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गिल्ली-डंडा, कंचे खेलते-खेलते टीम इंडिया की स्टार स्पिनर बन गई पूनम यादव

गिल्ली-डंडा, कंचे खेलते-खेलते टीम इंडिया की स्टार स्पिनर बन गई पूनम यादव
नई दिल्ली/आगरा: 8 गेंदों पर जीत के लिए 10 रन और ऑल-आउट होकर लौट गई टीम इंडिया. लेकिन एक खिलाड़ी जो दूसरे छोर पर चुपचाप सबकुछ देखती रही और नॉट-आउट रहते हुए धीरे से वापस ड्रेसिंग रूम में लौट गई वो कोई और नहीं बल्कि टीम इंडिया की नई स्टार पूनम यादव थीं. जी हां आज से ठीक एक महीने पहले इंग्लैंड के लॉड्स के मैदान पर महिला टीम इंडिया को वो हार देखनी पड़ी थी जिसके लिए शायद एक सौ चौतीस करोड़ देशवासी बिल्कुल भी तैयार नहीं थे. लेकिन फिर भी भारतीय महिला टीम ने विश्व पटल पर एक ऐसा कारनामा कर दिखाया जिसके बारे में कुछ दिन पहले तक देश तो क्या किसी क्रिकेट जानकार ने भी नहीं सोचा था. विश्वकप फाइनल में वैसे तो कई नामों ने सुर्खियां बटोरी लेकिन एक नाम ऐसा भी था जिसने चुपचाप धीरे से अपना काम कर दिया और नाम भी नहीं हुआ. फाइनल मैच में पूनम ने लगातार 2 ओवर में टैमी ब्यूमोंट और कप्तान हीथर नाइट के विकेट चटकाकर इंग्लैंड की टीम को बड़ा स्कोर बनाने से रोकने में अहम भूमिका निभाई. आज उन्हीं पूनम यादव का 27वां जन्मदिन है और जब भारतीय टीम विश्वकप में इतना शानदार प्रदर्शन कर लौटी हैं तो फिर जश्न भी बनता है, इसी खुशी में आज पूनम अपने साथी खिलाड़ियों को जन्मदिन के मौके पर डीजे पार्टी और जश्न मनाने का पूरा मौका भी दे रही हैं. आइये इस खास मौके पर एबीपी न्यूज़ खुद पूनम की ज़ुबानी उनके जीवन और टीम से जुड़े कुछ अनसुने किस्से आपके सामने पेश कर रहा है. नन्हीं पूनम से स्टार पूनम बनने का पूरा सफर: कैसे क्रिकेट बन गया पूनम का पहला प्यार: क्रिकेट को लेकर पूनम का लगाव 6-7 साल की उम्र में शुरू हो गया. इस उम्र में ही उन्होंने बल्ला पकड़ना शुरू किया. खुद पूनम ने बताया कि अपने क्रिकेट खेलने की शुरूआत में वो लड़कों के साथ खेलती थीं. वो अपने बड़े भाई के साथ खेलने जाती थीं. वहां लड़के ही खेलते थे. पूनम ने बताया कि शुरुआत में अक्सर उनकी मां ने टोका कि ये क्या कर रही है. जिसे अनसुना कर अक्सर पूनम लड़कों के साथ क्रिकेट ही नहीं गिल्ली-डंडा और कंचे जैसे खेल भी खेलती थी. पूनम ने बताया 10-11 साल की उनकी उम्र में एक ऐसा वक्त भी आया जब लड़कों ने उन्हें क्रिकेट खेलने से रोकने की कोशिश की, एक लड़के ने कई बार पूनम से कहा कि लड़कियां कुछ नहीं कर पाती हैं. एक बार उन्होंने पूनम के घर पर शिकायत भी कि 'आखिर क्यों वो लोग पूनम को खेलने जाने देते हैं. वहां पर कोई लड़की नहीं आती.' पूनम ने इसके बाद बताया कि अक्सर उसे पूनम ही आउट करती थीं. लेकिन इसके बाद भी पूनम की क्रिकेट के प्रति दीवानगी कम नहीं हुई. पूनम ने बताया कि वो बचपन में अपने भाई के साथ खेलने जाती थीं लेकिन उनके भाई उन्हें लेकर नहीं जाते थे. तब उनके दोस्त भी कहते थे कि 'पूनम को खेलने लेकर आओ वर्ना नहीं आना.' खुद पूनम के भाई के दोस्तों ने भी उनसे कहा कि 'ये अच्छा खेलती है, इसे खिलाओ.' क्रिकेट में करियर बनाने के लिए खुद पहुंच गई स्टेडियम: पूनम ने एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत करते हुए बताया कि क्रिकेट में अपना करियर बनाने के लिए वो बिना किसी घरवाले को लिए खुद ही स्टेडियम पहुंच गई. पूनम ने बताया किस तरह से शुरुआत में उनके घरवाले इसके खिलाफ थे. पूनम की सहेलियों ने पहले पूनम से कहा स्टेडियम ज्वॉइन करने के लिए. लेकिन पूनम ने उन्हें ये कहकर मना कर दिया कि पापा और मम्मी कहेंगे