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ईरान और अमेरिका की पाकिस्तान में बातचीत फेल, अब होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा या नहीं? जानें अब आगे क्या होगा

Islamabad Talks: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा कि ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानीं. दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा थीं और वह उन पर सहमत नहीं हो सकता.

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम बातचीत पूरी तरह विफल हो गई है. करीब 21 घंटे तक चली इस मीटिंग से उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा और खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कोई समाधान निकलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. अब हालात पहले जैसे ही बने हुए हैं, जिससे दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है.

क्यों टूटी बातचीत?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा कि ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानीं. दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा थीं और वह उन पर सहमत नहीं हो सकता. यानी दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे और कोई बीच का रास्ता नहीं निकल पाया.

होर्मुज स्ट्रेट पर क्या हुआ फैसला?
ईरान की ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा. इसका मतलब है कि 28 फरवरी से जो स्थिति बनी हुई है, जब इस रास्ते को लगभग बंद कर दिया गया था वह आगे भी जारी रह सकती है.

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है. यहां से करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो इसका असर सीधे तेल की कीमतों, पेट्रोल-डीजल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

सीजफायर के दौरान क्या हुआ था?
8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों का सीजफायर हुआ था. इस दौरान यह तय हुआ था कि हर दिन सीमित संख्या में, यानी करीब 15 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने दिया जाएगा, लेकिन हालात अचानक बिगड़ गए. लेबनान पर हमले के बाद कुछ ही मिनटों में ईरान ने फिर से इस रास्ते को बंद कर दिया. यानी सीजफायर का असर ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया.

अब जहाजों का क्या होगा?
पहले जो समझौता हुआ था, उसके मुताबिक जहाजों को सीमित संख्या में गुजरने की इजाजत मिलनी थी. लेकिन अब जब ईरान ने साफ कर दिया है कि स्थिति नहीं बदलेगी, तो इसका मतलब है कि वे जहाज भी फंसे रह सकते हैं, जिन्हें गुजरने की अनुमति मिलने वाली थी.

ईरान का असली मकसद क्या है?
ईरान साफ तौर पर होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है. उसका मानना है कि इस रास्ते पर पकड़ बनाए रखने से उसे मिडिल ईस्ट में ताकत और दबदबा बनाए रखने में मदद मिलती है. यही वजह है कि उसने अपनी शर्तों में भी इसे शामिल किया था.

अब आगे क्या होगा?
फिलहाल साफ है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई नई और ठोस सहमति नहीं बनती, तब तक होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की संभावना बहुत कम है. इसका असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की तेल सप्लाई, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह संकट और बड़ा रूप भी ले सकता है. 

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