इस बड़े मुस्लिम देश ने चीन को दिया तगड़ा झटका, मिडिल-ईस्ट में दबदबा बनाने के लिए अब क्या करेंगे जिनपिंग?
China Setback from Middle-East: चीनी फाइटर जेट J-35 अमेरिका के F-35 फाइटर जेट की तुलना में काफी सस्ता है. उसके बाद भी चीन को इसके लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं.

China Setback from Middle-East: मिडिल-ईस्ट में अपना दबदबा बनाने के लिए चीन कई सालों से प्रयास कर रहा है. वो चाहता है कि खाड़ी के पावरफुल देश अमेरिका से नहीं, बल्कि उससे हथियार खरीदें. ड्रैगन की इस स्ट्रैटजी को सऊदी अरब ने बड़ा झटका दिया है. सऊदी ने चीन के J-35 स्टील्थ फाइटर जेट को खरीदने से इनकार कर दिया है.
जिनपिंग का मानना है कि सऊदी अरब जैसा पावरफुल देश अगर J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदता है तो छोटे-छोटे देश भी चीनी हथियारों पर भरोसा करेंगे और आने वाले समय में मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी हथियारों को चीनी हथियारों से रिप्लेस किया जा सकता है. चीन ने इसको लेकर बार-बार दावा भी किया कि सऊदी अरब चीनी स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने वाला है, लेकिन एक रिपोर्ट में जो सामने आया है, उससे जिनपिंग के मंसबों को तगड़ा झटका लग सकता है.
चीन के मंसूबे पर फिर गया पानी!
IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अब छठी पीढ़ी के फाइटर जेट के निर्माण के लिए ब्रिटेन, इटली और जापान के साथ मिलकर काम करने वाला है. उसकी इन देशों के साथ बातचीत एडवांस लेवल तक पहुंच चुकी है. कहा ये भी जा रहा है कि इस साल के आखिर तक ये डील पक्की हो जाएगी. इस डील के पक्के होते ही मिडिल-ईस्ट को लेकर उसकी रणनीति पर पानी फिर जाएगा. फिलहाल मिडिल ईस्ट के देश अमेरिका और पश्चिमी देशों से हथियार खरीद रहे हैं.
फाइटर जेट्स बेचने के लिए ग्राहक की तलाश में ड्रैगन
चीन J-35 स्टील्थ फाइटर जेट के लिए बाजार की तलाश में है. अबतक सिर्फ पाकिस्तान ही फाइटर जेट को खरीदने के लिए तैयार हुआ है. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान किसी चीनी प्रेशर में आकर डील करने को राजी हुआ था क्योंकि J-35 की टेक्नोलॉजी को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं. सऊदी अरब के सामने चीन किसी धमकी देने की हैसियत में नहीं है, इसलिए उसने ऐसी डील करने से इनकार कर दिया है, जिससे आगे चलकर नुकसान होने वाला हो. सऊदी के बाद अब कई और देश जो अबतक चीन से J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने के लिए बातचीत कर रहे थे ओ भी अब इनकार कर सकते हैं.
सऊदी अरब की पश्चिमी देशों से चल रही बातचीत
सऊदी अरब ने चीन से हथियार तो खरीदे हैं, लेकिन स्ट्रैटजिक हथियारों की डील नहीं की है. रिपोर्ट में कहा है कि सऊदी अरब और पश्चिमी देशों के अधिकारी पहले ही नये प्रोजेक्ट पर बातचीत कर रहे हैं. पश्चिमी देशों के बीच फाइटर जेट निर्माण के लिए हाई टेक्नोलॉजी है, जो सऊदी और पश्चिमी देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीति का संकेत देता है.
F-35 से सस्ता है चीनी J-35 फाइटर जेट
बता दें कि चीनी फाइटर जेट J-35 अमेरिका के F-35 जैसे फाइटर जेट्स की तुलना में काफी सस्ता है और इसका मेंटिनेंस भी कम खर्चीला है. ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, इस फाइटर जेट के दो संस्करण हैं. एक वायुसेना के लिए और दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए. J-35 की खासियत है कि इस जेट में डबल इंजन लगा हुआ है. एक्सपर्ट्स चीन के इस जेट को अमेरिका के F-35 की नकल बताते हैं.
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Source: IOCL






















