'परमाणु ठिकानों पर हमले सही नहीं', BRICS का अमेरिका को सख्त मैसेज
BRICS नेताओं ने नई दिल्ली घोषणा में नागरिक बुनियादी ढांचे और IAEA की निगरानी वाले शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि परमाणु सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए.

BRICS देशों के नेताओं ने शनिवार को नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पूरी निगरानी में चल रहे शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई. नेताओं ने साफ कहा कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा और संरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए.
भारत की मेजबानी में आयोजित दो दिवसीय BRICS शिखर सम्मेलन के पहले दिन अपनाई गई ‘नई दिल्ली घोषणा’ में नेताओं ने परमाणु खतरे और संघर्ष के बढ़ते जोखिम पर भी चिंता जताई.
मोदी ने की नई दिल्ली घोषणा को अपनाने की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले दिन की बैठक खत्म होने पर नई दिल्ली घोषणा को अपनाए जाने की घोषणा की. इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और BRICS के अन्य शीर्ष नेता मौजूद रहे.
भारत के लिए यह घोषणा एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है. पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के बीच तीखे मतभेदों के बावजूद BRICS देश संयुक्त घोषणा पर सहमत हुए. हालांकि, घोषणा में ईरान पर अमेरिका के हमलों या खाड़ी के अरब देशों पर ईरानी सेना के हमलों का सीधे तौर पर कोई उल्लेख नहीं किया गया.
परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता
घोषणा में किसी देश का नाम लिए बिना कहा गया कि नागरिक बुनियादी ढांचे और IAEA की पूरी निगरानी में चल रहे शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर चिंता है. BRICS नेताओं ने कहा कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और IAEA के संबंधित प्रस्तावों का उल्लंघन हैं.
नेताओं ने कहा कि लोगों और पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और निगरानी व्यवस्था को हर स्थिति में बनाए रखना जरूरी है. इसमें सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी इन मानकों का पालन शामिल है.
परमाणु खतरे और संघर्ष के बढ़ते जोखिम पर चिंता
BRICS नेताओं ने परमाणु खतरे और संघर्ष के बढ़ते जोखिम को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत दोहराई.
घोषणा में कहा गया कि इस व्यवस्था की मजबूती और प्रभावशीलता बनाए रखना वैश्विक स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए जरूरी है.
परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों का समर्थन
BRICS नेताओं ने परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों के महत्वपूर्ण योगदान को भी स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्र परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
नेताओं ने दुनिया में मौजूद सभी परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों और उनसे जुड़े परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी के खिलाफ सुरक्षा आश्वासनों के प्रति अपना समर्थन और सम्मान दोहराया.
मध्य पूर्व को परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र बनाने की कोशिश
BRICS ने मध्य पूर्व को परमाणु हथियारों और अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों को तेज करने की जरूरत पर भी जोर दिया.
घोषणा में “मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों और अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त क्षेत्र की स्थापना” से जुड़े प्रस्तावों को लागू करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिशों के महत्व को स्वीकार किया गया. इसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा के निर्णय 73/546 के तहत बुलाई गई सम्मेलन प्रक्रिया भी शामिल है.
BRICS ने इस सम्मेलन में आमंत्रित सभी पक्षों से सद्भावना के साथ हिस्सा लेने और इस प्रयास में रचनात्मक तरीके से जुड़ने की अपील की.
परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों पर UN प्रस्ताव का भी जिक्र
घोषणा में संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 79/241 ‘परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों के सभी पहलुओं पर व्यापक अध्ययन’ को अपनाए जाने का भी उल्लेख किया गया.
BRICS ने कहा कि इस अध्ययन का सफलतापूर्वक निष्कर्ष निकला और समूह ने इसे सर्वसम्मति से अपनाया.
2024 और 2025 में बढ़ा BRICS का विस्तार
BRICS में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे. वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और सऊदी अरब के शामिल होने के बाद समूह का विस्तार हुआ. 2025 में इंडोनेशिया भी BRICS में शामिल हुआ.
इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल BRICS के साझेदार देश बने.
नई दिल्ली घोषणा में परमाणु सुरक्षा, परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण पर जोर ऐसे समय दिया गया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी हुई है.
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