Israel Iran War: ईरान युद्ध में कितनी मौतें? ईरान युद्ध में मौत का डरावना आंकड़ा
Israel Iran War Death Report: 2 मार्च से शुरू हुए हमलों में लेबनान में 1,238 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कम से कम 124 बच्चे शामिल हैं.

28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले चुका है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि आम नागरिक, बच्चे और सैनिक सभी इस जंग की कीमत चुका रहे हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुए इस युद्ध ने अब कई देशों को प्रभावित किया है.
ईरान में सबसे ज्यादा तबाही
अमेरिका स्थित मानवाधिकार समूह HRANA के अनुसार, '3,461 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 1,551 नागरिक और कम से कम 236 बच्चे शामिल हैं.' वहीं इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रसेंट सोसाइटीज का कहना है कि 'कम से कम 1,900 लोग मारे गए और 20,000 घायल हुए हैं.'
इन आंकड़ों में अंतर इस बात को दिखाता है कि जमीनी हालात बेहद जटिल हैं और सही संख्या का आकलन करना मुश्किल हो रहा है.
लेबनान बना दूसरा बड़ा मोर्चा
2 मार्च से शुरू हुए हमलों में लेबनान में 1,238 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कम से कम 124 बच्चे शामिल हैं. हिज्बुल्लाह के 400 से ज्यादा लड़ाके भी मारे गए हैं, जबकि लेबनानी सेना के 8 जवानों की भी जान गई है.
इराक और इजरायल में भी नुकसान
इराक में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें नागरिक, मिलिशिया और सैनिक शामिल हैं. इजरायल में ईरान और लेबनान से दागी गई मिसाइलों के कारण 19 लोगों की मौत हुई, जबकि 5 सैनिक भी मारे गए.
अमेरिका और खाड़ी देशों तक असर
अमेरिका के 13 सैनिकों की मौत हुई है, कुछ विमान हादसे में, तो कुछ ऑपरेशन के दौरान. यूएई में 10 लोगों, कुवैत में 6, कतर में 7 और बहरीन में 2 लोगों की मौत दर्ज की गई है.
ईरान युद्ध में 8 भारतीयों की मौत
वेस्ट एशिया में जारी ईरान युद्ध अब भारतीयों के लिए भी लगातार चिंता का कारण बनता जा रहा है. 30 मार्च 2026 को कुवैत में हुए ताजा हमले ने भारत को एक और झटका दिया है. सोमवार तड़के पावर और वाटर डीसैलिनेशन प्लांट पर ईरानी हमले में एक भारतीय कर्मचारी की मौत हो गई. इसके साथ ही इस संघर्ष में जान गंवाने वाले भारतीयों की संख्या बढ़कर कम से कम 8 हो गई है. कुवैत के बिजली और जल मंत्रालय ने बताया कि हमले में साइट की एक सर्विस बिल्डिंग भी क्षतिग्रस्त हुई और इसे “पापपूर्ण ईरानी आक्रामकता” करार दिया गया. हालात संभालने के लिए तुरंत तकनीकी और इमरजेंसी टीमें भेजी गईं.
इससे पहले 26 मार्च को अबू धाबी में मिसाइल इंटरसेप्शन के दौरान गिरे मलबे से एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य घायल हुआ. भारतीय दूतावास ने कहा था कि वह “यूएई अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है.” 18 मार्च को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी मिसाइल हमले में उत्तर प्रदेश के 26 वर्षीय रवि गोपाल की मौत हो गई थी. इससे पहले ओमान की खाड़ी में टैंकर हमलों में तीन भारतीय नाविकों की जान गई थी.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक इस युद्ध में कम से कम 8 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता बताया जा रहा है. यह घटनाएं दिखाती हैं कि यह संघर्ष अब सीधे भारतीयों को अपनी चपेट में ले चुका है.
नागरिकों पर सबसे ज्यादा असर
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ा है. अस्पताल, स्कूल और रिहायशी इलाके तक निशाने पर आए हैं. ईरान का दावा है कि हजारों नागरिक ठिकाने नष्ट हुए हैं और स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं . गाजा और आसपास के इलाकों में भी मानवीय संकट गहराता जा रहा है, जहां लोग खाने, पानी और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे हैं .
सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों में भी हमलों के कारण जानें गई हैं, जो इस संघर्ष के तेजी से फैलने का संकेत है.
यह युद्ध 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों को निशाना बनाया. धीरे-धीरे यह संघर्ष “मल्टी-फ्रंट वॉर” में बदल गया, जहां लेबनान, इराक, सीरिया और खाड़ी देश भी इसकी चपेट में आ गए.
ईरान युद्ध अब आंकड़ों का खेल नहीं रहा यह इंसानी त्रासदी बन चुका है. हर दिन बढ़ती मौतें और नए देशों का इसमें शामिल होना यह संकेत दे रहा है कि यह संकट अभी थमने वाला नहीं है. सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि कितने लोग मारे गए, बल्कि यह है कि इस जंग को रोका कब जाएगा.
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Source: IOCL




























