क्रिकेट में क्या होती है रिवर्स बॉलिंग? अब क्यों गेंदबाज नहीं करते इसका इस्तेमाल
What Is Reverse Swing Bowling: रिवर्स स्विंग बॉलिंग किसी भी तेज गेंदबाज का बड़ा मजबूत हथियार होता है. इससे गेंद पुरानी होने के बाद भी बल्लेबाजों को परेशान किया जाता है.

अगर आप क्रिकेट को थोड़ा करीब से फॉलो करते हैं, तो आपने शायद 'रिवर्स बॉलिंग' का नाम सुना होगा. करीब एक या दो दशक पहले के क्रिकेट में गेंदबाज रिवर्स बॉलिंग का काफी इस्तेमाल किया करते थे. इससे गेंद पुरानी होने के बाद भी गेंदबाजों के लिए मददगार बनी रहती थी. लेकिन क्रिकेट के मौजूदा दौर में इस शब्द और कला का इस्तेमाल बहु कम हो रहा है. तो आइए जानते हैं कि रिवर्स बॉलिंग क्या होती है और अब इसका इस्तेमाल क्यों नहीं होता है.
क्या होती है रिवर्स बॉलिंग
गेंदबाज नई चमकती हुई गेंद के साथ गेंद को स्विंग कराता है. इसको स्विंग बॉलिंग कहते हैं. लेकिन जैसे-जैसे गेंद पुरानी होती जाती है, वैसे-वैसे गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग मिलने लगती है. पुरानी गेंद को एक तरफ से शाइन किया जाता है और दूसरी तरफ से उसे पुराना होने दिया जाता है. इस तरह चिकनी और खुरदरी सतह वाली गेंद हवा में जाती है, तो गेंद स्विंग होने लगती है.
रिवर्स स्विंग के लिए तेज रफ्तार की भी जरूरत होती है. इस गेंदबाजी की शुरुआत पाकिस्तान के तेज गेंदबाज सरफराज नवाज ने की थी. फिर धीरे-धीरे इसे बाकी देशों के खिलाड़ियों ने अपनाया.
अब क्यों गेंदबाज नहीं करते रिवर्स स्विंग का इस्तेमाल?
मौजूदा वक्त में रिवर्स स्विंग का इस्तेमाल कम होने के पीछे सबसे बड़ा कारण लार (Saliva) पर प्रतिबंध है. गेंदबाज लार की मदद से गेंद की एक साइड को चिकना और शाइन करते थे, जिससे रिवर्स में सबसे ज्यादा मदद मिलती है, लेकिन कोविड-19 के बाद से अतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने लार के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया था.
इसके अलावा आजकल की पिच का रखरखाव ज्यादा अच्छे से किया जाता है. इससे पिच खुरदरी नहीं होती है और गेंद एक साइड से ज्यादा रफ नहीं हो पाती है. वहीं वनडे क्रिकेट में अब 2 गेंदों का इस्तेमाल होता है, जिससे कोई भी उतनी पुरानी नहीं हो पाती है, जिससे उसे रिवर्स मिल सके.
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