धोनी पर गौतम गंभीर ने दिया इशारा, 'अब भविष्य का विकेटकीपर तलाशे भारत'
आने वाले रविवार को वेस्टइंडीज़ दौरे के लिए टीम चयन से पहले टीम इंडिया के पूर्व स्टार गौतम गंभीर ने धोनी के चयन पर कहा है कि अब भविष्य का फैसला करने का वक्त आ गया है.

आने वाले रविवार को वेस्टइंडीज़ के खिलाफ सीरीज़ के लिए भारतीय टीम का चयन का होना है, इससे पहले टीम इंडिया के विश्वकप हीरो और पूर्व स्टार गौतम गंभीर ने कहा है कि एमएस धोनी के भविष्य को लेकर व्यवहारिक फैसले लेने चाहिए. गंभीर ने कहा कि अब भविष्य को लेकर निवेश करना का वक्त आ गया है.
एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली चयन समिति आने वाले रविवार को बैठेगी. जिसमें ये फैसला होगा कि धोनी विंडीज़ दौरे पर टीम के साथ होंगे या नहीं.
पीटीआई ने बताया कि गौतम गंभीर ने टीवी चैनल टीवी 9 भारतवर्ष से कहा,‘‘अब टीम को भविष्य के बारे में सोचना जरूरी है. क्योंकि खुद धोनी जब कप्तान थे तो उन्होंने भविष्य में निवेश किया.''
गंभीर ने ये भी याद दिलाया कि ''धोनी ने आस्ट्रेलिया में कहा था कि मैं(गंभीर), सचिन और सहवाग तीनों सीबी सीरिज नहीं खेल सकते क्योंकि मैदान बड़े हैं.’’
उन्होंने कहा,‘‘धोनी ने विश्व कप के लिये युवा खिलाड़ी मांगे थे. जज्बाती होने की बजाय व्यवहारिक फैसले लेना जरूरी है. युवाओं को मौका देने की जरूरत है. चाहे वह ऋषभ पंत हो, संजू सैमसन, ईशान किशन या कोई और विकेटकीपर. जिसमें भी क्षमता दिखे, उसे विकेटकीपर बनाया जाना चाहिये.’’
इसके साथ ही गंभीर ने ये भी कहा कि अब वक्त है कि युवा विकेटकीपर को आज़माया जाए जिससे की आगामी विश्वकप के लिए एक नए खिलाड़ी की खोज पूरी हो सके.
उन्होंने कहा,‘‘उन्हें डेढ़ साल मौका दें और अगर वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते तो किसी और को आजमाया जाये. इससे पता चल जायेगा कि अगले विश्व कप में विकेटकीपर कौन होगा.’’
साथ ही गंभीर ने इस बातचीत के दौरान ये भी कहा कि धोनी अच्छे कप्तान थे लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सौरव गांगुली, विराट कोहली, अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ कहीं भी कमतर थे.
उन्होंने कहा,‘‘आंकड़ों को देखें तो वह सर्वश्रेष्ठ कप्तान है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि दूसरे कप्तान कमतर थे. सौरव गांगुली अच्छे कप्तान थे. हमने विदेश में उनकी कप्तानी में जीता. विराट कोहली की कप्तानी में हमने दक्षिण अफ्रीका में वनडे और आस्ट्रेलिया में टेस्ट श्रृंखला जीती.’’
गंभीर ने कहा,‘‘यह सही है कि धोनी ने हमें दो विश्व कप (2007 और 2011) जिताये लेकिन कप्तान को सफलता का सारा श्रेय देना और नाकाम रहने पर उसे गुनहगार ठहराना गलत है. धोनी ने चैम्पियंस ट्राफी और विश्व कप जीते लेकिन दूसरे कप्तान भी भारत को आगे ले गए. अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ ने यह काम किया है.’’
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