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कोरोना वायरस: मौतों पर चीन सरकार के दावों पर सवाल क्यों, जानिए क्या है हेरफेर?

कोरोना से होने वाली मौतों के नियमों में बदलाव की 4 बड़ी वजह है. चीन में जीरो कोविड पॉलिसी के फेल होने से रोजाना 5000 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है. चीन में 20 लाख लोगों की मौत का अनुमान है.

कोरोना के आउट ऑफ कंट्रोल होने के बाद चीन ने आंकड़ों की बाजीगरी शुरू कर दी है. कोरोना से कितनों की मौत हुई है, इसे गिनने के लिए चीनी स्वास्थ्य विभाग ने नई गाइडलाइंस जारी की है. गाइडलाइंस के मुताबिक किसी मरीज के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अगर सांस से संबंधित किसी बीमारियों से मौत होती है, तभी कोरोना डेथ घोषित किया जाएगा.

कोरोना से होने वाली मौत के नियमों में बदलाव करने पर चीन की किरकिरी शुरू हो गई है, क्योंकि यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नियमों का सीधा-सीधा उल्लंघन है. ऐसे में सवाल उठता है कि चीन ने फिर भी नियमों में क्यों बदलाव किया है?

कोरोना से मौत को लेकर WHO गाइडलाइंस क्या है?

  • कोरोना पॉजिटिव मरीज की किसी भी तरह की बीमारी से मौत होने पर उसे कोरोना डेथ ही माना जाएगा.
  • अगर मरीज पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. जैसे- कैंसर. उस स्थिति में मौत होने पर कोरोना डेथ नहीं माना जाएगा.
  • कोरोना मरीज की अगर सड़क या कोई दुर्घटना में मौत होती है, तो कोरोना डेथ नहीं माना जाएगा.


कोरोना वायरस: मौतों पर चीन सरकार के दावों पर सवाल क्यों, जानिए क्या है हेरफेर?

चीन ने क्यों बदले नियम, 4 प्वाइंट्स...
1. मौत का आंकड़ा 5000 के पार- Bloomberg ने ब्रिटेन की संस्था एयरफिनिटी के हवाले से दावा किया है कि चीन में कोरोना से हर रोज 5000 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नए वैरिएंट की वजह से चीन में रोज 10 लाख नए केस सामने आ रहे हैं.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि चीन में जनवरी महीने में कोरोना संक्रमितों की संख्या 37 लाख प्रतिदिन तक पहुंचेगा. इधर, चीन ने दावा किया है कि इस महीने अब तक कोरोना से सिर्फ 7 लोगों की मौत हुई है.

2. लैंसेट और IHME का अनुमान- द लैंसेट जर्नल ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन में कोरोना वायरस की वजह से 20 लाख लोगों की मौत हो सकती है. इधर, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के अंतर्गत काम करने वाली संस्था इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ मेडिसिन एंड इवेल्यूशन ने भी दावा किया है कि अप्रैल तक 3.22 लाख चीनियों की कोरोना से मौत हो सकती है.

संस्था ने आगे कहा है कि 2023 तक कोरोना से चीन में 10 लाख लोगों की जान जा सकती है. रिपोर्ट में चीनी में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया गया है. 

3. कोरोना वैक्सीन कारगर नहीं- एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन के कोरोना वैक्सीन mRNA वैक्सीन नहीं है, जिस वजह से वहां के लोगों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर है. पिछले दिनों WHO के अधीन काम करने वाली संस्था स्ट्रैटजिक एडवाइजरी ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट ऑन इम्यूनाइजेशन (SAGE) ने सलाह दिया कि चीन कोरोना वैक्सीन में बदलाव करे.

SAGE ने रिसर्च में पाया कि चीनी वैक्सीन लगाने के बाद भी व्यक्ति कोरोना के नए वैरिएंट से लड़ पाने में सक्षम नहीं है. ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन ने जर्मनी से कोरोना वैक्सीन खरीदने पर सहमति जताई है. 

4. हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और जीरो कोवड पॉलिसी- मौत के नियमों में बदलाव करने की एक बड़ी वजह हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का नहीं होना है. चीन में बेकाबू कोरोना की वजह से अस्पतालों में लंबी कतारे लगी है. चीन सरकार अगर कोरोना से मौत की संख्या जारी करने लगे तो लोग इलाज के लिए अस्पताल की दौर लगाएंगे. 

ऐसे में कोरोना से मौत का डेटा बदलकर चीन सरकार लोगों को घर में ही इलाज कराने की सलाह दे रही है. कोरोना के नए केस आने की वजह से चीन में जीरो कोविड पॉलिसी भी फेल हो चुका है. सरकार इस किरकिरि से बचने के लिए आंकड़ों की बाजीगरी करने में जुटी है.

आंकड़ों की बाजीगरी में माहिर चीन

  • चीन ने WHO को कोरोना का डेटा देना बंद किया. 2020-21 में भी WHO को चीन ने डेटा नहीं दिया था.
  • 2020-21 में चीन ने कोरोना से 4636 मौतों का आंकड़ा दिया, जबकि 17 लाख के आसपास मौतें हुई थी. 

हांगकांग में 72 मौतें फिर चीन में 7 कैसे?
फाइनेंसियल टाइम्स के मुताबिक पिछले दो दिनों में हांगकांग में 72 मरीजों की कोरोना से मौत हो गई है. हांगकांग चीन के कब्जे वाला एक इलाका है. इधर, चीन ने दावा किया है कि उसके यहां कोरोना से सिर्फ 7 की ही मौत हुई है. चीन के इस दावे पर हांगकांग के आंकड़े ही सवाल उठा रहे हैं. 

ओमिक्रॉन का वैरिएंट BF.7 कितना पावरफुल?
कोरोना वायरस का एक वैरिएंट है ओमिक्रॉन. इसके कई सब वैरिएंट हैं, जैसे- BA.1, BA.2, BA.5 वगैरह. ओमिक्रॉन का ऐसा ही एक नया सब वैरिएंट है BA.5.2.1.7 जिसे एक्सपर्ट शॉर्ट में BF.7 कह रहे हैं. BF.7 कोरोना के स्पाइक प्रोटीन में एक खास म्यूटेशन से बना है, जिसका नाम है R346T. 

इसी म्यूटेशन की वजह से BF.7 सबसे खतरनाक बन गया है. इसमें मरीज के एंटीबॉडी का असर नहीं होता है. BF.7 मरीज को स्प्रेडर भी बना रहा है. एक्सपर्ट के मुताबिक BF.7 से पीड़ित एक मरीज 10-18 लोगों को संक्रमित कर सकता है. 

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