बस्तर में स्कूल जतन योजना का बुरा हाल, जर्जर हालत में 400 से ज्यादा स्कूल भवन
Bastar News: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के बावजूद बस्तर में 400 से अधिक स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं. बारिश के मौसम में इनके ध्वस्त होने की संभावना है.

Chief Minister School Jatan Yojana: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस कार्यकाल के दौरान जर्जर हो चुके सरकारी स्कूलों की मरम्मत के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना बस्तर में कारगर साबित होती दिखाई नहीं दे रही है. इस योजना के तहत करोड़ों रुपए बजट तो जारी किए गए और सरकारी स्कूलों और जर्जर भवनों के जीर्णोद्धार करने के दावे तो किए गए, लेकिन आलम यह है कि जिले के 400 से ज्यादा स्कूल भवन आज भी जर्जर स्थिति में है और अब तक इन स्कूलों के मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका है.
बच्चे इन्हीं जर्जर स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हो रहे हैं, वहीं 16 जून के बाद बारिश का मौसम आने वाला है ऐसे में इस जर्जर स्कूल भवनों की धराशाई होने की भी पूरी संभावना बनी हुई है, वहीं अब शिक्षा विभाग बचे डेढ़ महीने में 400 जर्जर स्कूलों का जीर्णोद्धार कर लेने का दावा कर रहा है, मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत 1076 स्कूल में केवल 500 स्कूल की मरम्मत की जा सकी है, और बाकि स्कूलों की स्थिति जस के तस बनी हुई है , 17 जून से नया शिक्षा सत्र शुरू होने वाला है ऐसे में जिले के कई स्कूलों में स्थिति इतनी खराब है कि बच्चे इन जर्जर स्कूलों में बैठकर पढ़ाई ही नहीं कर सकते.
400 से ज्यादा स्कूलों की हालत सबसे ज्यादा खराब
तेज धूप और गर्मी के मौसम को देखते हुए 22 अप्रैल से ही सभी स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है, वहीं 30 अप्रैल से इन स्कूलों के शिक्षकों को भी छुट्टी जारी कर दिया गया है, उम्मीद जताई जा रही थी कि नये शिक्षा सत्र से सभी जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कर ली जाएगी और बच्चे अच्छे स्कूल भवन में बैठकर शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे, लेकिन शिक्षा विभाग के यह दावे खोखले साबित हो रहे हैं.
दरअसल बस्तर जिले के करीब 400 स्कूलों को मरम्मत की जरूरत है ,शिक्षा विभाग ने छुट्टियों के शुरू होने के साथ ही इन स्कूलो के मरम्मत का कार्य शुरू करने का दावा किया था लेकिन इस पर अभी तक काम शुरू नहीं किया जा सका है, जगदलपुर शहर के साथ-साथ जिले के ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में ऐसे कई प्राथमिक शाला, माध्यमिक और हाई स्कूल है जहां स्कूल की भवने काफी बुरी स्थिति में है, डेढ़ महीने बाद बारिश का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में जिन स्कूल भवनों के छत में दरारें हैं उन स्कूलों के धराशायी होने की पूरी संभावना बनी हुई है.
बुलवाना पड़ रहा है दूसरे विभागों से इंजीनियर को
इधर शिक्षा विभाग में स्कूलों की मरम्मत और निर्माण के लिए निर्माण शाखा है लेकिन यहां तकनीकी काम के लिए पद ही मंजूर नहीं है ,निर्माण शाखा में जहां इंजीनियर की जरूरत है जो स्कूलों के मेंटेनेंस सहित अन्य निर्माण का मूल्यांकन कर सके, दूसरे विभागों से इंजीनियर को बुलवाना पड़ रहा है, उनके कई बार अपने काम में व्यस्त होने के चलते शिक्षा विभाग का काम अटक जाता है.
वहीं बस्तर जिले में करीब 352 स्कूलों की हालत बेहद खराब है, ऐसे में इन भवनो को तत्काल मरम्मत की जरूरत है, बच्चों को इन जर्जर भवनों में बैठकर नए सत्र में पढ़ाई करनी होगी ,वर्तमान में डेढ़ महीने के अंदर ही मरम्मत पूरी करनी है, लेकिन इसके लिए शिक्षा विभाग गंभीर होता दिखाई नहीं दे रहा है....
दम तोड़ती नजर आ रही मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना
जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान ने बताया कि जिले के मरम्मत योग्य स्कूलों के लिए जल्द ही योजना बनाकर काम शुरू किया जाएगा, गर्मी की छुट्टियों में मरम्मत का काम पूरा हो सके इसकी कोशिश की जा रही है, हालांकि मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत जारी की गई बजट की राशि और इस बजट से कितने स्कूलों का जीर्णोद्धार हुआ है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है, वही एक बार फिर से यह सरकारी योजना बस्तर में दम तोड़ती नजर आ रही है.
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Source: IOCL





















