जेलेंस्की को डोनाल्ड ट्रंप ने दिया एक ओर झटका, यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी नहीं साझा करेगा अमेरिका
व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के बाद से ट्रंप जेलेंस्की से खफा हैं. अमेरिका के सख्त रुख को देखते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति के तेवर नरम हुए हैं और अब वो अमेरिका की तारीफ कर रहे हैं.

युद्धग्रस्त देश यूक्रेन को एक और बड़ा झटका देते हुए अमेरिका ने बुधवार (05 मार्च, 2025) को सैन्य सहायता रोकने के कदम के बाद यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करने को 'रोकने' का फैसला किया.
सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने फॉक्स न्यूज को बताया, 'राष्ट्रपति ट्रंप के मन में यह सवाल था कि क्या राष्ट्रपति जेलेंस्की शांति प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध हैं'. उन्होंने कहा कि 'सैन्य मोर्चे और खुफिया मोर्चे पर' रोक स्थायी नहीं थी और अमेरिका फिर से यूक्रेन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगा'.
जेलेंस्की ने मंगलवार को युद्ध को लेकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने कहा, 'यूक्रेन शांति समझौते के लिए प्रतिबद्ध है हम इसे लेकर आगे भी काम करते रहेंगे. यूक्रेन खनिज समझौता करने के लिए भी तैयार है'. बीते दिनों व्हाइट हाउस में मीटिंग के दौरान ट्रंप के साथ हुई बहस को लेकर जेलेंस्की ने अफसोस जाहिर किया और युद्ध रोकने की दिशा में काम करने को लेकर अमेरिका का आभार भी जताया.
जेलेंस्की ने की अमेरिका की तारीफ
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा, 'अमेरिका ने जिस तरह यूक्रेन की आजादी बनाए रखने का समर्थन किया. हमारी एकता और अखंडता बनाने रखने के लिए जिस तरह वो काम कर रहे हैं, हम इस चीज को समझते हैं और हम इसके लिए अमेरिका का शुक्रिया अदा करते हैं'.
जेलेंस्की की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप को लिखे गए खत को लेकर ट्रंप ने कहा, 'मैं सराहना करता हूं कि वो शांति समझौते को लेकर आगे बढ़ रहे हैं'.
जेलेंस्की से नाराजगी जता चुके हैं ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच बीते दिनों हुई बहस के बाद ट्रंप ने उन पर जमकर निशाना साधा था. डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा, 'यूक्रेन के राष्ट्रपति का ये कहना कि रूस और यूक्रेन युद्ध खत्म होने में अभी समय लगेगा. ये उनका (वोलोदिमीर जेलेंस्की) का अबतक का सबसे खराब बयान है'.
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर कहा,'वोलोदिमीर जेलेंस्की रूस के साथ युद्ध नहीं खत्म करना चाहते हैं वो शांति नहीं चाहते जबकि उनके पास अमेरिका और यूरोप का समर्थन भी है. जब उनसे मुलाकात हुई थी तो मैंने कहा था कि वो अमेरिका के सहयोग के बिना ये युद्ध नहीं लड़ सकते'.
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Source: IOCL






















