बिहार की सियासत में काला धन? 163 पार्टियों ने नहीं दिया फंडिंग का ब्योरा, ADR रिपोर्ट में खुलासा
Bihar News: बिहार की राजनीति में ADR की रिपोर्ट ने पारदर्शिता की पोल खोल दी है. 275 पंजीकृत दलों में से आधे से ज्यादा ने न तो ऑडिट रिपोर्ट दी और न ही दान का ब्योरा दिया.

बिहार की राजनीति में सक्रिय छोटी-बड़ी पार्टियों की कमाई और पारदर्शिता पर एक नई रिपोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा किया है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने 275 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का वित्तीय विश्लेषण किया, जिसमें हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक कुल 275 पार्टियों का अध्ययन किया गया. इनमें से 184 बिहार में पंजीकृत हैं, जबकि 91 अन्य राज्यों से हैं. इनमें से 59.27% यानी 163 पार्टियों ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए न तो ऑडिट रिपोर्ट दी और न ही दान रिपोर्ट दी.
यानी आधे से ज्यादा दलों ने यह नहीं बताया कि उन्होंने पैसा कहां से और कितना पाया. सिर्फ 24.36% यानी 67 पार्टियों ने दोनों रिपोर्ट जमा कीं, जबकि 31 पार्टियों ने सिर्फ ऑडिट रिपोर्ट और 14 पार्टियों ने सिर्फ दान रिपोर्ट दी.
5 साल में 11 करोड़ से ज्यादा की कमाई
इन सभी पार्टियों की कुल आय पिछले 5 साल (2019-20 से 2023-24) के दौरान करीब ₹1,099.59 लाख (करीब 11 करोड़ रुपये) रही. लेकिन सवाल यह है कि यह पैसा कहां से आया और कैसे खर्च हुआ. इसका स्पष्ट जवाब आधी से ज्यादा पार्टियों के पास नहीं है.
चुनाव लड़ीं लेकिन जीत नहीं मिली
इनमें से 195 पार्टियों ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया. चुनावी नतीजों के हिसाब से इनका प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा. जो पार्टियां पारदर्शी रहीं यानी जिन्होंने दोनों रिपोर्ट दीं, उनमें से सिर्फ 8 उम्मीदवार ही जीत पाए. यानी रिपोर्टिंग करने से भी जीत की गारंटी नहीं, पर बिना रिपोर्ट के राजनीति जरूर चल रही है.
32 पार्टियां हुईं डीलिस्ट
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में चुनाव आयोग (ECI) ने 32 पार्टियों को सूची से हटा दिया. इन पर निष्क्रिय रहने, रिपोर्ट जमा न करने या लगातार चुनाव में हिस्सा न लेने का आरोप था. यह साफ दिखाता है कि आयोग अब निष्क्रिय दलों पर सख्ती दिखा रहा है.
ज्यादा कमाई करने वाली पार्टियां कौन सी?
वित्त वर्ष 2023-24 में जो पार्टियां दोनों रिपोर्ट जमा कर पाईं, उनमें सबसे ज्यादा कमाई समता पार्टी (दिल्ली) की रही. जिसका आंकड़ा करीब ₹5,313.92 लाख रहा. इसके बाद सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (पश्चिम बंगाल) ने ₹959.82 लाख, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया ने ₹479.55 लाख और राष्ट्रीय सर्वोदया पार्टी (बिहार) ने ₹242.45 लाख की आय घोषित की.
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिन्होंने दान की जानकारी दी, उन्होंने ₹20,000 से अधिक के कुल दान ₹71.73 करोड़ घोषित किए. हालांकि कई पार्टियों ने ₹20,000 से ऊपर कोई दान घोषित नहीं किया, जो पारदर्शिता पर और बड़ा सवाल उठाता है.
रिपोर्ट के मुताबिक शीर्ष 10 पार्टियों की पांच साल की संयुक्त आय ₹155.67 करोड़ रही. इनमें से सिर्फ 3 पार्टियों ने ही कुल आय का 75.6% हिस्सा अपने पास रखा. यानी बाकी सैकड़ों पार्टियों की आमदनी बेहद मामूली रही.
रिपोर्ट न देने वाली 163 पार्टियों का हाल
जो 163 पार्टियां रिपोर्ट नहीं देतीं, उनमें से 113 ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में हिस्सा लिया था लेकिन इनमें से एक भी पार्टी सीट नहीं जीत सकी. इनका औसत वोट शेयर भी बहुत कम रहा. सिर्फ 7,800 वोट प्रति पार्टी.
बिहार में 28 ऐसी पार्टियां भी सामने आईं जो पिछले 5 वर्षों में कोई चुनाव नहीं लड़ीं, फिर भी उन्होंने ₹152.54 लाख की आय घोषित की. ये दल सिर्फ कागज पर हैं, लेकिन इनकी आमदनी देखकर सवाल उठता है कि यह पैसा आता कहां से है.
ADR ने सख्ती को लेकर की सिफारिशें
ADR ने सिफारिश की है कि चुनाव आयोग को पंजीकरण और रिपोर्टिंग को और सख्त बनाना चाहिए. राज्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर नियमित रूप से वित्तीय डेटा अपलोड हो. निष्क्रिय और गैर-अनुपालन दलों की डीलिस्टिंग जारी रखी जाए. ज्यादा दान लेने वाली लेकिन चुनाव न लड़ने वाली पार्टियों पर निगरानी बढ़ाई जाए.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL


























