अमेरिका ने चीन से बोला सफेद झूठ! जिनपिंग-ट्रंप की फोन कॉल के बाद बीजिंग ने खोली पोल
China Reaction on Trump Claim: 2 दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत के बाद शेखी बघारी थी. लेकिन चीन ने एक बयान जारी कर ट्रंप को झूठा साबित कर दिया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से फोन पर बातचीत के बाद ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट डालकर कई बड़े दावे किए. ट्रंप ने इसे 'लंबी और बहुत सकारात्मक' बातचीत बताया और कहा कि इसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. ट्रंप ने लिखा कि उनके और शी जिनपिंग के बीच व्यक्तिगत संबंध 'बहुत अच्छे' हैं और अगले तीन सालों में दोनों देशों के बीच कई पॉजिटिव नतीजे आएंगे.
जिनपिंग से बातचीत के दावे पर ट्रंप ने क्या कहा था?
4 फरवरी 2026 को ट्रंप और जिनपिंग की बातचीत में ट्रेड, मिलिट्री, अप्रैल में ट्रंप की चीन यात्रा, ताइवान, रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान की स्थिति, चीन के अमेरिका से तेल और गैस खरीद, हवाई जहाज इंजनों की डिलीवरी और कृषि उत्पादों की खरीद शामिल रही. खास तौर पर ट्रंप ने दावा किया कि चीन इस सीजन में अमेरिकी सोयाबीन की खरीद 20 मिलियन टन तक बढ़ाएगा और अगले सीजन में 25 मिलियन टन तक पहुंचाएगा.
चीन ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज किया
चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट में ट्रंप के इन ज्यादातर दावों का कोई जिक्र नहीं है. शिन्हुआ ने सिर्फ इतना कहा कि दोनों नेताओं ने अमेरिका-चीन संबंधों की स्थिति पर चर्चा की, सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई और 2026 को 'बराबर सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और विन-विन सहयोग' का साल बताया. चीन की रिपोर्ट में ट्रंप के सोयाबीन, ऊर्जा खरीद, अप्रैल यात्रा या अन्य ट्रेड डील जैसे दावों की कोई जानकारी नहीं है. इससे लगता है कि बातचीत में शी जिनपिंग ने ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जोर दिया और हावी रहे.
रिपोर्ट में ताइवान को मुख्य मुद्दा बताया गया, जहां शी जिनपिंग ने अमेरिका को ताइवान को हथियार बेचने में 'अत्यधिक सावधानी' बरतने की चेतावनी दी और कहा कि ताइवान चीन का अभिन्न अंग है जिसे कभी अलग नहीं होने दिया जाएगा.
ट्रंप कूटनीति की राह पर, लेकिन चीन रेड लाइंस पर अड़ा
ट्रंप और जिनपिंग की यह बातचीत पिछले साल अक्टूबर में दक्षिण कोरिया में हुई मुलाकात के बाद हुई है, जहां उन्होंने एक साल के ट्रेड ट्रूस पर सहमति जताई थी. अब अप्रैल में ट्रंप चीन की यात्रा करने वाले हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बयानों से साफ है कि ट्रेड, ताइवान और अन्य मुद्दों पर अभी भी गहरे मतभेद हैं. ट्रंप कूटनीति और व्यक्तिगत संबंधों पर जोर दे रहे हैं, जबकि चीन ताइवान जैसी अपनी 'रेड लाइंस' पर सख्त है.
ट्रंप अक्सर ऐसी प्री-एम्प्टिव घोषणाएं करते हैं और खुद को प्रमोट करने के लिए बातचीत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जैसा उन्होंने भारत के साथ ट्रेड डील में भी किया था. दोनों पक्षों के बयानों में बड़ा अंतर है, लेकिन कोई ठोस सबूत या आधिकारिक समझौता दस्तावेज जारी नहीं हुआ है. सोयाबीन फ्यूचर्स में तेजी आई है ट्रंप के दावे के बाद, लेकिन चीन की तरफ से कोई पुष्टि नहीं आई.
Source: IOCL

























