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जानिए, यूरोप में जब लोग काम पर लौट रहे हैं तो दुनिया कैसे बदली-बदली सी है?

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए यूरोप के अधिकांश देशों ने अपने यहां कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का आदेश दिया. मामला नहीं संभला तो लॉकडाउन लग गया. और अब जब कर्मचारी लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद अपने-अपने दफ्तर लौट रहे हैं तो उनकी दुनिया बदली-बदली सी नज़र आ रही है.

कोरोना के संक्रमण ने दुनिया को अब उस मुहाने पर खड़ा कर दिया है कि इतिहास में एक पन्ना जुड़ गया है. जैसे हम इतिहास में ईसा पूर्व और ईस्वी सन यानि कि बीसी और एडी पढ़ते हैं, अब कुछ उसी तर्ज पर बिफोर कोरोना वर्ल्ड और और आफ्टर कोरोना वर्ल्ड हो सकता है. यूरोप में यही हो रहा है. कोरोना की वजह से पहले कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने के लिए कहा गया. इसके बाद लॉकडाउन लगा. करीब दो महीने तक लोग अपने-अपने घर से काम करते रहे. जो काम घर से नहीं हो सकते थे, जैसे कि फैक्ट्री में प्रोडक्शन, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन वगैरह वो बंद हो गए थे. और अब जब दो महीने के बाद लोग अपने-अपने काम पर लौट रहे हैं, तो उन्हें अपना ऑफिस और अपने ऑफिस के आस-पास का पूरा माहौल बदला-बदला नजर आ रहा है.

पहले ऑफिस में कुर्सियां एक दूसरे के पास-पास होती थीं. लेकिन अब सोशल डिस्टेंसिंग ज़रूरी है, तो ऑफिस का इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बदलना पड़ रहा है. ऑफिस में ऐसे बदलाव किया जा रहा है, ताकि कर्मचारियों के बीच न्यूनतम दूरी बरकरार रखी जा सके. इसके अलावा ऑफिस में कैंटीन या फिर कॉफी वेन्डिंग मशीन के पास ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि एक बार में सिर्फ एक ही आदमी वहां तक पहुंच सके. पहले लोग अपने किसी साथी से पेन मांगकर कुछ लिख पढ़ सकते थे, उनकी डायरी का इस्तेमाल कर सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है, क्योंकि ऐसा करने से कोराना के संक्रमण का खतरा है.

ब्रिटेन जैसे देश में किसी भी ऑफिस में घुसने से पहले कर्मचारी की स्क्रिनिंग ज़रूरी है. ऑफिस के एलिवेटर और लिफ्ट में भी बदलाव किया जा रहा है, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग को बरकरार रखा जा सके. वहीं फ्रांस जैसे देश में नए नियमों के मुताबिक किसी दुकान में या फिर किसी ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए प्रति कर्मचारी कम से कम चार वर्ग मीटर की जगह होनी ही चाहिए. यानि कि एक आदमी के लिए कम से कम छह फीट की जगह चाहिए. और अगर कोई कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए इतनी जगह नहीं दे पा रही है, तो फिर कंपनी को अपने कर्मचारी को मास्क देना पड़ रहा है और कर्मचारी उस मास्क को हमेशा लगाकर ही रह रहा है. इसके अलावा ऑफिस में लगे दरवाजों के हैंडल, टॉयलेट्स और ऐसी दूसरी जगहें, जिन्हें कई लोग इस्तेमाल करते हैं, उनकी सफाई दिन में कई बार की जा रही है.

स्पेन में कुछ कंपनियों ने अपने यहां लगे डेस्क को हटा दिया है. एलिवेटर्स पर लोगों के आवागमन को सीमित कर दिया है. ब्रिटेन में तो सरकारी आदेश में कहा गया है कि जहां तक संभव हो, कर्मचारी सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करें. अगर वो एलिवेटर का इस्तेमाल करते हैं तो एलिवेटर से उतरने के साथ ही उन्हें सेनेटाइजर से अपने हाथ साफ करने चाहिेए.

