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'संप्रभुता को दरकिनार करने वाली कनेक्टिविटी...', PM मोदी ने SCO समिट में ही BRI प्रोजेक्ट पर चीन को सुना दिया

SCO Summit 2025: तियानजिन में SCO समिट के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि संप्रभुता का सम्मान किए बिना कनेक्टिविटी बेकार है. उनका बयान CPEC की ओर इशारा कर रहा था, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से गुजरता है.

चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लेनरी सत्र को संबोधित करते हुए कनेक्टिविटी और संप्रभुता पर बड़ा बयान दिया. पीएम मोदी ने कहा कि कनेक्टिविटी को हमेशा संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए. यह SCO चार्टर का मूल सिद्धांत है. संप्रभुता को दरकिनार करने वाली कनेक्टिविटी पर भरोसा नहीं किया जा सकता और उसका कोई महत्व नहीं रह जाता.

यह बयान सीधे तौर पर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर इशारा माना जा रहा है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है. यह परियोजना चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का सबसे अहम हिस्सा है और लंबे समय से भारत इसका विरोध करता आ रहा है. पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत का मानना है कि मजबूत कनेक्टिविटी सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि विश्वास और विकास भी सुनिश्चित करती है. इसी दृष्टिकोण से भारत चाबहार पोर्ट और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) पर काम कर रहा है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जुड़ाव को मजबूत करेगा.

उन्होंने कहा कि भारत की कोशिश हमेशा से रही है कि SCO सिर्फ सरकारों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे आम लोगों, युवाओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स से जोड़ा जाए ताकि संगठन की पहुंच और प्रभाव बढ़ सके.

BRI क्या है?

BRI (Belt and Road Initiative), जिसे चीनी भाषा में वन बेल्ट, वन रोड (One Belt, One Road) कहा जाता है, चीन की एक बड़ी वैश्विक पहल है. इसकी शुरुआत इस उद्देश्य से हुई थी कि चीनी कंपनियां विदेशों में परिवहन, ऊर्जा और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का निर्माण करें. इन प्रोजेक्ट्स को चीनी विकास बैंकों से मिले ऋण (loans) से फंड किया जाता है.

इसका मुख्य लक्ष्य है कि चीन की बाकी दुनिया से कनेक्टिविटी बेहतर हो और इस तरह व्यापार और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले. इसे एक तरह से 21वीं सदी का नया सिल्क रोड कहा जा सकता है, जो चीन से मिडिल ईस्ट होते हुए यूरोप तक व्यापार मार्ग बनाता है.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 में कज़ाखस्तान और इंडोनेशिया की यात्राओं के दौरान इस विचार की घोषणा की थी. इसके बाद यह पहल तेजी से आगे बढ़ी और इसके तहत कई बड़े प्रोजेक्ट बनाए गए, जैसे केन्या और लाओस में रेलमार्ग और पाकिस्तान और इंडोनेशिया में बिजलीघर.

BRI के खिलाफ क्यों है भारत?

भारत ने शुरू से ही BRI का विरोध किया है और इसका सबसे बड़ा कारण है चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC). CPEC, BRI का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है. भारत मानता है कि यह उसके संप्रभु अधिकार (sovereignty) का उल्लंघन है, क्योंकि PoK भारत का अभिन्न हिस्सा है.

भारत सरकार का कहना है कि उसने इस मुद्दे पर बार-बार संबंधित देशों के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया है और उनसे ऐसी गतिविधियां बंद करने को कहा है. विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि सरकार का रुख स्पष्ट और स्थिर (clear and consistent) है. साथ ही भारत सरकार लगातार इस प्रोजेक्ट से जुड़े हर विकास पर कड़ी नज़र रखती है और देश की सुरक्षा और अखंडता की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाती है.

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