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ट्रंप का प्लान कर रहा काम! दो दिनों से रूस-यूक्रेन ने नहीं किया कोई हमला, छाई शांति

Russia Ukraine War: यूक्रेन में युद्धविराम के लिए चल रही कवायद खटाई में पड़ती नजर आ रही है. यूक्रेन और रूस ने एक-दूसरे पर ऊर्जा संयंत्रों पर सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

Russia Ukraine War: यूक्रेन और रूस ने मंगलवार (25 मार्च, 2025) से एक-दूसरे की एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई हमला नहीं किया है. दरअसल, यह वही दिन था जब व्हाइट हाउस ने सऊदी अरब में दोनों देशों के साथ हुई वार्ता में हुए समझौतों की घोषणा की थी.

वाशिंगटन ने मंगलवार को बताया कि कीव और मॉस्को दोनों ने ऊर्जा अवसंरचना पर हमले रोकने के लिए "कार्यान्वयन के उपाय विकसित करने" पर अलग-अलग सहमति जताई है. यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, 25 मार्च से किसी भी रूसी या यूक्रेनी हमले की कोई खबर नहीं आई है.

क्या रूस और यूक्रेन इस समझौते को बनाए रखेंगे?
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस सहमति के बावजूद रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग की है. इससे संकेत मिलता है कि कीव को मॉस्को की नीयत पर भरोसा नहीं है. रूस के रुख को लेकर भी संदेह बना हुआ है. 19 मार्च को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक फोन वार्ता में, पुतिन ने 30 दिनों के लिए ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की सहमति दी थी लेकिन इसके बावजूद, मॉस्को ने हाल ही में यूक्रेनी ऊर्जा सुविधाओं पर हमले किए.

विश्लेषकों का क्या कहना है?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धविराम अस्थायी हो सकता है और दोनों देश अपने रणनीतिक लाभ के अनुसार इसे तोड़ सकते हैं. अमेरिका और यूरोप इस समझौते को लेकर आशावादी हैं, लेकिन वे इसकी निगरानी भी कर रहे हैं.

काला सागर में शांति, लेकिन शंकाएं बरकरार
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, रूस और यूक्रेन काला सागर में हमले रोकने पर भी सहमत हुए हैं. यह क्षेत्र यूक्रेन के अनाज निर्यात और रूस के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन मॉस्को ने इस शांति समझौते के बदले में अपने कृषि निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील की मांग की है. अगर अमेरिका और यूरोप इस मांग को नहीं मानते हैं, तो रूस इस युद्धविराम को तोड़ सकता है. यूक्रेनी अधिकारियों का भी कहना है कि "समुद्र के बारे में अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है."

क्या काला सागर में शांति बहाल हो सकेगी?
रूस चाहता है कि उसके कृषि निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई जाए. अगर यह नहीं होता है, तो मॉस्को अपनी समुद्री गतिविधियां फिर से आक्रामक बना सकता है. पश्चिमी देशों को डर है कि रूस इस समझौते को कूटनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर सकता है.

युद्धविराम का भविष्य
अगर रूस और यूक्रेन इस सहमति का पालन करते हैं, तो ऊर्जा सुविधाओं और समुद्री मार्गों पर हमले कम हो सकते हैं. अगर कोई पक्ष इस सहमति को तोड़ता है, तो फिर से युद्ध बढ़ सकता है. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस युद्धविराम की निगरानी करेगा, जिससे दोनों पक्षों पर दबाव बना रहेगा.

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