कि पढ़ाई नहीं करती और स्टेडियम ज्वॉइन करना हैं. लेकिन तब उनकी उन्हीं दो सहेलियों ने घर आकर पूनम की मम्मी को उनके स्टेडियम ज्वॉइन करने के लिए मनाया. बना चुकी थी क्रिकेट छोड़ने का मन: टीम इंडिया स्टार स्पिनर पूनम की ज़िंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जब उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया. उन्होंने खुद अपने इस सपने से हार मान ली थी. पूनम ने बताया टीम इंडिया में चयन से पहले यूपी के लिए पहली बार ट्रायल देते वक्त पूनम ने अपनी गेंदबाज़ी के साथ बल्लेबाज़ी में भी हाथ आज़माने का मन बनाया. लेकिन पहले ट्रायल के दौरान उन्होंने सिंगल डिजिट में रन बनाए. इसके बाद उन्हें लगा कि उनसे नहीं हो पाएगा, उन्हें क्रिकेट छोड़ देना चाहिए. उस समय उन्होंने भगवान को याद करते हुए एक नोट लिखा, जिसपर पूनम ने लिखा 'मुझे क्रिकेट छोड़ देना चाहिए.' लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था. तभी पूनम की भाभी ने वो नोट देख लिया और पूनम के पापा को इस बारे में जानकारी दी. इसके बाद पूनम के पापा ने उनसे पूछा कि पूनम तुम क्रिकेट छोड़ना चाहती हो? तब पूनम ने कहा, "हां पापा प्रैक्टिस कर रही थी तो कुछ हो नहीं पा रहा था, तो सोचा छोड़ दूं." इसके बाद पूनम के पापा ने उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए मोटिवेट किया और कहा, "पूनम आपने मेहनत की है, हो सकता है इसका फल 1 साल में ना मिले, 2 साल में ना मिले, 3 साल में ना मिले लेकिन अगर आपने मेहनत की है तो उसका फल चौथे साल में ज़रूर मिलेगा."
गिल्ली-डंडा, कंचे खेलते-खेलते टीम इंडिया की स्टार स्पिनर बन गई पूनम यादव
मां, ऑफिस और रेलवे ने जमकर किया पूनम का सपोर्ट: जिस तरह टीम इंडिया के कप्तान एमएस धोनी, भारतीय टीम में आने से पहले रेलवे में टी.टी. का काम किया करते थे, उसी तरह से महिला टीम की पूनम भी टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने से पहले से ही रेलवे के साथ जुड़ी हुई हैं. इस दौरान पूनम के ऑफिस कर्मचारी, रेलवे और खुद उनकी मां का सबसे ज्यादा सपोर्ट रहा. पूनम के देर रात प्रैक्टिस या मैच खेलकर लौटने पर अक्सर पड़ोस के लोग टोका करते थे. पूनम की मम्मी को भी कई लोगों ने कहा कि लड़की इतनी-इतनी रात को वापस आती है लेकिन पूनम की मम्मी ने अक्सर अपनी बेटी का समर्थन किया. उन्होंने ही अपनी बेटी की खेल की दीवानगी को देखकर उसे आगे बढ़ने दिया. मां के अलावा रेलवे की ओर से जॉब मिलने के बाद पूनम सेटल हो गई और उन्हें लगा कि अब वो अपने खेल की ओर और ज्यादा अच्छे से ध्यान दे सकती हैं. पूनम ने बताया कि ऑफिस में लोगों ने उनके खेल को लेकर सपोर्ट किया. अक्सर वो मैच खेलकर किट में ही या बिना धुले कपड़ों में ऑफिस पहुंच जाती थी लेकिन सभी लोगों ने उनका हौंसला बढ़ाया. इस दौरान पूनम ने रेलवे का शुक्रिया अदा करते हुए बताया कि रेलवे उन्हें साल में 330 दिन की छुट्टी दे रहा है. जिससे वो खिलाड़ी देश के लिए अच्छे से तैयारी कर सके. पूनम की ज़ुबानी ड्रेसिंग रूम की कहानी: मैच से पहले नहीं सोती पूनम: शायद ये पढ़कर हर किसी को अजीब लगे लेकिन पूनम यादव किसी भी बड़े मैच से पहले वाली रात जागकर काटती हैं. जी हां, पूनम ने बताया कि 'वो मैच से पहले सोती नहीं उन्हें ऐसा लगता है कि अगर वो मैच से पहले वाली रात सो जाती हैं तो उन्हें लगता है कि अगले दिन मैच ही नहीं है.' इतना ही नहीं पूनम ने बताया कि विश्वकप 2017 के मैचों के दौरान भी वो नहीं सोईं. टीम की सबसे चुलबुली और एंटरटेनर: पुरूष टीम इंडिया में युवराज सिंह और शिखर धवन ड्रेसिंग रूम के सबसे