पितृ पक्ष में श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने से मिलती है पूर्वजों की आत्मा को शांति
हिन्दू धर्म में पुरखों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पिंडदान और तर्पण का बहुत अधिक महत्व है. ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म कर पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शान्ति और मुक्ति मिलती है.

प्रयागराज: आज से पितृ पक्ष शुरु हो गया है. हिन्दू धर्म में पुरखों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण का बहुत अधिक महत्व है. यूपी के प्रयागराज में लोग संगम में डुबकी लगाते हैं और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं.
पितृपक्ष के पहले दिन आज देश के कोने-कोने से आए हज़ारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शान्ति व मुक्ति के लिए श्राद्ध कर्म कर रहे हैं. ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म कर पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों की सोलह पीढ़ियों की आत्मा को शान्ति और मुक्ति मिलती है.

ऐसा माना जाता है कि प्रयाग मुक्ति का पहला द्वार है, काशी दूसरा और गया तीसरा. पितरों के श्राद्ध कर्म की शुरुआत मुंडन संस्कार से होती है. इसके बाद तिल, जौ और आटे से बने सत्रह पिंडों को तैयार कर पूरे विधि विधान के साथ उनकी पूजा अर्चना कर उसे गंगा में विसर्जित करने और संगम में स्नान कर तर्पण किये जाने की परंपरा है.
कहा जाता है कि श्राद्ध में खाने के लिए जो कुछ पितरों को अर्पण किया जाता है वह उन तक पहुंच जाता है. प्रयाग में केश दान की भी परंपरा है. हालांकि इन दिनों बाढ़ के कारण संगम के इलाके में श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का अनुभव हो रहा है.
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