नहीं मिलेगा, न देंगे और न किसी को देने देंगे...सदन में मुस्लिम आरक्षण को लेकर अमित शाह ने स्पष्ट किया सरकार का रुख
Amit Shah on Women Reservation Bill: गृहमंत्री अमित शाह ने महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में संबोधन दिया. इस दौरान उन्होंने मुस्लिम आरक्षण पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी.

Women Reservation Bill: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह महिला आरक्षण बिल को लेकर लोकसभा में संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने करीब उन्होंने कई मुद्दों पर बात की. साथ ही मुस्लिम आरक्षण को लेकर सदन में जवाब दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम आरक्षण नहीं मिलेगा. न ही देंगे और न कभी किसी को देंगे.
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है. इसके दो कारण हैं. पहला आरक्षण पाने के लिए ऐसी योग्यता नहीं होना चाहिए, जिसे कोई प्राप्त कर सके. आरक्षण जन्म से नहीं मिलता है. धर्म से नहीं मिलता है.
धर्म के नाम पर हम आरक्षण कभी नहीं देंगे: शाह
शाह ने कहा कि आरक्षण उन लोगों के लिए है जो सामाजिक रूप से पिछड़े होते हैं या फिर अनूसूचित जाति या जनजाति में पैदा होते हैं. तुष्टिकरण की राजनीति के चलते मुस्मिम आरक्षण की मांग करते हैं, ये संविधान की बात करते हैं. किस आर्टिकल के तहत इसकी मांग करते हैं. धर्म के नाम पर आरक्षण ना हम अभी देंगे ना कभी किसी को देने देंगे.
शाह ने कहा कि मंडल आयोग के सुझाव को इंदिरा जी ने ठंडे बस्ते में डाला, लेकिन 1990 में वीपी सिंह उसे लेकर आए. विपक्ष के नेता राजीव गांधी ने अपने जीवन के सबसे लंबे भाषण में मंडल आयोग का विरोध किया. जाति जनगणना का विरोध किया था.
सरकार में 27 मंत्री ऐसे हैं, जो ओबीसी से हैं: शाह
शाह ने कहा कि बीजेपी ने अति पिछड़ा समाज के व्यक्ति को पीएम बनाया. नरेंद्र मोदी सरकार में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं जो 40 प्रतिशत है. ओबीसी कमीशन को संवाधानिक मान्यता दी. साथ ही कहा कि 16 जातियों को ओबीसी के अंतर्गत लेकर आए. इसके अलावा उन्होंने कहा कि बिल का मुख्य उद्देश्य यह है कि 2029 का चुनाव आरक्षण के साथ कराया जाए. दूसरा उद्देश्य है कि एक व्यक्ति एक वोट और एक मूल्य लागू हो.
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