बड़े एंटरटेनर बताए जाते हैं. उसी तरह से महिला टीम की एंटरटेनर और चुलबुली स्टार का पता चल गया है. पूनम ने बताया कि टीम की सबसे चुलबुली कैरेक्टर वो खुद हैं और अक्सर मैच के दौरान भी टीम के बाकी खिलाड़ियों के साथ मस्ती-मज़ाक करती रहती हैं. जबकि टीम की एंटरटेनर के तौर पर उन्होंने हरमनप्रीत कौर, मोना मेशराम, एकता बिष्ट, वेदा कृष्णामूर्ति के नाम बताए. इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच से पहले का एक वाक्या बताते हुए उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच से पहले हरमनप्रीत डांस कर रही थी, अलग-अलग स्टेप करके दिखा रही थीं क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच से पहले बारिश हो रही थी तो हम सभी खुद को चिल रखने के लिए ये सब कर रहे थे.' फाइनल का फाइनल लम्हा: भारतीय टीम फाइनल मैच में ऑल-आउट होग गई लेकिन एक खिलाड़ी जो दूसरे छोर पर नॉट-आउट लौटी वो थीं पूनम यादव. पूनम ने बताया कि जब वो मैदान पर उतरीं तो उनके दिमाग में बस एक चीज़ थी कि उन्हें ये मैच देश के लिए जीतना है, भगवान ने मुझे एक नतीजा देने के लिए मैदान पर ये मौका दिया है, आज मुझे ये मैच जितवाना है. लेकिन वो नहीं हो पाया और वो 9 रन हमेशा मुझे चुभते रहेंगे.' वर्ल्डकप के बाद बदलाव: पूनम इसके साथ ही ये भी बताया कि किस तरह से पिछले एक महीने में उनकी ज़िंदगी में ये बड़ा बदलाव आ गया है. पूनम ने कहा, 'अब लोग पहचानने लगे हैं. पहले जब मैंने डेब्यू किया था उसके बाद आगरा में ही स्टेडियम में प्रैक्टिस करने जाती थी तो लोग पहचानते भी नहीं थे कि कौन है, लेकिन अब घर पर कई लोग आकर ऑटोग्राफ और फोटो खिंचवाने के लिए कहते हैं. अब लोग सम्मान दे रहे हैं. जगह-जगह बड़े-बड़े इवेंट्स के लिए बुलाते हैं.' पूनम ने बताया कि 'कभी नहीं सोचा था कि पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिलेगा, लेकिन वो भी मिला. ये सभी बदलाव ज़िंदगी में आ गए हैं. पूनम की पर्सनल लाइफ: किशोर और अरिजीत की फैन हैं पूनम: मैदान पर बल्लेबाज़ों पर काबू रखने वाली पूनम को गाने सुनने का शौक है. निजी जीवन में वो किशोर कुमार और अरिजीत सिंह की फैन है. अक्सर खाली वक्त में पूनम इनके गाने सुनती हैं. न्यूज़ नहीं सीरियल्स की हैं शौकीन: महिला विश्वकप में टीम की सफलता के साथ अक्सर न्यूज़ में रहने वाली पूनम को न्यूज़ देखना पसंद नहीं है, न्यूज़ के साथ ही वो टीवी भी कम ही देखती हैं. अक्सर वो यू-ट्यूब या वीडियो के जरिए मैदान पर की गई अपनी गेंदबाज़ी के वीडियोज़ देखती हैं. जिससे वो अपनी गेंदबाज़ी में और सुधार कर सकें. घर में मां का हाथ भी बंटाती है पूनम: वैसे तो पूनम अक्सर अपने शेड्यूल में इतना बिज़ी रहती हैं कि उन्हें उस तरह से घर में कुछ खास करने का मौका नहीं मिलता. लेकिन एबीपी न्यूज़ से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि जब कभी मां की तबीयत ठीक नहीं रहती तो वो घर में उनका हाथ बंटाती है. मां के हाथ का खाना: पूनम यादव खाने की शौकीन हैं लेकिन उन्हें सिर्फ अपनी मां के हाथ का खाना पसंदा आता है, अक्सर घर से बाहर रहने पर वो इसे खूब मिस करती हैं. शादी नहीं देश के लिए कुछ करना चाहती हैं: टीम इंडिया की स्पिन स्टार पूनम यादव का अभी शादी करने का कोई इरादा नहीं है, पूनम ने अपने भविष्य को लेकर कहा कि अभी वो देश के लिए कुछ खास करना चाहती हैं. शादी फिर हो जाएगी लेकिन ये मौका फिर नहीं आएगा. पूनम ने कहा कि शादी के बाद ज़िम्मेदारियां बहुत बढ़ जाती हैं तो आप क्रिकेट पर फोकस भी नहीं कर सकते.'
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