Xप्लेन: बिहार में 'हाथी-कुत्ते' ने कैसे भड़का दिया छात्र आंदोलन? पूरा मामला समझिए
बिहार में छात्रों का कहना है कि हम पहले भी लाठियां खा चुके हैं, आज भी खाने को तैयार हैं. पुलिस की ये तैयारी हमें नहीं रोक पाएगी. धीरे-धीरे और लोग आ रहे हैं.

पटना के डाक बंगला चौराहे पर आज यानी 25 अगस्त 2026 का नजारा किसी युद्ध-क्षेत्र से कम नहीं है. छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने लोहे के बड़े-बड़े गाटर (बैरिकेड्स) लगा दिए हैं और 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं. छात्रों का कहना है, 'हम हर हाल में मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे... ये लोहे का गाटर हमारे लिए कोई बड़ी बात नहीं है. ये प्रदर्शन 'हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार' वाले विवादित बयान के बाद और भड़क गया. आइए इस पूरे मामले को डिटेल में समझते हैं...
आखिर क्यों हो रहा है ये प्रदर्शन?
छात्रों की नाराजगी का केंद्र बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) है. आंदोलन करने वाले छात्रों की तीन मुख्य मांगें हैं:
- एकल चरण परीक्षा: छात्र चाहते हैं कि TRE-4 की परीक्षा सिर्फ एक ही चरण (PT यानी प्रिलिम्स) में हो, न कि दो चरणों (PT और Mains) में. उनका तर्क है कि इससे उनपर अतिरिक्त बोझ पड़ता है.
- नेगेटिव मार्किंग खत्म हो: अभ्यर्थियों की मांग है कि परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था को हटाया जाए.
- 100% डोमिसाइल (स्थानीयता): बिहार के मूल निवासियों के लिए 100% आरक्षण लागू किया जाए.
ये प्रदर्शन 18 अगस्त से पटना के गर्दनीबाग में चल रहा था. ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन (ABSU) के छात्र नेता अमन गुट ने इस मार्च को अंजाम दिया है.
क्या है 'हाथी-कुत्ते' वाला बयान जिसने तूल पकड़ा?
पूरा मामला 24 अगस्त 2026 को BPSC की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हुआ. यहां परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि TRE-4 की परीक्षा दिसंबर या जनवरी में दो चरणों में होगी और इसमें नेगेटिव मार्किंग भी रहेगी.
जब पत्रकारों ने उनसे गर्दनीबाग में हो रहे छात्रों के प्रदर्शन के बारे में पूछा, तो राजेश कुमार सिंह ने कहा, 'एक कहावत आपने सुना होगा- हाथी चले बाजार तो कुत्ते भौंके हजार.'
इस बयान से छात्र भड़क गए. उन्होंने इसे अपना अपमान माना और 'BPSC चोर है' के नारे लगाने शुरू कर दिए. एक छात्र ने कहा, 'यही कुत्ता एक दिन आपके आयोग का अधिकारी बनेगा. एक बार कॉकरोच बोला गया था, तो प्रधान जी चले गए. अब सचिव की नौकरी जाएगी.'
इस बयान के बाद क्या हुआ?
- सस्पेंड हुए अधिकारी: विवाद बढ़ने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह को सस्पेंड करने का आदेश दे दिया.
- माफी: राजेश कुमार सिंह ने एक वीडियो जारी कर माफी मांगी, लेकिन छात्रों ने उनकी मांग पर अड़े रहने का फैसला किया.
- शिक्षा विभाग की पहल: शिक्षा विभाग ने BPSC को एक पत्र लिखकर TRE-4 की PT परीक्षा के सिलेबस में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. इसमें 50% सवाल बाल मनोविज्ञान से और बाकी 50% सामान्य ज्ञान (GK/GS) से पूछे जाने का सुझाव है. GK/GS के 30% सवाल बिहार के इतिहास, राजनीति, अर्थव्यवस्था और भूगोल से संबंधित होंगे.
- वन कैंडिडेट-वन रिजल्ट: यह मांग भी भेजी गई है, लेकिन अंतिम फैसला BPSC को करना है.
क्या बोले शिक्षा मंत्री?
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने प्रदर्शन पर कहा कि 'छात्रों की ज्यादातर मांगों को मान लिया गया है.' उन्होंने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा, 'जिस इंसान ने 10वीं की बोर्ड की परीक्षा तक नहीं दी, वो परीक्षा पर सुझाव दे रहे हैं... एक बार बिहार सरकार के स्कूल में दाखिला लीजिए, 10वीं पास कीजिए और फिर आकर हमें सुझाव दीजिए.'
पुलिस-प्रशासन की तैयारी, छात्रों का रुख और विपक्ष का क्या कहना है?
प्रशासन की तैयारी:
- डाकबंगला चौराहे पर छात्रों को रोकने के लिए लोहे के बड़े गाटर लगाए गए हैं.
- 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ CRPF के जवान भी तैनात किए गए हैं.
- जेपी गोलंबर और डाकबंगला पर भारी फोर्स तैनात है.
छात्रों की बात:
छात्र नेताओं का कहना है, 'हम हर हाल में मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे... अभी संख्या कम है, धीरे-धीरे और लोग आ रहे हैं... हम पहले भी लाठियां खा चुके हैं, आज भी खाने को तैयार हैं. पुलिस की यह तैयारी कोई काम नहीं आएगी.'
हालांकि, सभी छात्र संगठन इस मार्च से सहमत नहीं हैं. छात्र नेता दिलीप कुमार और AISA जैसे संगठनों ने खुद को इस आंदोलन से अलग रखा है.
वहीं, बिहार के विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने प्रदर्शनकारी छात्रों को समर्थन दिया है. उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर मांग की है कि 'आंदोलन करने वाले युवाओं की आवाज की अनदेखी न की जाए और उनकी मांगों का तुरंत समाधान निकाला जाए.' उन्होंने धरना स्थल पर जाकर छात्रों से मुलाकात भी की और कहा कि 'पूरा महागठबंधन और विपक्ष आपके साथ है.'
यह आंदोलन TRE-4 परीक्षा पैटर्न, नेगेटिव मार्किंग और स्थानीयता आरक्षण जैसे बुनियादी मुद्दों से जुड़ा है. भड़काऊ बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है. अब देखना यह है कि सरकार और BPSC क्या रास्ता निकालते हैं और क्या छात्रों का यह सीएम हाउस घेराव आखिरकार सफल होता है या नहीं.



















