कुलगाम हमला: छत्तीसगढ़ के 2 मजदूरों की मौत, मचा हड़कंप
Kulgam Terror Attack: कुलगाम हमले में मारे गए छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों के परिजनों से स्थानीय प्रशासन ने संपर्क किया है. हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है.

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में बीते शुक्रवार (31 जुलाई) को हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की मौत हो गई. मृतकों की पहचान दीपक रात्रे (24) और भूपेंद्र (28) के तौर पर हुई है. दीपक रात्रे छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले के बुंदेली गांव के रहने वाले थे. इस घटना के बाद उनके परिवार और ग्रामीणों में शोक की लहर है. वह काम की तलाश में एक साल पहले जम्मू-कश्मीर गए थे.
स्थानीय प्रशासन ने उनके परिवार से संपर्क किया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. मल्खरौदा के SDM रूपेंद्र पटेल ने कहा, "हमने उनके परिवार से बात की है और सरकारी मदद की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं. हम उनके संपर्क में हैं."
#WATCH | Sakti, Chhattisgarh: SDM Malkharoda, Rupendra Patel says, "... We have spoken to the family and are discussing possible government assistance. We remain in contact with them. Further discussions are ongoing." https://t.co/xBGnzsUosv pic.twitter.com/Mb7CZOJcpR
— ANI (@ANI) August 1, 2026
ईंट-भट्ठे पर मजदूरी का काम करते थे दीपक रात्रे और भूपेंद्र
छत्तीसगढ़ के निवासी दीपक रात्रे और भूपेंद्र कुलगाम जिले के केलम गांव में एक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी का काम करते थे. अधिकारियों ने बताया कि बोपिंदर को शुक्रवार (31 जुलाई) की देर शाम गंभीर हालत में अनंतनाग शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से श्रीनगर शहर के सौरा स्थित एसकेआईएमएस (SKIMS) में शिफ्ट किया गया था. आज (01 अगस्त) सुबह उनकी मौत हो गई.
आतंकवादियों ने ईंट-भट्ठे पर दोनों मजदूरों को मारी गोली
शुक्रवार शाम आतंकवादियों ने केलम गांव में दोनों ईंट-भट्ठा मजदूरों को बहुत करीब से गोली मारकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था. दोनों घायल मजदूरों को अनंतनाग शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था, जहां घायलों में से दीपक गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई, जबकि डॉक्टरों ने भूपेंद्र को बेहतर इलाज के लिए एसकेआईएमएस रेफर कर दिया था.
परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था दीपक रात्रे
मृतक दीपक रात्रे के चाचा हलधर रात्रे ने बताया कि वह अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था. उन्होंने बताया, "दीपक की शादी कुछ साल पहले हुई थी और उसके परिवार में उसकी पत्नी और चार महीने का बेटा है. वह बेहतर भविष्य की उम्मीद में सात-आठ महीने पहले अपनी पत्नी के साथ जम्मू-कश्मीर गया था ताकि ईंट भट्ठे पर काम कर सके." बताया जा रहा है कि दीपक के पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी. उसका छोटा भाई दिव्यांग है, उसकी मां और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है.
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