एनकाउंटर केस: भरत तिवारी के भाई चंदन को भोजपुर के SP ने धमकाया? जानें पूरा मामला
Bharat Tiwari Encounter: भरत के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि आम आदमी पर केस होता है तो आधे घंटे में उठा लिया जाता है. यहां पुलिस पर मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?

एनकाउंटर मामले में भरत भूषण तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी ने एक बार फिर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. चंदन ने शुक्रवार (26 जून, 2026) को मीडिया से बातचीत में कहा कि भोजपुर के एसपी जब रात में उनके घर आए थे तो उन्होंने अलग ले जाकर कहा था कि जो भी हो रहा है यह सब बंद होना चाहिए. भाई के अनुसार एसपी का व्यवहार ऐसा था जिससे उन्हें धमकी का एहसास हुआ.
हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. चंदन ने कहा कि जिस रात पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचे, उस समय परिवार के सिर्फ चार सदस्य मौजूद थे. घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं था. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बिना अनुमति और बिना सूचना के पुलिस घर के अंदर क्यों पहुंची?
उन्होंने कहा कि उस समय गांव के लोगों और मीडिया को घर के भीतर जाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन पुलिस सीधे घर के अंदर पहुंच गई. उनके मुताबिक, "अगर किसी से मिलने आना था तो पहले परिवार से अनुमति ली जानी चाहिए थी. आखिर बिना पूछे घर में क्यों घुसे?"
'SP ने कहा- यह सब बंद होना चाहिए'
चंदन का आरोप है कि एसपी उन्हें घर से अलग ले गए और करीब दो से तीन मिनट तक बातचीत की. उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान उनसे कहा गया कि, "यह सब बंद होना चाहिए, नहीं तो दिक्कत हो जाएगी."
चंदन ने कहा कि बातचीत का तरीका ऐसा था जिससे उन्हें लगा कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है. उनके अनुसार किसी ने सीधे धमकी जैसे शब्द नहीं कहे, लेकिन बात करने का अंदाज ऐसा था कि उन्हें लगा कि उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा, "उनके बात करने के तरीके से हमें समझ में आ गया कि हमें डराने की कोशिश की जा रही है."
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चंदन तिवारी ने मामले की जांच और कार्रवाई की रफ्तार पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "अगर किसी आम आदमी पर हत्या का केस होता है तो आधे घंटे में उसे उठा लिया जाता है. यहां पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? प्रशासन इसका जवाब दे."
चंदन ने यह भी कहा कि उन्हें रिटायर्ड जज से जांच नहीं चाहिए. उन्होंने मांग की कि मामले की जांच वर्तमान में कार्यरत किसी वरिष्ठ हाईकोर्ट के जज की निगरानी में कराई जाए ताकि किसी तरह का संदेह न रहे.
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