर, स्कूल और पारिवारिक स्तर पर सावधानी बरतने की गाइडलाइन है.
तेज गर्मी के चलते स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यालयों को टीन शेड, पेड़ और एस्बेस्टम शीट के नीचे नहीं लगाने का सख्त निर्देश दिया है. एडवाइजरी के अनुसार स्कूल आते टीचर बच्चों को पूछते हुए नजर आएंगे कि पिछले 8 से 10 घंटे में उल्टी-दस्त, बुखार, शरीर में दर्द जैसी परेशानी तो नहीं हुई. अगर बच्चे हां बोलते हैं तो तत्काल परिजनों को सूचना देकर डॉक्टरों के पास भेजा जाएगा.
शासन स्तर पर एडवाइजरी
जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि वे शासन स्तर पर गर्म हवाओं, लू लगने के लक्षण और प्राथमिक उपचार के लिए सभी शिक्षकों, विकासखण्ड स्तर पर कार्य करने वाले अधिकारियों को जागरूक करें कि किन लक्षणों के होने पर प्रभावित छात्रों को तत्काल विशेष चिकित्सकीय सहायता की आवश्कता होगी. वहीं यह कहा गया है कि गर्म हवाओं, लू के चलने के दौरान स्थितियों की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार स्कूलों के संचालन के समय में बदलाव किया जाए. लू लगने पर क्या करें क्या नहीं करें की जानकारियों का प्रचार प्रसार किया जाए. सभी स्कूलों में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस पाउडर जो हीट स्ट्रोक में प्रयोग की जाती है उपलब्ध रहे. जरूरत पड़ने पर चिकत्सा सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग से संपर्क बनाए रखे.
शाला स्तर पर एडवाइजरी
शाला स्तर पर सभी शालाओं में पीने के पानी के स्रोत की सही तरीके से जांच कर ली जाए और यदि आवश्यकता हो तो उसे मरम्मत करा लिया जाए जिससे शुद्ध पेयजल की आपूर्ति में बाधा न पड़े. बच्चों को पेयजल आसानी से उपलब्ध हो इसकी व्यवस्था की जाए. सभी शालाओं पर सुनिश्चित किया जाए कि ओ.आर.एस. पाउडर और उसके विकल्प के रूप में नमक और चीनी की उपलब्धता पर्याप्त मात्र में रहे.
परिवार स्तर पर एडवाइजरी
परिवार स्तर पर यदि अतिआवश्यक न हो तो दोपहर में बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें. बच्चों को सूती, हल्का या हल्के रंग का कपड़ा पहनाएं. थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीने को देते रहे. संभव हो सके तो पानी में ग्लूकोस मिलाकर दें. हल्का और थोड़ा भोजन दें. भोजन को कई बार खिलाएं. ताजा पका हुआ भोजन ही करें और बासी भोजन बिलकुल न करें. तेज धूप में बच्चों को खेलने के लिए बाहर न जाने दें. बच्चों को जानकारी दी जाए कि वे घर से स्कूल तक सिर पर टोपी, गमछा या छाता जो भी आसानी से मिल सके उसे लेकर आएं.
लू लगने पर क्या करें क्या न करें
स्कूल शिक्षा विभाग की एडवाइजरी में बताया गया है कि लू लगने पर प्रभावित छात्र को छांव में लिटा दें. अगर टाइट कपड़े हो तो उन्हें ढीला कर दें या हटा दें. ठंडे गीले कपड़े से शरीर पोछें या ठंडे पानी से नहलाएं. छात्र को लू लगने पर आम का पना का घोल और नारियल का पानी पीने को दें. ओआरएस, नीबू, पानी, नमक-चीनी का घोल पीने को दें, जो शरीर में जल की मात्रा को बढ़ा सके. यदि व्यक्ति पानी की उल्टियां करे या बेहोश हो, तो उसे कुछ भी खाने और पीने को न दें. लू लगे व्यक्ति की हालत में एक घंटे तक सुधार न हो तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र ले जाएं.




















