'बीबी हो जाता है बेकाबू', लेबनान में ईरान को मजबूत करने के अमेरिकी कदम से चिंतिंत इजरायल
Israel on US-Iran MoU: इजरायली PM नेतन्याहू ने US-ईरान MoU की अनदेखी करते हुए कहा कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में तब तक बनी रहेगी, जब तक उन्हें अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए इसकी जरूरत महसूस होगी.

- अमेरिकी-ईरानी MoU में लेबनान संघर्ष समाप्ति का बिंदु शामिल।
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे संघर्ष के बाद अंतरिम शांति समझौता हो चुका है. इसके साथ ही हाल में ही स्विट्जरलैंड में भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत भी हुई है, लेकिन अमेरिका और ईरान की इस नजदीकी से इजरायल के प्रधानमंत्री काफी परेशान नजर आ रहे हैं. दरअसल, इजरायल को इस बात की चिंता हो रही है कि ट्रंप प्रशासन कहीं लेबनान में ईरान की स्थिति को मजबूत तो नहीं कर रहा है. इसी चिंता की वजह से पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायली सैनिकों को लेबनान से हटाने से इनकार कर दिया है.
फरवरी, 2026 में अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर संयुक्त हमलों के साथ पश्चिम एशिया में इस युद्ध की शुरुआत हुई थी, लेकिन अब यह एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां वाशिंगटन तेहरान के साथ लगातार बातचीत में लगा हुआ है और इजरायल लेबनान को लेकर असमंजस की स्थिति में फंसा हुआ है.
पिछले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी की स्थिति को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच पिछले हफ्ते एक 14 बिंदुओं वाले समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन किए गए हैं, जिसमें एक बिंदु लेबनान में संघर्ष को खत्म पर भी शामिल है.
समझौते में लेबनान को लेकर क्या कहा गया?
ड्राफ्ट के पहले बिंदु में कहा गया, ’अमेरिका-ईरान और वर्तमान युद्ध में उनके सभी सहयोगी इस MoU पर साइन कर सभी मोर्चों पर, जिनमें लेबनान भी शामिल है, सैन्य अभियानों की तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने का ऐलान करते हैं. वे अब से एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी युद्ध या सैन्य ऑपरेशन की शुरुआत नहीं करने, ताकत का इस्तेमाल करने या ताकत के इस्तेमाल की धमकी से बचने और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं.’
हालांकि, इजरायली पीएम नेतन्याहू ने सोमवार (22 जून, 2026) अमेरिका-ईरान एमओयू की अनदेखी करते हुए कहा कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में तब तक बनी रहेगी, जब तक उन्हें अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए इसकी जरूरत महसूस होगी.
वहीं, एक्सियोस ने दो इजरायली सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि मंगलवार (23 जून, 2026) को स्विट्जरलैंड में ईरान और US के बीच तकनीकी बातचीत के खत्म होने के साथ ही ऐसी रिपोर्टें सामने आई कि इजरायली सरकार को शक है कि अमेरिका लेबनान में ईरान के प्रभाव को मजबूत कर सकता है. इससे इलाके में इजरायल की आजाद सैन्य कार्रवाई की क्षमता पर असर पड़ सकता है.
अमेरिका इजरायल पर बना सकता है दबाव- इजरायल
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली अधिकारियों को चिंता है कि ट्रंप और ईरान के बीच हुए नए समझौते लेबनान में ईरान के समर्थन वाले आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह को कमजोर करने के लिए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त कोशिशों को कमजोर कर सकती है. इसके साथ ही, उन्हें यह भी डर है कि अब वाशिंगटन हर बार लेबनान में इजरायल की तरफ से किसी सैन्य हमले की योजना पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है और ट्रंप दक्षिणी लेबनान से इजरायली सैनिकों की वापसी के लिए दबाव बना सकते हैं.
इजरायली सूत्रों का कहना है कि नेतन्याहू को US-ईरान अंतरिम समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रावधानों की तुलना में लेबनान से जुड़े हिस्से को लेकर ज्यादा चिंता है. एक सूत्र ने एक्सियोस से कहा, ‘बीबी (नेतन्याहू) इसे लेकर बेहद परेशान हैं.’
यह भी पढ़ेंः US-ईरान डील में उलझा रहा PAK, ट्रंप ने भारत के साथ कर ली बड़ी डिफेंस डील, अपाचे हेलिकॉप्टर बनेगा और घातक























