यूपी: SC के फैसले से शिक्षामित्रों के आए 'अच्छे दिन', नहीं हटाए जाएंगे असिस्टेंट टीचर
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर कहा है कि समायोजित हुए पौने दो लाख शिक्षा मित्रों को दो साल में टीईटी पास करना होगा. कोर्ट ने कहा कि सहायक शिक्षक बनने के लिए उन्हें दो साल में टीईटी की परीक्षा पास करनी होगी. शिक्षामित्रों को सहायक टीचर बनने के लिए टीईटी पास करने के लिए उम्र सीमा में छूट दी जाएगी.

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के पौने दो लाख शिक्षामित्रों को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से असिस्टेंट टीचर (सहायक शिक्षक) पर हुए समायोजन को रद्द किए जाने के फैसले को पलटते हुए अपने फैसले में कहा है कि लगातार पढ़ाते रहने की वजह से इन्हे रद्द नहीं किया जा सकता.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर कहा है कि समायोजित हुए पौने दो लाख शिक्षा मित्रों को दो साल में टीईटी पास करना होगा. कोर्ट ने कहा कि सहायक शिक्षक बनने के लिए उन्हें दो साल में टीईटी की परीक्षा पास करनी होगी. शिक्षामित्रों को सहायक टीचर बनने के लिए टीईटी पास करने के लिए उम्र सीमा में छूट दी जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलने से खुश इलाहाबाद के शिक्षामित्रों ने आज जमकर जश्न मनाया. शिक्षामित्रों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कोर्ट के साथ ही केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकार का शुक्रिया अदा किया. फैसले से खुश शिक्षामित्रों ने कहा है कि इससे देश की न्यायिक व्यवस्था पर उनका भरोसा और बढ़ गया है.
शिक्षामित्रों ने इलाहाबाद के सुभाष चौक पर इकट्ठे होकर जश्न मनाया और पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी के पक्ष में नारे लगाए. शिक्षामित्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उनकी नौकरी पर मंडरा रहा खतरा खत्म हो गया है. उनका कहना है कि कोर्ट के इस फैसले से उनलोगों का परिवार भी बहुत खुश है.
शिक्षामित्र इस फैसले से इसलिए भी खुश हैं क्योंकि पौने दो लाख शिक्षामित्रों में से एक लाख अड़तीस हजार पहले ही टीईटी पास कर चुके हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितम्बर 2015 में पौने दो लाख शिक्षामित्रों को असिस्टेंट टीचर बनाए जाने के फैसले को रद्द कर दिया था.



