दफ्तरों के अंदर एक दूसरे से दूरी बनाए रखने के लिए फ्लोर टेप और पेंट के जरिए मार्क लगाए गए हैं ताकि कर्मचारियों के बीच दो मीटर की दूरी बरकरार रखी जा सके. डेस्क ऐसी बनाई जा रही हैं कि कर्मचारी एक दूसरे के सामने मुंह करके न रह सकें. अगर डेस्क को इस तरह से बनाने में दिक्कत आ रही है तो फिर प्लैक्सीग्लास के जरिए एक दूसरे से दूरी बनाई जा रही है. इसका नतीजा भी सामने आ रहा है, क्योंकि प्लैक्सिग्लास बनाने वाली कंपनियों के यहां डिमांड बढ़ गई है. अब दुकानों और दफ्तरों में इसे लगवाने के लिए लोग आगे आ रहे हैं.

दफ्तर में काम करने के दौरान लोगों से कहा जा रहा है कि वो अपना लंच या डिनर घर से लेकर आएं. साथ ही ब्रेकआउट एरिया या फिर कैफेटेरिया में आने-जाने वाले लोगों की संख्या को सीमित किया जा रहा है. दफ्तर में होने वाली बड़ी-बड़ी मीटिंग्स को टाला जा रहा है. वहीं स्पेन और अमेरिका की कुछ बड़ी कंपनियों ने ऑफिस के गेट पर ही टेंपरेचर जांचने वाली मशीनें लगा दी हैं. अमेरिका में तो फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने फैक्ट्री और वेयरहाउस में भी इन्फ्रारेड थर्मल कैमरा सिस्टम को अस्थाई तौर पर लगाने की इजाजत दे दी है, जबकि खाने के सामान के पास इन्फ्रारेड थर्मल कैमरा सिस्टम को लगाने की इजाजत पहले नहीं थी.

हालांकि कोविड 19 में बुखार होना एक सामान्य लक्षण है, लेकिन अब ऐसे भी लोग सामने आ रहे हैं, जो कोरोना संक्रमित हैं, लेकिन उनमें कोई लक्षण नहीं हैं. इन्फ्रारेड थर्मल कैमरा सिस्टम ऐसे लोगों की पहचान नहीं कर सकता है और ये एक बड़ा खतरा है. इससे बचने की एक कोशिश के तहत अमेरिका के मिशिगन में स्थित फोर्ड कंपनी अपने कर्मचारियों को कलाई में बांधने वाला एक बैंड दे रही है. अगर कोई कर्मचारी जाने अनजाने किसी दूसरे कर्मचारी के नज़दीक आ जाता है, तो ये बैंड उसे अलर्ट कर देता है और फिर कर्मचारी दूर हो जाता है जिससे कि सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे. बेल्जियम में भी ऐसे ही बैंड की टेस्टिंग चल रही है.

वहीं ब्रिटेन में पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू होने की कवायद चल रही है. और अगर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू होंगे तो महज 10 फीसदी लोग ही यात्रा कर सकेंगे. इसके लिए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने लोगों से कहा है कि संभव हो तो वो पैदल यात्रा करें, साइकिल से यात्रा करें या फिर अपनी कार से यात्रा करें. पैदल और साइकल से चलने वालों के लिए ब्रिटेन में अब नए सिरे से रास्ते भी बनाए जा रहे हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रिक स्कूटर की भी टेस्टिंग चल रही है.

लेकिन कुल मिलाकर अब भी कोरोना की दहशत बरकरार है. ये दहशत इसलिए भी है कि अब तक इस वायरस की कोई वैक्सीन सामने नहीं आई है. इसके अलावा वायरस से संक्रमण लगातार बढ़ता ही जा रहा है और मरने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. लेकिन अब दुनिया का कोई भी देश लॉकडाउन को झेलने के लिए तैयार नहीं है. इसलिए लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, नियमों को आसान बनाया जा रहा है और नए-नए नियम बनाए जा रहे हैं ताकि लोग काम पर भी लौट सकें और उनमें संक्रमण का खतरा भी कम से कम हो सके.

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