Coronavirus: अब नहीं रहे 'छिपे हुए पीड़ित' बच्चों की इंडोनेशिया में हो रही मौत, जानिए क्या कहते हैं आंकड़े
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 के कारण इंडोनेशिया की बाल मृत्यु दर किसी दूसरे देश के मुकाबले ज्यादा है. यहां कोरोना वायरस बच्चों की जिंदगी पर कहर बनकर टूट रहा है.

भारत के बाद कोरोना वायरस ने अपना फोकस इंडोनेशिया पर कर दिया है. इंडोनेशिया में कोरोना वायरस सैंकड़ों बच्चों की मौत का कारण बना है, उनमें से ज्यादातर पांच साल से नीचे के हैं. इससे पता चलता है कि अब बच्चे भी कोरोना संक्रमण से सुरक्षित नहीं हैं, जबकि इससे पहले माना जा रहा था कि बच्चों को कोरोना का ज्यादा जोखिम नहीं है.
इंडोनेशिया में कोरोना बच्चों को ले रहा है चपेट में
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये भी सामने आया है कि किसी भी देश के मुकाबले इंडोनेशिया में कोविड-19 के कारण बच्चों की मृत्यु दर ज्यादा है. इंडोनेशिया के पेडियाट्रिक सोसायटी प्रमुख डॉक्टर अमन भक्ति पुलंगन के हवाले से कहा गया, सिर्फ 12 जुलाई के सप्ताह में 150 से अधिक बच्चे कोविड-19 से जान गंवा चुके हैं, हाल में होनेवाली मौतों में आधी संख्या 5 साल से कम उम्र की है.
बाल चिकित्सकों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि देश के संक्रमित मामलों में 12.5 फीसद बच्चों की संख्या है, जो पूर्व के महीनों की तुलना में बढ़ोतरी है. उन्होंने कहा, "हमारी संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है. हम क्यों नहीं अपने बच्चों को सर्वश्रेष्ठ दे पा रहे हैं?"
संक्रमण के मामले में इंडोनेशिया बना नया केंद्र
भारत में पहली बार उजागर हुए डेल्टा वेरिएन्ट ने कई अन्य देशों के लिए अपना रास्ता बना लिया है. इंडोनेशिया में मृत्यु दर में वृद्धि दक्षिण-पूर्व एशिया में डेल्टा वेरिएन्ट के प्रसार से भी मेल खाती है, जहां टीकाकरण की दर खराब है, जिसके नतीजे में प्रकोप का रिकॉर्ड न सिर्फ इंडोनेशिया बल्कि थाईलैंड, मलेशिया, म्यामांर और वियतनाम में है.
जुलाई में, इंडोनेशिया भारत और ब्राजील को दैनिक मामलों के सिलसिले में पछाड़ते हुए महामारी का नया केंद्र बन गया. शुक्रवार को अधिकारियों ने करीब 50,000 संक्रमण के नए मामले और 1,566 मौत का एलान किया. पुलंगन के मुताबिक, 18 साल से कम उम्र के 800 बच्चों की इंडोनेशिया में महामारी की शुरुआत से वायरस के चलते मौत हो चुकी है, लेकिन उनमें से ज्यादा की मौत सिर्फ पिछले महीने दर्ज की गई.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में मौत की ज्यादा संख्या स्वास्थ्य समस्या जैसे कुपोषण, मोटापा, डायबिटीज और दिल के रोग की वजह से हो सकती है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में टीकाकरण की कम दर भी दूसरा फैक्टर है. सिर्फ 16 फीसद इंडोनेशया के लोगों को वैक्सीन का पहला डोज लगा है और मात्र 6 फीसद लोगों ने वैक्सीन की दोनों खुराक इस्तेमाल की है.
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